प्रस्तावना
विष्णु प्रभाकर हिंदी साहित्य के महान कथाकार, उपन्यासकार, नाटककार, जीवनीकार, यात्रा-वृत्तांत लेखक तथा स्वतंत्रता सेनानी थे। वे उन लेखकों में शामिल हैं जिन्होंने गांधीवादी विचारधारा, सामाजिक चेतना, राष्ट्रप्रेम और मानवीय मूल्यों को साहित्य का मूल आधार बनाया।
जन्म और परिवार
विष्णु प्रभाकर का जन्म 21 जून 1912 ई० को उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जनपद के मीरापुर नामक कस्बे में हुआ था। उनके पिता का नाम दुर्गाप्रसाद तथा माता का नाम महादेवी था। उनका परिवार मध्यमवर्गीय, धार्मिक तथा संस्कारी था। बचपन से ही उन्हें अच्छे संस्कार मिले, जिनका प्रभाव उनके व्यक्तित्व और साहित्य पर स्पष्ट दिखाई देता है।
वे प्रारम्भ से ही गंभीर, संवेदनशील, परिश्रमी और अध्ययनशील स्वभाव के थे। परिवार की आर्थिक स्थिति साधारण होने के कारण उन्हें जीवन में अनेक संघर्षों का सामना करना पड़ा, परंतु उन्होंने कठिन परिश्रम और आत्मविश्वास से सफलता प्राप्त की।
शिक्षा
विष्णु प्रभाकर की प्रारम्भिक शिक्षा मीरापुर में हुई। वे प्रतिभाशाली छात्र थे और पढ़ाई में विशेष रुचि रखते थे। आर्थिक कठिनाइयों के कारण नियमित शिक्षा में बाधाएँ आईं, फिर भी उन्होंने अध्ययन जारी रखा। उन्होंने हिंदी, संस्कृत, उर्दू और अंग्रेज़ी भाषाओं का अच्छा ज्ञान प्राप्त किया।
बाद में उन्होंने स्वाध्याय के माध्यम से अपने ज्ञान का विस्तार किया। साहित्य, इतिहास, समाजशास्त्र और दर्शन का उन्होंने गंभीर अध्ययन किया। विद्यार्थी जीवन से ही वे राष्ट्रीय चेतना और समाज सेवा की ओर आकर्षित थे।
कार्य-जीवन
विष्णु प्रभाकर ने प्रारंभ में सरकारी नौकरी की, परंतु स्वतंत्र विचारों के कारण उन्होंने नौकरी छोड़ दी। बाद में वे साहित्य-सृजन, पत्रकारिता तथा आकाशवाणी से जुड़े। उन्होंने रेडियो नाटक, कहानी, उपन्यास तथा निबंध लेखन में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन साहित्य सेवा और समाज सुधार के कार्यों में लगाया। वे गांधीवादी विचारधारा से प्रभावित थे और सत्य, अहिंसा तथा मानवता में विश्वास रखते थे।
साहित्यिक व्यक्तित्व
विष्णु प्रभाकर बहुमुखी प्रतिभा के साहित्यकार थे। वे उपन्यासकार, कहानीकार, नाटककार, जीवनीकार, संस्मरणकार और बाल साहित्यकार के रूप में प्रसिद्ध हैं। उनकी रचनाओं में मानवता, सामाजिक समानता, नारी सम्मान, राष्ट्रीयता और नैतिक मूल्यों का सुंदर चित्रण मिलता है।
वे साहित्य को समाज परिवर्तन का साधन मानते थे। उनकी रचनाओं में आदर्शवाद और यथार्थवाद दोनों का समन्वय मिलता है।
प्रमुख रचनाएँ
उपन्यास
- अर्धनारीश्वर
- ढलती रात
- स्वप्नमयी
- धरती अब भी घूम रही है
- पाप का घड़ा
- होरी
- क्षमादान
- दो मित्र
नाटक
- हत्या के बाद
- प्रकाश और परछाइयाँ
- अशोक
- टूटते परिवेश
- अब और नहीं
- नव प्रभात
कहानी संग्रह
- संघर्ष के बाद
- मेरा वतन
- खिलौने
- और अंत
आत्मकथा
- पंखहीन (तीन खंड)
यात्रा-वृत्तांत
- ज्योतिपुंज हिमालय
- जमुना-गंगा के नैहर में
जीवनी
आवारा मसीहा (शरतचंद्र चट्टोपाध्याय)
भाषा-शैली
विष्णु प्रभाकर की भाषा सरल, सहज, शुद्ध और प्रभावपूर्ण है। उनकी भाषा में भावों की स्पष्टता तथा विचारों की गंभीरता मिलती है।
उनकी शैली के प्रमुख रूप हैं—
- वर्णनात्मक शैली
- विचारात्मक शैली
- भावात्मक शैली
- संवादात्मक शैली
- प्रेरणात्मक शैली
साहित्य में स्थान
विष्णु प्रभाकर आधुनिक हिंदी साहित्य के प्रमुख साहित्यकारों में गिने जाते हैं। उन्होंने कथा, उपन्यास, नाटक, जीवनी और निबंध सभी क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया। मानवतावादी दृष्टिकोण और सामाजिक चेतना के कारण हिंदी साहित्य में उनका स्थान अत्यंत सम्माननीय है।
वे हिंदी के आदर्शवादी और जनप्रिय साहित्यकारों में सदैव स्मरण किए जाते हैं।
पुरस्कार और सम्मान
- शलाका सम्मान
- साहित्य अकादमी पुरस्कार – अर्धनारीश्वर
- पद्म भूषण
- सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार – आवारा मसीहा
- मूर्ति देवी पुरस्कार (ज्ञानपीठ)
- महापंडित राहुल सांकृत्यायन पुरस्कार
निधन
विष्णु प्रभाकर का निधन 11 अप्रैल 2009 ई० को हुआ। उनके निधन से हिंदी साहित्य जगत को अपूरणीय क्षति पहुँची।
