प्रस्तावना
राही मासूम रज़ा हिंदी और उर्दू साहित्य के ऐसे विशिष्ट रचनाकार थे जिन्होंने उपन्यास, कविता, पटकथा और संवाद लेखन चारों क्षेत्रों में अपनी अमिट पहचान बनाई। वे गंगा-जमुनी तहज़ीब, भारतीय सेकुलर चेतना और मानवीय मूल्यों के प्रबल समर्थक थे।
जन्म और परिवार
राही मासूम रज़ा हिंदी और उर्दू साहित्य के प्रसिद्ध उपन्यासकार, कवि, पटकथा लेखक तथा विचारक थे। उनका जन्म 1 सितंबर 1927 ई० को उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जनपद के गंगौली गाँव में हुआ था। उनके पिता का नाम सैयद बशीर हसन रज़ा था, जो प्रतिष्ठित व्यक्ति थे। उनका परिवार शिक्षित, सभ्य और सांस्कृतिक वातावरण वाला था। बचपन से ही उन्हें साहित्य, भाषा और अध्ययन में विशेष रुचि थी।
गाँव का वातावरण, गंगा-जमुनी संस्कृति, हिंदू-मुस्लिम एकता, ग्रामीण जीवन और भारतीय समाज की विविधता का गहरा प्रभाव उनके व्यक्तित्व तथा रचनाओं पर पड़ा। यही कारण है कि उनकी कृतियों में भारतीय जीवन का यथार्थ चित्रण मिलता है।
शिक्षा
राही मासूम रज़ा की प्रारम्भिक शिक्षा गाँव तथा गाजीपुर में हुई। वे अत्यंत मेधावी छात्र थे। आगे की शिक्षा के लिए वे अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय गए, जहाँ से उन्होंने उच्च शिक्षा प्राप्त की। उन्होंने हिंदी और उर्दू साहित्य का गंभीर अध्ययन किया तथा बाद में पी-एच.डी. की उपाधि भी प्राप्त की।
विद्यार्थी जीवन से ही वे साहित्य लेखन की ओर आकर्षित थे। उन्होंने कविता, कहानी और लेखन का अभ्यास प्रारम्भ कर दिया था।
कार्य-जीवन
शिक्षा पूर्ण करने के बाद राही मासूम रज़ा ने अध्यापन कार्य किया। बाद में वे मुंबई चले गए और फिल्म जगत से जुड़ गए। उन्होंने फिल्मों और टेलीविजन के लिए पटकथा, संवाद तथा लेखन कार्य किया।
उन्होंने साहित्य के साथ-साथ जनमाध्यमों में भी अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। वे सिनेमा और दूरदर्शन दोनों क्षेत्रों में अत्यंत सफल रहे।
साहित्यिक व्यक्तित्व
राही मासूम रज़ा हिंदी साहित्य के अत्यंत लोकप्रिय और यथार्थवादी लेखक थे। वे ऐसे साहित्यकार थे जिन्होंने भारतीय समाज, ग्रामीण जीवन, सांप्रदायिकता, राजनीति, सामाजिक विषमता और मानवीय संवेदनाओं को अपनी रचनाओं का विषय बनाया।
उनकी रचनाओं में भारतीय संस्कृति की मिली-जुली परंपरा, मानवता, प्रेम और सामाजिक चेतना का सुंदर समन्वय मिलता है। वे धर्म के नाम पर विभाजन और नफरत के विरोधी थे।
उनका व्यक्तित्व स्पष्टवादी, संवेदनशील और प्रगतिशील था। वे साहित्य को समाज की सच्चाई व्यक्त करने का माध्यम मानते थे।
प्रमुख साहित्यिक कृतियाँ
हिंदी उपन्यास
- आधा गाँव
- टोपी शुक्ला
- कटरा बी आर्ज़ू
- ओस की बूँद
- असंतोष के दिन
- सीन 75
- दिल एक सादा काग़ज़
- हिम्मत जौनपुरी
- नीम का पेड़
उर्दू उपन्यास
- मुहब्बत के सिवा
काव्य-संग्रह (उर्दू)
- नया साल
- मौजे-गुल : मौजे-सबा
- रक्से-मय
- अजनबी शहर के अजनबी रास्ते
- ग़रीबे शहर
हिंदी में अनूदित काव्य
- मैं एक फेरीवाला
- शीशे के मकाँ वाले
- ग़रीबे शहर
अन्य कृतियाँ
- छोटे आदमी की बड़ी कहानी (वीर अब्दुल हमीद की जीवनी)
- क्रांति कथा (उर्दू महाकाव्य का हिंदी रूपांतरण)
फ़िल्म और टेलीविज़न लेखन
प्रमुख फ़िल्में
- मैं तुलसी तेरे आँगन की
- तवायफ़
- लम्हे
- गोलमाल
- मिली
- क़र्ज़
भाषा-शैली
राही मासूम रज़ा की भाषा सरल, प्रभावशाली, भावपूर्ण और यथार्थवादी है। उनकी भाषा में हिंदी, उर्दू तथा लोकभाषा का सुंदर मिश्रण मिलता है।
उनकी शैली के प्रमुख रूप हैं—
- यथार्थवादी शैली
- भावात्मक शैली
- व्यंग्यात्मक शैली
- संवादात्मक शैली
- सामाजिक शैली
साहित्य में स्थान
राही मासूम रज़ा आधुनिक हिंदी साहित्य के प्रमुख उपन्यासकारों में गिने जाते हैं। उन्होंने हिंदी उपन्यास को नई दृष्टि दी और भारतीय समाज की वास्तविक समस्याओं को सामने रखा। सांप्रदायिक सौहार्द, मानवता और ग्रामीण जीवन के चित्रण के कारण उनका स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है।
हिंदी साहित्य में वे एक विशिष्ट कथाकार, चिंतक और संवेदनशील लेखक के रूप में सदैव स्मरणीय रहेंगे।
पुरस्कार और सम्मान
राही मासूम रज़ा को साहित्य और फिल्म जगत में अनेक सम्मान प्राप्त हुए। उन्हें हिंदी-उर्दू साहित्य के सेतु के रूप में भी सम्मानित किया जाता है।
निधन
राही मासूम रज़ा का निधन 15 मार्च 1992 ई० को हुआ। उनके निधन से हिंदी साहित्य और भारतीय संस्कृति को बड़ी क्षति पहुँची।
