हरिकृष्ण ‘प्रेमी’ का जीवन परिचय | Harikrishna ‘Premi’ Biography in Hindi

हरिकृष्ण ‘प्रेमी’ (1908–1974) हिंदी साहित्य के ऐसे बहुआयामी रचनाकार थे, जिन्होंने नाटक, कविता, एकांकी, गीति-नाट्य, पत्रकारिता और फ़िल्म जगत—सभी क्षेत्रों में सक्रिय योगदान दिया। वे राष्ट्रीय आंदोलन से गहराई से जुड़े रहे और गाँधीवादी विचारधारा, स्वदेश-प्रेम, मानव-प्रेम, धर्मनिरपेक्षता तथा सामाजिक सुधार उनकी रचनाओं के मूल स्वर रहे। हिंदी नाटक परंपरा में उनका स्थान एक राष्ट्रीय चेतना के सशक्त नाटककार के रूप में अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।

1. संक्षिप्त परिचय

  • पूरा नाम: हरिकृष्ण
  • उपनाम: ‘प्रेमी’
  • जन्म: 1908 ई.
  • जन्म स्थान: गुना, ग्वालियर (वर्तमान मध्य प्रदेश)
  • मृत्यु: 1974 ई.
  • मुख्य विधाएँ: नाटक, कविता, एकांकी, गीति-नाट्य, पत्रकारिता
  • विचारधारा: राष्ट्रवाद, गाँधीवाद, मानवतावाद

2. प्रारंभिक जीवन और पारिवारिक पृष्ठभूमि

हरिकृष्ण ‘प्रेमी’ का जन्म एक राष्ट्रभक्त परिवार में हुआ।

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now
Instagram Group Join Now
  • बचपन में ही माता का देहांत हो गया, जिससे उनके जीवन में भावनात्मक रिक्तता और करुणा का गहरा प्रभाव पड़ा।
  • यही भावुकता आगे चलकर प्रेम, करुणा और मानव-संवेदना के रूप में उनके साहित्य में रूपांतरित हुई।

उन्होंने स्वयं ‘प्रेमी’ उपनाम चुना, क्योंकि उनके अंतर्मन में प्रेम की अतृप्त तृष्णा थी—जो उनके व्यक्तित्व और लेखन दोनों में स्पष्ट दिखाई देती है।

3. शिक्षा, पत्रकारिता और साहित्यिक जीवन की शुरुआत

हरिकृष्ण ‘प्रेमी’ का साहित्यिक जीवन
👉 पं. माखनलाल चतुर्वेदी के सान्निध्य में आरंभ हुआ।

  • उन्होंने ‘त्यागभूमि’ पत्रिका के माध्यम से लेखन आरंभ किया
  • बाद में लाहौर से ‘भारती’ पत्रिका का प्रकाशन किया
  • पत्रकारिता को उन्होंने केवल व्यवसाय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चेतना जगाने का माध्यम माना

4. स्वतंत्रता आंदोलन और गाँधीवादी प्रभाव

हरिकृष्ण ‘प्रेमी’

  • स्वाधीनता संग्राम में सक्रिय रहे
  • महात्मा गाँधी के अहिंसा, सत्य और हृदय-परिवर्तन के सिद्धांतों से गहराई से प्रभावित थे

उनकी रचनाओं में—

  • सांप्रदायिक सौहार्द
  • हिंदू-मुस्लिम एकता
  • शरणागत रक्षा
  • राष्ट्र के लिए बलिदान

जैसे मूल्य बार-बार उभरकर आते हैं।

5. फ़िल्म जगत और आकाशवाणी से संबंध

  • उन्होंने लाहौर और मुंबई में फ़िल्म क्षेत्र में कार्य किया
  • आकाशवाणी जालंधर में हिंदी निदेशक रहे
  • फ़िल्म अभिनेत्री मुमताज़ जहाँ बेग़म देहलवी को ‘मधुबाला’ नाम देने का श्रेय भी हरिकृष्ण ‘प्रेमी’ को जाता है

6. हरिकृष्ण ‘प्रेमी’ का नाट्य-साहित्य

(क) ऐतिहासिक नाटक

  1. रक्षा-बंधन (1938)
    • रानी कर्मवती द्वारा हुमायूँ को राखी भेजने की कथा
    • उद्देश्य: हिंदू-मुस्लिम एकता और राष्ट्रीय समन्वय
  2. शिवा साधना (1937) – शिवाजी का धर्मनिरपेक्ष राष्ट्रदृष्टि में चित्रण
  3. प्रतिशोध (1937) – छत्रपाल का औरंगज़ेब से संघर्ष
  4. आहुति (1940) – हम्मीर देव का शरणागत-रक्षा हेतु बलिदान
  5. स्वप्नभंग (1940) – दारा शिकोह की पराजय से धर्मनिरपेक्ष आदर्शों का टूटना
  6. विषपान (1945) – स्वदेश रक्षा के लिए आत्मबलिदान

(ख) पौराणिक नाटक

  • पाताल विजय (1936)
    👉 उनका एकमात्र पौराणिक नाटक, जिसमें नैतिक संघर्ष और मानवीय मूल्य प्रमुख हैं।

(ग) सामाजिक नाटक

  1. बंधन (1940) – मजदूर-पूँजीपति संघर्ष; समाधान गाँधीवादी हृदय-परिवर्तन
  2. छाया (1941) – साहित्यकार का आर्थिक संघर्ष
  3. ममता – दांपत्य जीवन की समस्याएँ

7. एकांकी साहित्य

एकांकी संग्रह:

  • मंदिर (1942)
  • बादलों के पार (1942)

प्रमुख एकांकी:

  • यह मेरी जन्मभूमि है
  • नया समाज
  • घर या होटल
  • पश्चात्ताप
  • निष्ठुर न्याय
  • मातृभूमि का मान

8. गीति-नाट्य और संगीत-रूपक

हरिकृष्ण ‘प्रेमी’ ने रेडियो के लिए कई गीति-नाट्य लिखे—

  • सोहनी-महीवाल
  • हीर-रांझा
  • सस्सी-पुन्नू
  • मिर्ज़ा-साहिबा
  • दुल्ला-भट्टी
  • मीराबाई
  • देवदासी

इनमें प्रेम का एकनिष्ठ, विद्रोही और मानवीय स्वरूप उभरता है।

9. काव्य-साहित्य

प्रमुख कविता-संग्रह:

  • आँखों में (1930) – विरह और प्रेम
  • जादूगरनी (1932) – माया और रहस्यवाद
  • अनंत के पथ पर (1932)
  • अग्निगान (1940) – राष्ट्रीय जागरण
  • वंदना के बोल – गाँधी-दर्शन
  • रूप रेखा, प्रतिभा

मुक्तछंद की रचनाएँ—

  • करना है संग्राम
  • बेटी की विदा
  • बहन का विवाह

10. साहित्यिक विशेषताएँ

  • राष्ट्रीय चेतना और धर्मनिरपेक्षता
  • स्वच्छंदतावादी शैली का संयमित प्रयोग
  • रंगमंचीय सफलता
  • समस्या के साथ समाधान
  • गाँधीवादी दर्शन का प्रभाव

11. साहित्य में स्थान और महत्व

हरिकृष्ण ‘प्रेमी’
👉 हिंदी नाटक के उन विरल रचनाकारों में हैं, जिन्होंने

  • इतिहास को राष्ट्रीय संदेश का माध्यम बनाया
  • समाज की समस्याओं पर रचनात्मक हस्तक्षेप किया
  • साहित्य को आंदोलन और मानवीय चेतना से जोड़ा

12. निधन

हरिकृष्ण ‘प्रेमी’ का निधन 1974 ई. में हुआ। (कुछ स्रोतों में 1979 भी मिलता है, पर साहित्यिक रूप से 1974 अधिक स्वीकृत है।)

Scroll to Top