बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’ (1897–1960) हिंदी साहित्य के सुप्रसिद्ध कवि, स्वतंत्रता सेनानी, पत्रकार, चिंतक और सशक्त राष्ट्रीय व्यक्तित्व थे। वे अपने ओजपूर्ण तथा राष्ट्रवादी साहित्य, स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भूमिका, तथा हिंदी पत्रकारिता में निर्भीक लेखन के लिए स्मरण किए जाते हैं। आधुनिक हिंदी कविता में उनका स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है।
उनकी कविताओं में देशभक्ति, मानवतावाद, विद्रोह, ओज, करुणा और भावुकता का सुंदर समन्वय मिलता है, और उन्होंने खड़ी बोली हिंदी को राष्ट्रीय चेतना के माध्यम के रूप में प्रतिष्ठित किया।
1. जन्म, परिवार और प्रारंभिक जीवन
- जन्म: 8 दिसंबर 1897
- स्थान: ग्राम भयाना, जिला शाजापुर, मध्य प्रदेश
- पिता: पंडित जमुनादास शर्मा – जो वल्लभ सम्प्रदाय के अनुयायी एवं नाथद्वारा मंदिरों में पुरोहिती करते थे।
- बचपन: 11 वर्ष की आयु में औपचारिक शिक्षा का आरंभ हुआ। बचपन से ही गंभीर स्वभाव, अध्ययनशीलता और देश के प्रति संवेदना का भाव स्पष्ट था।
नवीन जी के बचपन का अधिकांश समय गृह जनपद के ग्रामीण वातावरण में बीता, जिसने उनके व्यक्तित्व को सरलता, संवेदनशीलता और मानवीयता का स्वर दिया।
2. शिक्षा-दीक्षा
- प्राथमिक शिक्षा भयाना के परगना स्कूल में।
- आगे की पढ़ाई के लिए उन्हें उज्जैन के माधव कॉलेज में भेजा गया, जहाँ उन्होंने मैट्रिक उत्तीर्ण किया।
- कॉलेज के दिनों में ही वे राष्ट्रीय आंदोलनों, देशभक्ति और साहित्यिक हलचलों के संपर्क में आए।
- उच्च शिक्षा हेतु वे कानपुर के क्राइस्ट चर्च कॉलेज पहुँचे, जहाँ गणेश शंकर विद्यार्थी के संपर्क ने उनके व्यक्तित्व को क्रांतिकारी दिशा दी।
1920 में महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन से प्रभावित होकर उन्होंने अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी और स्वतंत्रता संग्राम में कूद पड़े।
3. स्वतंत्रता संग्राम में योगदान
बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’ स्वतंत्रता आंदोलन के अग्रिम पंक्ति के सेनानियों में थे।
उन्होंने—
- असहयोग आंदोलन
- नमक सत्याग्रह
- व्यक्तिगत सत्याग्रह
- भारत छोड़ो आंदोलन (1942)
में सक्रिय भूमिका निभाई।
इन आंदोलनों में भाग लेने के कारण वे लगातार 6 बार जेल गए, और उन्होंने अपने जीवन के लगभग 9 वर्ष जेलों में बिताए।
इन जेल यात्राओं के दौरान ही उनकी प्रमुख कविताएँ, महाकाव्य उर्मिला तथा अन्य ओजपूर्ण रचनाएँ लिखी गईं, जो हिंदी साहित्य की अनमोल धरोहर बन गईं।
4. राजनीतिक जीवन
स्वतंत्रता के बाद नवीन जी की राजनीतिक यात्रा भी अत्यंत सम्मानजनक रही।
- वे कानपुर लोकसभा क्षेत्र से प्रथम लोकसभा सदस्य चुने गए।
- बाद में 1957 से मृत्यु (1960) तक राज्यसभा सदस्य रहे।
- वे संविधान सभा (1946-1949) के भी सदस्य थे और भारत के संविधान निर्माण में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा।
उनकी राजनीति का आधार सदैव राष्ट्रहित, नैतिकता और लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित रहा।
5. पत्रकारिता में योगदान
बालकृष्ण शर्मा नवीन हिंदी के ओजस्वी और निर्भीक पत्रकार थे।
- वे गणेश शंकर विद्यार्थी की पत्रिका ‘प्रताप’ से जुड़े और बाद में उसके संपादक बने।
- उन्होंने ‘प्रभा’ पत्रिका का भी संपादन किया।
- उनकी टिप्पणियाँ और संपादकीय शैली स्पष्टवादिता, राजनीतिक जागरूकता और राष्ट्रीय चेतना के लिए जानी जाती थीं।
‘प्रभा’ के झंडा अंक को हिंदी की राष्ट्रीय पत्रकारिता का ऐतिहासिक दस्तावेज माना जाता है।
6. साहित्यिक जीवन और प्रमुख रचनाएँ
प्रथम रचना
उनकी पहली साहित्यिक रचना “संतू” शीर्षक की एक कहानी थी, जिसे उन्होंने ‘सरस्वती’ पत्रिका में भेजा था। बाद में वे कविता की ओर अधिक आकृष्ट हुए।
काव्य-सृजन
उनकी कविताओं में—
- राष्ट्रप्रेम
- मानवीय संवेदना
- क्रांति का स्वर
- गहरी भावुकता
- आध्यात्मिक तत्व
- रहस्यवाद
- प्रकृति सौंदर्य
का अद्भुत संगम मिलता है।
प्रमुख कविता-संग्रह एवं ग्रंथ
- कुमकुम
- रश्मिरेखा
- अपलक
- क्वासी
- उर्मिला (महाकाव्य)
- विनोबा-स्तवन
- प्राणार्पण
- हम विषपायी जनम के
इन रचनाओं में नवीन जी की रचनाशीलता, ओज, करुणा तथा राष्ट्रभक्ति का शिखर देखने को मिलता है।
महाकाव्य – उर्मिला
उनका महाकाव्य ‘उर्मिला’ आधुनिक हिंदी साहित्य की श्रेष्ठ कृतियों में गिना जाता है।
यह छः सर्गों का महाकाव्य है जिसमें उर्मिला के जन्म से लेकर लक्ष्मण से पुनर्मिलन तक की कथा है, परंतु इसका सबसे प्रभावशाली भाग उर्मिला का विरह-चित्रण है।
7. काव्यगत विशेषताएँ (Poetic Characteristics)
(1) राष्ट्रीयता और देशभक्ति
उनकी अधिकांश रचनाएँ राष्ट्रीय आंदोलनों से प्रेरित हैं।
हिंदुस्तान, हिमालय, भारतीय जनमानस, स्वतंत्रता के वीर—इनका चित्रण उनकी कविताओं का मूल है।
(2) मानवतावाद
वे अत्यंत उदार हृदय के कवि थे। उनकी कविता में वर्ग-संघर्ष, मजदूर आंदोलन और समाज के दर्द की गहरी अनुभूति मिलती है।
(3) रहस्यवाद
‘अपलक’ और ‘क्वासी’ में उन्होंने प्रेम को आध्यात्मिक स्वरूप दिया।
कहीं-कहीं उनकी भावनाएँ दार्शनिक और रहस्यमय हो जाती हैं।
(4) भाषा-शैली
- सरल, प्रवाहपूर्ण खड़ी बोली
- कहीं-कहीं उर्दू और ग्रामीण शब्द
- भावानुकूलता
- ओजस्विता और कोमलता का संतुलन
- अनुप्रास, उपमा, रूपक, मानवीकरण जैसे अलंकारों का स्वाभाविक प्रयोग
8. सम्मान और पहचान
- 1955: साहित्य अकादमी पुरस्कार (हिंदी में पहला)
- 1960: पद्म भूषण
- 1989: उनके सम्मान में डाक टिकट जारी
- राष्ट्रभक्ति और ओजस्वी लेखनी के कारण वे “आधुनिक युग के राष्ट्रीय कवि” कहलाए।
9. व्यक्तिगत जीवन
- नवीन जी भावुक, सरल, सहृदय और अध्यवसायी व्यक्ति थे।
- उन्हें संगीत से भी गहरा लगाव था—वे मधुर गायक भी थे।
- वे अन्याय के प्रबल विरोधी और सत्य व राष्ट्रधर्म के पक्षधर थे।
10. निधन
29 अप्रैल 1960 को उनका निधन हुआ।
अपने जीवन के अंतिम समय तक वे लेखन, पत्रकारिता और राष्ट्रहित की चिंतनधारा से जुड़े रहे।
