जीवन परिचय
प्रसिद्ध हिंदी कवि और राष्ट्रवादी विचारधारा के समर्थक सोहनलाल द्विवेदी का जन्म 22 फरवरी 1906 ई० को बिंदकी (जिला फतेहपुर, उत्तर प्रदेश) में एक साधारण ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनके पिता धार्मिक प्रवृत्ति के व्यक्ति थे और घर का वातावरण संस्कारयुक्त था। बाल्यकाल से ही उनमें देशप्रेम, सादगी और उच्च आदर्शों के प्रति झुकाव दिखाई देता था। उनका जीवन उस समय के राष्ट्रीय वातावरण से प्रभावित था, जब भारत स्वतंत्रता संग्राम के दौर से गुजर रहा था। यही कारण है कि आगे चलकर उनके व्यक्तित्व और साहित्य में राष्ट्रभक्ति की भावना प्रमुख रूप से दिखाई देती है।
शिक्षा
सोहनलाल द्विवेदी ने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा अपने क्षेत्र में प्राप्त की। आगे चलकर उन्होंने उच्च शिक्षा प्राप्त की और हिंदी, संस्कृत तथा अंग्रेज़ी का अच्छा ज्ञान अर्जित किया। वे एक मेधावी छात्र थे और पढ़ाई के साथ-साथ साहित्य में भी उनकी गहरी रुचि थी। छात्र जीवन में ही उन्होंने कविता लिखना प्रारम्भ कर दिया था। उन्होंने स्वाध्याय के माध्यम से भी अपने ज्ञान को समृद्ध किया और साहित्य तथा समाज से जुड़े विषयों का गहन अध्ययन किया।
साहित्यिक जीवन
सोहनलाल द्विवेदी हिंदी साहित्य के प्रमुख राष्ट्रवादी कवियों में गिने जाते हैं। उन्होंने अपने काव्य के माध्यम से देशभक्ति, राष्ट्रीय चेतना और मानवता का संदेश दिया। उनकी रचनाओं में सरलता, ओज और प्रेरणा का सुंदर समन्वय मिलता है। वे साहित्य को समाज और राष्ट्र को जागरूक करने का माध्यम मानते थे। उनकी कविताएँ जनसामान्य के हृदय को स्पर्श करती हैं और उनमें उत्साह तथा देशप्रेम की भावना उत्पन्न करती हैं।
रचनाएँ
सोहनलाल द्विवेदी की प्रमुख रचनाएँ निम्नलिखित हैं—
- भैरवी
- पूजा गीत
- युगधारा
- कुणाल
- त्रिशूल
उनकी रचनाओं में राष्ट्रप्रेम, त्याग, आदर्श और नैतिकता का सुंदर चित्रण मिलता है।
भाषा-शैली
सोहनलाल द्विवेदी की भाषा अत्यंत सरल, स्पष्ट, ओजपूर्ण और प्रेरणादायक है। वे कठिन भावों को भी सरल शब्दों में व्यक्त करते थे, जिससे उनकी कविताएँ आम जनमानस तक आसानी से पहुँच जाती हैं। उनकी शैली में जोश, ऊर्जा और राष्ट्रभक्ति की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।
साहित्य में स्थान
हिंदी साहित्य में सोहनलाल द्विवेदी का स्थान एक प्रमुख राष्ट्रवादी कवि के रूप में है। उन्होंने अपने काव्य के माध्यम से देशभक्ति की भावना को जन-जन तक पहुँचाया और लोगों को प्रेरित किया। उनका योगदान हिंदी साहित्य में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
निधन
सोहनलाल द्विवेदी का निधन 1 मार्च 1988 ई० को हुआ।
