गुलज़ार का जीवन परिचय | Gulzar Ka Jeevan Parichay

प्रस्तावना

गुलज़ार आधुनिक भारत के प्रसिद्ध कवि, गीतकार, शायर, पटकथा लेखक, फिल्म निर्देशक, संवाद लेखक तथा साहित्यकार हैं। वे हिंदी-उर्दू साहित्य और भारतीय सिनेमा के सबसे सम्मानित रचनाकारों में गिने जाते हैं। उनकी रचनाओं में प्रेम, प्रकृति, मानवीय संवेदनाएँ, सामाजिक यथार्थ, जीवन-दर्शन तथा रिश्तों की गहराई का अत्यंत मार्मिक चित्रण मिलता है। सरल लेकिन गहन अभिव्यक्ति, नए प्रतीकों और अनूठे बिंबों के कारण उन्होंने साहित्य और फिल्म जगत में विशिष्ट स्थान बनाया है।

जन्म एवं प्रारंभिक जीवन

गुलज़ार का वास्तविक नाम संपूर्ण सिंह कालरा है। उनका जन्म 18 अगस्त 1934 ई० को दीना गाँव, झेलम जिला, पंजाब (वर्तमान पाकिस्तान) में हुआ था। उनके पिता का नाम मक्खन सिंह कालरा था, जो एक व्यवसायी थे। उनकी माता का नाम सुजान कौर था।

गुलज़ार का बचपन विभाजन-पूर्व भारत में बीता। वर्ष 1947 में भारत-विभाजन के दौरान उनका परिवार भारत आ गया और मुंबई (तत्कालीन बंबई) में बस गया। विभाजन की पीड़ा, विस्थापन और संघर्ष ने उनके व्यक्तित्व और साहित्य पर गहरा प्रभाव डाला। बचपन से ही उन्हें पढ़ने-लिखने और कविता में विशेष रुचि थी। धीरे-धीरे उन्होंने उर्दू, हिंदी, पंजाबी तथा बंगला साहित्य का गंभीर अध्ययन किया, जिसने उनकी साहित्यिक प्रतिभा को नई दिशा दी।

शिक्षा

गुलज़ार ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा दीना और बाद में दिल्ली में प्राप्त की। भारत आने के बाद उन्होंने खालसा कॉलेज, मुंबई में प्रवेश लिया। आर्थिक परिस्थितियों के कारण वे अपनी उच्च शिक्षा पूरी नहीं कर सके, लेकिन उन्होंने स्वाध्याय के माध्यम से हिंदी, उर्दू, पंजाबी, बंगला तथा विश्व साहित्य का व्यापक अध्ययन किया।

रवीन्द्रनाथ ठाकुर, शरतचंद्र चट्टोपाध्याय, प्रेमचंद और फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ जैसे साहित्यकारों का उनके लेखन पर गहरा प्रभाव पड़ा।

कार्य जीवन

मुंबई आने के बाद गुलज़ार ने प्रारंभिक दिनों में एक मोटर गैरेज में मैकेनिक के रूप में काम किया। साहित्य और फिल्मों में रुचि होने के कारण वे फिल्म जगत से जुड़े। प्रसिद्ध गीतकार एवं निर्देशक बिमल रॉय ने उन्हें अपनी फिल्म ‘बंदिनी’ (1963) के लिए गीत लिखने का अवसर दिया। इस फिल्म का गीत “मोरा गोरा अंग लै ले” अत्यंत लोकप्रिय हुआ और यहीं से उनके फिल्मी जीवन की सफल शुरुआत हुई।

इसके बाद उन्होंने गीतकार, पटकथा लेखक, संवाद लेखक तथा फिल्म निर्देशक के रूप में अनेक सफल फिल्में दीं। उन्होंने आंधी, मौसम, किनारा, खुशबू, अंगूर, इजाज़त, माचिस, हू तू तू जैसी चर्चित फिल्मों का निर्देशन किया। उनके गीतों ने भारतीय फिल्म संगीत को नई ऊँचाइयाँ प्रदान कीं।

साहित्यिक जीवन एवं योगदान

गुलज़ार केवल फिल्मी गीतकार ही नहीं, बल्कि उच्चकोटि के कवि, शायर, कहानीकार और बाल साहित्यकार भी हैं। उन्होंने कविता, ग़ज़ल, कहानी, संस्मरण, नाटक तथा बाल साहित्य की अनेक उत्कृष्ट कृतियाँ लिखीं।

उनकी रचनाओं में प्रेम, अकेलापन, स्मृतियाँ, प्रकृति, मानवीय संबंध, सामाजिक परिवर्तन और जीवन की सूक्ष्म भावनाओं का अत्यंत संवेदनशील चित्रण मिलता है। उन्होंने हिंदी और उर्दू दोनों भाषाओं में साहित्य को समृद्ध किया है। उनकी लेखनी की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे साधारण शब्दों में अत्यंत गहरे भाव व्यक्त करते हैं। उनके गीतों और कविताओं में नए बिंब, प्रतीक और कल्पनाएँ देखने को मिलती हैं, जो उन्हें अन्य गीतकारों से अलग पहचान दिलाती हैं।

प्रमुख रचनाएँ

काव्य-संग्रह

  • जानम
  • एक बूँद चाँद
  • रात, चाँद और मैं
  • पुखराज
  • त्रिवेणी
  • ग्रीन पोएम्स (अंग्रेज़ी)

कहानी एवं अन्य कृतियाँ

  • धुआँ
  • रावी पार
  • दो लोग
  • चौरस रात

प्रमुख फिल्मी गीत

  • मोरा गोरा अंग लै ले
  • तेरे बिना ज़िंदगी से कोई शिकवा नहीं
  • दिल ढूँढता है
  • तुझसे नाराज़ नहीं ज़िंदगी
  • मेरा कुछ सामान
  • छैंया छैंया
  • जय हो
  • ऐ अजनबी
  • नमक इश्क का

निर्देशित प्रमुख फ़िल्में

  • मेरे अपने
  • परिचय
  • कोशिश
  • आंधी
  • खुशबू
  • मौसम
  • किनारा
  • अंगूर
  • इजाज़त
  • माचिस
  • हू तू तू

भाषा-शैली

गुलज़ार की भाषा सरल, काव्यात्मक, सांकेतिक, भावपूर्ण तथा अत्यंत प्रभावशाली है। वे हिंदी, उर्दू, पंजाबी और लोकभाषा के शब्दों का अत्यंत सुंदर समन्वय करते हैं। उनकी शैली प्रतीकात्मक, बिंबात्मक, भावात्मक, गीतात्मक तथा दार्शनिक है। उनकी रचनाओं में नए रूपकों, सूक्ष्म भावों और कल्पनाशील अभिव्यक्ति का अद्भुत मेल मिलता है।

व्यक्तित्व और जीवन-दर्शन

गुलज़ार का व्यक्तित्व अत्यंत सरल, विनम्र, संवेदनशील और रचनात्मक है। वे मानवीय मूल्यों, प्रेम, शांति, प्रकृति और सामाजिक सौहार्द के समर्थक हैं। उनका जीवन-दर्शन मानवता, करुणा, सादगी और संवेदनशीलता पर आधारित है। वे मानते हैं कि साहित्य और कला मनुष्य को अधिक संवेदनशील, उदार और मानवीय बनाते हैं।

हिंदी साहित्य में स्थान

गुलज़ार का आधुनिक हिंदी-उर्दू साहित्य तथा भारतीय सिनेमा में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। वे समकालीन भारत के सर्वश्रेष्ठ गीतकारों, कवियों और फिल्म निर्देशकों में गिने जाते हैं। उन्होंने अपनी मौलिक शैली, भावपूर्ण भाषा और साहित्यिक गरिमा से हिंदी गीत-साहित्य को नई ऊँचाइयाँ प्रदान की हैं। आज उनका नाम भारतीय साहित्य और सिनेमा के महान रचनाकारों में अत्यंत सम्मान के साथ लिया जाता है।

सम्मान एवं पुरस्कार

गुलज़ार को साहित्य और भारतीय सिनेमा में उनके असाधारण योगदान के लिए अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुए हैं। प्रमुख सम्मान निम्नलिखित हैं—

  • साहित्य अकादमी पुरस्कार (2002)
  • पद्म भूषण (2004)
  • ऑस्कर पुरस्कार (Academy Award) – वर्ष 2009 में फिल्म “Slumdog Millionaire” के गीत “Jai Ho” के लिए (ए. आर. रहमान के साथ)
  • ग्रैमी पुरस्कार (2010)
  • दादा साहेब फाल्के पुरस्कार (2013)
  • 5 राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार
  • 22 फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय साहित्यिक और फिल्म सम्मान