Authors

प्रताप सिंह का जीवन परिचय | Pratap Singh Ka Jeevan Parichay

ज्ञानी प्रताप सिंह (Punjabi: ਗਿਆਨੀ ਪ੍ਰਤਾਪ ਸਿੰਘ) का जन्म 3 जनवरी 1904 को पंजाब में हुआ था। वे न केवल एक महान सिख पुजारी (Giani) थे, बल्कि एक प्रख्यात पंजाबी लेखक, धार्मिक चिंतक, प्रवचनकर्ता और सिख परंपराओं के गहरे जानकार थे। सिख इतिहास में उनका स्थान अत्यंत आदर और श्रद्धा के साथ लिया जाता है […]

प्रताप सिंह का जीवन परिचय | Pratap Singh Ka Jeevan Parichay Read More »

सखाराम गणेश देउस्कर का जीवन परिचय | Sakharam Ganesh Deuskar Biography in Hindi

सखाराम गणेश देउस्कर (17 दिसम्बर 1869 – 23 नवम्बर 1912) भारतीय नवजागरण के एक प्रखर क्रांतिकारी विचारक, इतिहासकार, पत्रकार और राष्ट्रवादी लेखक थे। वे मराठी मूल के थे, लेकिन जीवन का अधिकांश समय बंगाल में बिताया और वहीं से देश की आज़ादी तथा भारतीय समाज के उत्थान के लिए अपनी कलम को क्रांति का हथियार

सखाराम गणेश देउस्कर का जीवन परिचय | Sakharam Ganesh Deuskar Biography in Hindi Read More »

सेनापति का जीवन परिचय (Senapati Ka Jeevan Parichay In Hindi)

सेनापति हिंदी साहित्य के रीतिकाल के प्रमुख कवियों में से एक माने जाते हैं। वे भक्ति और श्रृंगार — दोनों साहित्यिक धाराओं के अनूठे संगम रूप हैं। उनकी कविता में जहाँ एक ओर रामभक्ति की ओजस्विता है, वहीं दूसरी ओर श्रृंगारिक वर्णनों की कोमलता, प्रकृति-चित्रण और ऋतु-वर्णन का अद्वितीय सौंदर्य भी देखने को मिलता है।

सेनापति का जीवन परिचय (Senapati Ka Jeevan Parichay In Hindi) Read More »

रतन नाथ ‘सरशार’ का जीवन परिचय (Ratan Nath Sarshar Ka Jeevan Parichay)

रतन नाथ ‘सरशार’ (1846/47 – 1903) उर्दू साहित्य के अत्यंत महत्वपूर्ण, प्रभावशाली और इतिहास-निर्माता उपन्यासकार, व्यंग्यकार, स्तंभकार और संपादक माने जाते हैं। उर्दू कथा-साहित्य में आधुनिक उपन्यास विधा के विकास में उनका योगदान इतना महत्वपूर्ण है कि उन्हें उर्दू उपन्यास का प्रारम्भिक निर्माता, फसाना-ए-आज़ाद का सर्जक और लखनऊ की तहज़ीब का श्रेष्ठ चित्रकार कहा जाता

रतन नाथ ‘सरशार’ का जीवन परिचय (Ratan Nath Sarshar Ka Jeevan Parichay) Read More »

भारतेन्दु हरिश्चन्द्र : जीवन परिचय (Bhartendu Harishchandra Ka Jiveen Parichay)

भारतेन्दु हरिश्चन्द्र (9 सितंबर 1850 – 6 जनवरी 1885) आधुनिक हिंदी साहित्य के पितामह, हिन्दी नाटक के जनक, हिन्दी पत्रकारिता के अग्रदूत, एवं भारतीय नवजागरण के प्रतिनिधि साहित्यकार थे। उन्होंने खड़ी बोली को हिंदी गद्य की मानक भाषा के रूप में स्थापित किया और रीतिकालीन काव्यधारा को आधुनिक रूप दिया। उनका साहित्य सामाजिक, राष्ट्रीय, ऐतिहासिक

भारतेन्दु हरिश्चन्द्र : जीवन परिचय (Bhartendu Harishchandra Ka Jiveen Parichay) Read More »

बालकृष्ण भट्ट का जीवन परिचय (Balkrishna Bhatt Ka Jivan Parichay)

बालकृष्ण भट्ट (जन्म: 3 जून 1844, इलाहाबाद – मृत्यु: 20 जुलाई 1914) आधुनिक हिन्दी साहित्य के प्रमुख निर्माता, गद्य कविता के प्रवर्तक, उत्कृष्ट नाटककार, तेजस्वी पत्रकार, सफल उपन्यासकार और सशक्त निबंधकार थे। आधुनिक हिन्दी साहित्य के विकास में उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इन्हें गद्य-प्रधान कविता का जनक भी कहा जाता है। हिन्दी

बालकृष्ण भट्ट का जीवन परिचय (Balkrishna Bhatt Ka Jivan Parichay) Read More »

प्रताप नारायण मिश्र का जीवन परिचय (Pratap Narayan Mishra Biography in Hindi)

प्रताप नारायण मिश्र (जन्म: 24 सितम्बर 1856, उन्नाव — मृत्यु: 6 जुलाई 1894) आधुनिक हिन्दी साहित्य के उन प्रमुख निर्माताओं में से एक थे जिन्होंने भारतेन्दु युग को मजबूत आधार दिया। वे कवि, गद्यकार, पत्रकार, नाटककार और उत्कृष्ट संपादक थे। हिन्दी खड़ी बोली के प्रसार और विकास में उनका योगदान अप्रतिम है। भारतेन्दु हरिश्चन्द्र के

प्रताप नारायण मिश्र का जीवन परिचय (Pratap Narayan Mishra Biography in Hindi) Read More »

बद्रीनारायण चौधरी ‘प्रेमघन’ का जीवन परिचय (Badri Narayan Chaudhary Ka Jeevan Parichay)

बद्रीनारायण चौधरी उपाध्याय ‘प्रेमघन’ (जन्म: 1 सितम्बर 1855 — मृत्यु: 12 मार्च 1922) आधुनिक हिन्दी साहित्य के प्रारंभिक जागरण काल के प्रमुख साहित्यकार, निबंधकार, कवि, नाटककार और आलोचक थे। वे भारतेन्दु मंडल के प्रमुख सदस्यों में गिने जाते हैं और हिन्दी एवं संस्कृत के प्रचार-प्रसार में उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा। हिन्दी में विचारात्मक निबंधों

बद्रीनारायण चौधरी ‘प्रेमघन’ का जीवन परिचय (Badri Narayan Chaudhary Ka Jeevan Parichay) Read More »

लाला श्रीनिवासदास : जीवन-परिचय (lala srinivas das Ka Jivan Parichay in hindi)

लाला श्रीनिवासदास (1850–1907) आधुनिक हिन्दी साहित्य के इतिहास में वह साहित्यकार हैं जिनके नाम पर हिन्दी के प्रथम मौलिक उपन्यास “परीक्षागुरु” का श्रेय सुरक्षित है। भारतेंदु युग के प्रमुख नाटककार, समाज-सुधारक और खड़ी बोली के समर्थ प्रयोगधर्मी लेखक के रूप में वे साहित्य-जगत में एक महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। उनकी रचनाएँ भारतीय समाज, नैतिक मूल्यों,

लाला श्रीनिवासदास : जीवन-परिचय (lala srinivas das Ka Jivan Parichay in hindi) Read More »

देवकीनन्दन खत्री का जीवन-परिचय (devaki nandan khatri biography)

परिचय देवकीनन्दन खत्री (18 जून 1861 – 1 अगस्त 1913) हिन्दी साहित्य के प्रथम तिलिस्मी और ऐय्यारी-प्रधान उपन्यासकार थे। उन्होंने अपने रोमांचकारी, रहस्यपूर्ण और कल्पनाशील उपन्यासों के माध्यम से हिन्दी उपन्यास विधा को एक नई दिशा प्रदान की। उनका सबसे प्रसिद्ध उपन्यास \”चन्द्रकान्ता\” इतना लोकप्रिय हुआ कि लाखों लोगों ने केवल इसे पढ़ने के लिए

देवकीनन्दन खत्री का जीवन-परिचय (devaki nandan khatri biography) Read More »