जीवन परिचय
प्रसिद्ध हिंदी कवि, पत्रकार और स्वतंत्रता सेनानी बालकृष्ण शर्मा नवीन का जन्म 8 दिसंबर 1897 ई० को भैयाना (जिला शाजापुर, मध्य प्रदेश) में एक साधारण ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनके पिता धार्मिक प्रवृत्ति के व्यक्ति थे और घर का वातावरण सादा, संस्कारयुक्त और देशभक्ति से भरा हुआ था। बचपन से ही नवीन जी को अच्छे संस्कार मिले, जिससे उनके अंदर सत्य, साहस और देशप्रेम की भावना विकसित हुई।
प्रारम्भिक जीवन और शिक्षा
बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’ का बचपन सामान्य परिस्थितियों में बीता, लेकिन वे शुरू से ही तेज बुद्धि और आत्मसम्मानी स्वभाव के थे। उन्होंने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा अपने क्षेत्र में ही प्राप्त की और आगे चलकर हिंदी, संस्कृत तथा अंग्रेज़ी का ज्ञान अर्जित किया। वे पढ़ाई के साथ-साथ समाज और देश की स्थिति को भी समझते थे। स्वाध्याय के माध्यम से उन्होंने अपने ज्ञान को और अधिक बढ़ाया। उनके भीतर सीखने की तीव्र इच्छा थी, जिसने उन्हें एक विद्वान और जागरूक व्यक्ति बनाया।
स्वतंत्रता आंदोलन और संघर्ष
नवीन जी केवल कवि ही नहीं, बल्कि एक सच्चे देशभक्त और स्वतंत्रता सेनानी भी थे। वे महात्मा गांधी के विचारों से प्रभावित होकर स्वतंत्रता आंदोलन में कूद पड़े। उन्होंने असहयोग आंदोलन और अन्य आंदोलनों में सक्रिय भाग लिया। उनकी निर्भीकता के कारण उन्हें कई बार जेल भी जाना पड़ा। उन्होंने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा देश की आज़ादी के लिए संघर्ष करते हुए बिताया। कठिनाइयों के बावजूद वे अपने लक्ष्य से कभी पीछे नहीं हटे।
साहित्यिक जीवन और रचनाएँ
बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’ हिंदी साहित्य के ओजस्वी और राष्ट्रीय भावना से भरपूर कवि थे। उनकी कविताओं में देशभक्ति, उत्साह, संघर्ष और त्याग की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। उन्होंने साहित्य को केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि देश और समाज को जागरूक करने का माध्यम बनाया। उनकी प्रमुख रचनाओं में कुमकुम, रश्मिरेखा, अपलक आदि शामिल हैं। उनकी कविताएँ लोगों के दिल में जोश और प्रेरणा पैदा करती हैं।
भाषा-शैली और व्यक्तित्व
नवीन जी की भाषा सरल, स्पष्ट और ओजपूर्ण है। वे कठिन विचारों को भी आसान शब्दों में व्यक्त करते थे, जिससे आम लोग भी उनकी रचनाओं को आसानी से समझ सकें। उनकी शैली में जोश, ऊर्जा और प्रेरणा भरी होती थी। उनका व्यक्तित्व साहसी, आत्मसम्मानी और देशभक्त था। वे एक प्रभावशाली वक्ता भी थे और अपने विचारों को पूरे आत्मविश्वास के साथ प्रस्तुत करते थे।
साहित्य में स्थान
हिंदी साहित्य में बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’ का स्थान एक प्रमुख राष्ट्रीय कवि के रूप में है। उन्होंने अपने साहित्य के माध्यम से देशभक्ति की भावना को मजबूत किया और लोगों को जागरूक किया। उनका योगदान साहित्य और स्वतंत्रता आंदोलन दोनों में महत्वपूर्ण रहा है।
निधन
उनका निधन 29 अप्रैल 1960 ई० को हुआ, लेकिन उनका साहित्य आज भी लोगों को प्रेरित करता है।
