प्रस्तावना
उपेन्द्रनाथ अश्क हिंदी-उर्दू साहित्य के प्रसिद्ध कथाकार, उपन्यासकार, नाटककार, कवि, आलोचक और संस्मरण लेखक थे। वे प्रेमचंदोत्तर हिंदी-उर्दू कथा साहित्य के उन सशक्त रचनाकारों में गिने जाते हैं, जिन्होंने यथार्थवाद, मनोवैज्ञानिक गहराई और सामाजिक चेतना को साहित्य का केंद्रीय विषय बनाया।
जन्म और परिवार
उपेन्द्रनाथ अश्क का जन्म 14 दिसंबर 1910 ई० को पंजाब के जालंधर नगर में हुआ था। उनका मूल नाम उपेन्द्रनाथ शर्मा था। बाद में साहित्य-जगत में वे उपेन्द्रनाथ अश्क नाम से प्रसिद्ध हुए। उनका परिवार साधारण मध्यमवर्गीय था। परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत सुदृढ़ नहीं थी, इसलिए बचपन से ही उन्हें संघर्षपूर्ण जीवन का अनुभव प्राप्त हुआ। घर के वातावरण और सामाजिक परिस्थितियों ने उनके व्यक्तित्व को गंभीर, संवेदनशील और कर्मठ बनाया। इन्हीं अनुभवों का प्रभाव उनकी रचनाओं में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
बचपन से ही उनमें पढ़ने-लिखने की रुचि थी। वे सामान्य जीवन के छोटे-छोटे अनुभवों को भी गहराई से समझते थे। यही गुण आगे चलकर उन्हें एक महान साहित्यकार बनाता है।
शिक्षा
उपेन्द्रनाथ अश्क की प्रारम्भिक शिक्षा जालंधर में हुई। वे प्रतिभाशाली छात्र थे और पढ़ाई में रुचि रखते थे। उन्होंने विद्यालयी शिक्षा के बाद उच्च शिक्षा भी प्राप्त की। विद्यार्थी जीवन से ही उनकी रुचि साहित्य, रंगमंच और लेखन में बढ़ने लगी थी। उन्होंने हिंदी, उर्दू, पंजाबी और अंग्रेज़ी भाषाओं का अच्छा ज्ञान प्राप्त किया। प्रारम्भ में वे उर्दू भाषा में लेखन करते थे, परंतु बाद में हिंदी साहित्य की ओर आकर्षित हुए। स्वाध्याय द्वारा उन्होंने साहित्य, समाज और मनोविज्ञान का गहन अध्ययन किया।
कार्य-जीवन
उपेन्द्रनाथ अश्क ने प्रारम्भ में अध्यापन कार्य किया। इसके बाद वे पत्रकारिता और स्वतंत्र लेखन से जुड़े। कुछ समय उन्होंने आकाशवाणी में भी कार्य किया। बाद में वे मुंबई गए और फिल्म जगत से जुड़े, जहाँ उन्होंने पटकथा, संवाद और कथा लेखन का कार्य किया।
फिल्म जगत का अनुभव भी उनके साहित्य को नई दृष्टि प्रदान करता है। बाद में वे प्रयागराज (इलाहाबाद) में बस गए और वहीं रहकर साहित्य-साधना करते रहे। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन लेखन, अध्ययन और साहित्य सेवा में समर्पित कर दिया।
साहित्यिक व्यक्तित्व
उपेन्द्रनाथ अश्क बहुमुखी प्रतिभा के धनी साहित्यकार थे। उन्होंने कहानी, उपन्यास, नाटक, एकांकी, कविता, संस्मरण, आत्मकथा तथा आलोचना जैसी अनेक विधाओं में लेखन किया। उनकी रचनाओं में समाज के निम्न तथा मध्यमवर्गीय लोगों का जीवन, संघर्ष, बेरोजगारी, आर्थिक कठिनाइयाँ, पारिवारिक तनाव, सामाजिक विषमता और मानवीय संवेदनाओं का अत्यंत सजीव चित्रण मिलता है। वे यथार्थवादी लेखक थे और समाज के सच्चे चित्रकार माने जाते हैं।
उनकी लेखनी में कृत्रिमता नहीं, बल्कि जीवन की सच्चाई मिलती है। उन्होंने साधारण मनुष्य के दुःख-दर्द को साहित्य का विषय बनाया।
प्रमुख रचनाएँ
उपेन्द्रनाथ अश्क ने हिंदी साहित्य को अनेक महत्त्वपूर्ण कृतियाँ दीं। उनकी प्रमुख रचनाएँ निम्नलिखित हैं—
उपन्यास – गिरती दीवारें, शहर में घूमता आईना, गर्म राख, बड़ी-बड़ी आँखें, पत्थर और पत्थर।
कहानी-संग्रह – पिंजरा, ठीकरा, डाची, परदा उठाओ परदा गिराओ, चट्टान।
नाटक एवं एकांकी – अंजो दीदी, कैद, उड़ान, जय-पराजय, अलग-अलग रास्ते।
अन्य रचनाएँ – संस्मरण, आत्मकथा, कविता और आलोचनात्मक लेख।
साहित्यिक विशेषताएँ
उपेन्द्रनाथ अश्क ने हिंदी साहित्य में मध्यमवर्गीय जीवन को केंद्र में रखा। उन्होंने परिवार की छोटी-छोटी समस्याओं, दाम्पत्य जीवन, बेरोजगारी, मानसिक तनाव और सामाजिक संघर्षों को अत्यंत स्वाभाविक ढंग से प्रस्तुत किया। उनकी रचनाओं में मनोवैज्ञानिक दृष्टि भी मिलती है। वे पात्रों के मन की गहराइयों तक पहुँचकर उनके भावों का चित्रण करते थे। इसी कारण उनके पात्र जीवंत प्रतीत होते हैं।
भाषा-शैली
उपेन्द्रनाथ अश्क की भाषा सरल, सहज, स्वाभाविक और प्रभावपूर्ण है। उन्होंने बोलचाल की भाषा का सुंदर प्रयोग किया है। उनकी भाषा में हिंदी, उर्दू और पंजाबी शब्दों का भी प्रयोग मिलता है, जिससे भाषा अधिक जीवंत बन जाती है।
उनकी शैली के प्रमुख रूप हैं—
- यथार्थवादी शैली
- वर्णनात्मक शैली
- संवादात्मक शैली
- मनोवैज्ञानिक शैली
- भावात्मक शैली
साहित्य में स्थान
उपेन्द्रनाथ अश्क आधुनिक हिंदी साहित्य के प्रमुख कथाकारों और नाटककारों में गिने जाते हैं। उन्होंने हिंदी कहानी, उपन्यास और एकांकी साहित्य को नई दिशा दी। मध्यमवर्गीय जीवन के सशक्त चित्रण के कारण उनका विशेष स्थान है।
वे प्रेमचंदोत्तर युग के प्रमुख यथार्थवादी लेखकों में गिने जाते हैं। हिंदी साहित्य में उनका स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण, सम्माननीय और स्थायी है।
पुरस्कार और सम्मान
उपेन्द्रनाथ अश्क को हिंदी साहित्य में विशेष योगदान के लिए अनेक साहित्यिक संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया गया। उनकी कृतियों को व्यापक लोकप्रियता मिली।
निधन
उपेन्द्रनाथ अश्क का निधन 19 जनवरी 1996 ई० को हुआ। उनके निधन से हिंदी साहित्य को अपूरणीय क्षति पहुँची।
