प्रारंभिक जीवन और परिवार
रवींद्रनाथ टैगोर का जन्म 7 मई 1861 को कोलकाता (तब कलकत्ता) के प्रतिष्ठित ब्राह्मण परिवार में हुआ। उनके पिता का नाम देवेंद्रनाथ टैगोर, जो एक दार्शनिक और ब्रह्म समाज से जुड़े थे, और माता का नाम शारदा देवी था। रवींद्रनाथ अपने 13 भाई-बहनों में सबसे छोटे थे।
बचपन:
WhatsApp Group
Join Now
Telegram Group
Join Now
Instagram Group
Join Now
- आठ साल की उम्र में उन्होंने अपनी पहली कविता लिखी।
- 16 साल की उम्र में उनकी पहली लघुकथा प्रकाशित हुई।
- पारंपरिक शिक्षा में अरुचि होने के बावजूद घर पर शिक्षकों से उन्होंने शिक्षा प्राप्त की।
शिक्षा इंग्लैंड:
- 1877 में इंग्लैंड अध्ययन के लिए गए।
- कानून की पढ़ाई की, लेकिन डिग्री पूरी किए बिना भारत लौट आए।
साहित्यिक और रचनात्मक योगदान
रवींद्रनाथ टैगोर एक बहुमुखी साहित्यकार, दार्शनिक और संगीतकार थे। उनके साहित्यिक योगदान ने बंगाली और भारतीय साहित्य को नया रूप दिया।
प्रमुख कृतियाँ:
- कविता संग्रह:
- गीतांजलि (Geetanjali) – नोबेल पुरस्कार विजेता
- भानुसिंह (Bhanusimha)
- उपन्यास और लघुकथा:
- गोरा (Gora)
- घरे-बाइरे (Ghare-Baire)
- काबुलीवाला (Kabuliwala)
- चोखेर बाली (Chokher Bali)
- नाटक और रंगमंच:
- राजा
- डाकघर
- गीत और संगीत:
- 2,000 से अधिक गीतों के लेखक
- इन गीतों को रवींद्र संगीत कहा जाता है
- चित्रकला:
- जीवन के अंतिम वर्षों में उन्होंने चित्रकला शुरू की, जिसमें भावनाओं और विचारों की गहराई झलकती है
पुरस्कार और सम्मान
- नोबेल पुरस्कार (1913) – \’गीतांजलि\’ के लिए, पहले गैर-यूरोपीय व्यक्ति
- नाइटहुड (1915) – ब्रिटिश सरकार से सम्मान, जलियांवाला बाग हत्याकांड के विरोध में 1919 में त्याग दिया
- भारत और बांग्लादेश के राष्ट्रगान के रचयिता:
- भारत: जन गण मन
- बांग्लादेश: आमार सोनार बांग्ला
- स्वामी विवेकानंद के बाद विश्व धर्म संसद में भाषण देने वाले प्रमुख भारतीय
- \’गुरुदेव\’ और \’कविगुरु\’ उपाधियाँ
शिक्षा और दर्शन
- विश्व-भारती विश्वविद्यालय की स्थापना: 1921 में, शांति निकेतन से बढ़कर
- शिक्षा का उद्देश्य: प्रकृति, मानवता और सार्वभौमिक मूल्य
- दार्शनिक दृष्टिकोण: मानवतावाद, सार्वभौमिकता, अहिंसा और शांति के समर्थक
व्यक्तिगत जीवन
- विवाह: 1883 में मृणालिनी देवी से
- भाई:
- द्विजेन्द्रनाथ टैगोर – दार्शनिक और कवि
- सत्येंद्रनाथ टैगोर – भारतीय सिविल सेवा में प्रथम भारतीय
- रवींद्रनाथ बचपन से ही रंगमंच, गायन, शास्त्रीय संगीत और साहित्य में दक्ष थे
अंतिम वर्ष और निधन
- रवींद्रनाथ टैगोर का निधन 7 अगस्त 1941 को कोलकाता में हुआ।
- उनका योगदान भारतीय संस्कृति, साहित्य और शिक्षा में अमूल्य माना जाता है।
