पिता का नाम | स्व.श्री गुलाब सिंह लोधी |
जन्म तिथि | 03. मई, 1959 |
जन्म स्थान | ग्राम-डूंडा, जिला-टीकमगढ़. |
वैवाहिक स्थिति | अविवाहित |
शैक्षनिक योग्यता | प्राथमिक शिक्षा |
अभिरुचि | अध्ययन, ड्रायविंग, पर्यटन, फोटोग्राफी. |

प्रारंभिक जीवन
उमा भारती का जन्म 3 मई 1959 को मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले के एक छोटे से गांव में हुआ। उनके पिता स्वामी सत्यानंद एक साधु थे और उनकी माँ का नाम सरस्वती देवी था। उमा का बचपन एक धार्मिक और पारिवारिक वातावरण में बीता, जहाँ उन्होंने संस्कृत और हिंदू संस्कृति की शिक्षा प्राप्त की। प्रारंभिक शिक्षा उन्होंने अपने गांव के स्कूल से प्राप्त की और बाद में ग्वालियर में शिक्षा जारी रखी।
राजनीतिक यात्रा की शुरुआत
उमा भारती की राजनीतिक यात्रा 1975 में आपातकाल के दौरान शुरू हुई। इस समय उन्होंने इंदिरा गांधी की नीतियों के खिलाफ आवाज उठाई और भारतीय जनसंघ से जुड़कर राजनीति में कदम रखा। उनका सक्रिय राजनीतिक जीवन तब शुरू हुआ जब वे छात्र नेता बनीं और उन्होंने कई जनसामान्य मुद्दों पर संघर्ष किया।
भाजपा में प्रवेश
1980 में भारतीय जनसंघ का पुनर्गठन हुआ और इसे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के रूप में जाना जाने लगा। उमा भारती ने भाजपा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और राम जन्मभूमि आंदोलन में एक प्रमुख नेता के रूप में उभरीं। उन्होंने अपनी तेज़-तर्रार वाणी और दृढ़ विचारों के साथ युवा मतदाताओं को आकर्षित किया।
राम मंदिर आंदोलन
उमा भारती ने राम जन्मभूमि आन्दोलन में भी अहम भूमिका निभाई थी। साल 2003 के विधानसभा चुनाव में मध्यप्रदेश में भाजपा को लाने का श्रेय उमा भारती को जाता है। हालांकि इस दौरान उनका कार्यकाल सिर्फ 1 साल ही रहा। साल 1994 में हुए हुबली के दंगो में उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया गया। जिसके कारण उन्हें सीएम पद से इस्तीफा देना पड़ा।
मुख्यमंत्री की भूमिका
उमा भारती ने 2003 में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभाला। वे राज्य की पहली महिला मुख्यमंत्री बनीं। उनके कार्यकाल के दौरान कई विकासात्मक योजनाएं शुरू की गईं, जैसे जल संरक्षण, स्वच्छता अभियान और ग्रामीण विकास। उन्होंने विशेष रूप से मध्य प्रदेश में नदियों के पुनर्जीवन और जल संचयन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए।
विवाद और आलोचना
उमा भारती की राजनीति कई विवादों से भी घिरी रही है। उन्हें उनके कड़े बयानों और विवादास्पद मुद्दों के लिए आलोचना का सामना करना पड़ा। 2004 में, उन्हें कुछ समय के लिए जेल भी भेजा गया था, जब उन्होंने एक धार्मिक सभा में भड़काऊ भाषण दिया था। हालांकि, उन्होंने इन विवादों को अपने राजनीतिक करियर पर हावी नहीं होने दिया।
पुनर्वापसी और केंद्रीय राजनीति
2005 में उमा भारती ने भाजपा से अलग होकर ‘भारतीय जनशक्ति पार्टी ” बनाई, लेकिन यह पार्टी सफल नहीं हो सकी। 2011 में उन्होंने फिर से भाजपा में वापसी की। 2014 में, नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनने पर उन्हें जल संसाधन मंत्री बनाया गया। इस पद पर रहते हुए उन्होंने जल संरक्षण और नदियों के पुनर्जीवन के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं शुरू कीं।
सामाजिक योगदान
उमा भारती ने हमेशा सामाजिक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया है। वे स्वच्छता और जल संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए कई कार्यक्रमों का संचालन कर चुकी हैं। उनके नेतृत्व में मध्य प्रदेश में जल संचयन और नदियों के संरक्षण के लिए कई योजनाएं लागू की गईं। उन्होंने आदिवासी क्षेत्रों में भी विकास कार्यों को बढ़ावा दिया।
व्यक्तिगत जीवन
उमा भारती का व्यक्तिगत जीवन भी बहुत दिलचस्प है। वे साधु-संतों के साथ समय बिताने में विश्वास करती हैं। उन्होंने विवाह नहीं किया और अपने जीवन को एक साध्वी के रूप में जीने का निर्णय लिया। उनका मानना है कि राजनीति और धर्म का गहरा संबंध है, और यही कारण है कि वे सामाजिक और धार्मिक मुद्दों पर खुलकर बोलती हैं।