डॉ. सुनील जोगी का जीवन परिचय (Dr.Sunil jogi ka jivan parichay)

जन्म और प्रारंभिक जीवन

डॉ. सुनील जोगी का जन्म 1 जनवरी 1971 को कानपुर, उत्तर प्रदेश में हुआ। वे हिंदी साहित्य और हास्य कविता के क्षेत्र में अग्रणी नाम हैं। बचपन से ही उन्हें कविता और हास्य में रुचि थी। उनका परिवार साहित्य और शिक्षा के प्रति संवेदनशील था, जिससे उनके मन में साहित्य और हास्य की गहरी समझ विकसित हुई।

शिक्षा

  • एम.ए. हिंदी साहित्य
  • पीएचडी (डॉक्टरेट) हिंदी साहित्य में
    इन उच्च शिक्षा उपाधियों ने उन्हें साहित्य, कविता और हास्य रचना में विशेषज्ञता दिलाई।

पेशा और करियर

डॉ. सुनील जोगी एक बहुमुखी कलाकार हैं। वे हास्य कवि, लेखक, गीतकार और मंचीय कलाकार हैं। उनका नाम \”Jogi Ji Waah\” के रूप में भी प्रसिद्ध है।

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प्रमुख कार्य और योगदान

  1. कविता और हास्य कला:
    • 100 से अधिक पुस्तकें लिखी।
    • हास्य कविताओं और गीतों के माध्यम से लोगों का मनोरंजन किया।
    • राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय कवि सम्मेलनों में मंचीय प्रस्तुतियाँ दीं।
  2. फिल्म और मीडिया:
    • कई फिल्मों के लिए गीत लिखे।
    • टेलीविजन और ऑनलाइन मंचों पर अपनी हास्य प्रस्तुतियों से लोकप्रियता हासिल की।
  3. सामाजिक योगदान:
    • ग्रामीण शिक्षा को बढ़ावा देने वाले एमएए फाउंडेशन के अध्यक्ष।
    • गैर-लाभकारी संगठनों के माध्यम से सतत शिक्षा और सामाजिक जागरूकता में योगदान।
  4. सरकारी पद और भूमिका:
    • हिंदुस्तानी अकादमी, उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व अध्यक्ष (राज्य मंत्री का दर्जा)।
    • भारत सरकार में रेल और संसदीय कार्य मंत्रालय के हिंदी सलाहकार।

पुरस्कार और सम्मान

डॉ. सुनील जोगी को उनके साहित्यिक और सामाजिक योगदान के लिए कई राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय सम्मान प्राप्त हुए:

  • पद्म श्री (2015) – भारत सरकार द्वारा चौथा सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार।
  • यश भारती सम्मान – उत्तर प्रदेश का सर्वोच्च राज्य पुरस्कार।
  • कई अन्य साहित्यिक और हास्य सम्मेलनों में पुरस्कार

प्रमुख विशेषताएँ

  • हास्य कविता के क्षेत्र में विशिष्ट शैली और चार-लाइन हास्य कविताओं के लिए प्रसिद्ध।
  • मंचीय प्रस्तुति और कवि सम्मेलनों में व्यक्तिगत करिश्मा और मनोरंजन कौशल
  • शिक्षा, साहित्य और समाज के प्रति गहरी प्रतिबद्धता।

सामाजिक और शैक्षणिक योगदान

डॉ. सुनील जोगी ग्रामीण क्षेत्रों में सतत शिक्षा को बढ़ावा देने वाले कार्यक्रम संचालित करते हैं। एमएए फाउंडेशन के माध्यम से उन्होंने शिक्षा और संस्कृति के क्षेत्र में कई कार्यक्रम आयोजित किए हैं। उनका यह योगदान समाज में युवाओं और बच्चों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

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