प्रस्तावना
सरिता शर्मा हिंदी साहित्य की एक सशक्त और संवेदनशील लेखिका हैं। उनकी रचनाओं में मानवीय भावनाएँ, सामाजिक यथार्थ, स्त्री-अनुभव और जीवन की सूक्ष्म सच्चाइयाँ प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त होती हैं। उन्होंने किशोरावस्था से ही साहित्य सृजन आरंभ कर दिया था और आज वे राष्ट्रीय स्तर पर एक स्थापित साहित्यकार के रूप में जानी जाती हैं।
जन्म एवं प्रारंभिक जीवन
सरिता शर्मा का जन्म 20 जुलाई 1964 को भिलाई नगर (दुर्ग), छत्तीसगढ़ में हुआ। उनका पारिवारिक वातावरण शिक्षित और संस्कारयुक्त था, जिससे उन्हें प्रारंभ से ही अध्ययन और रचनात्मक अभिव्यक्ति की प्रेरणा मिली। बचपन और किशोरावस्था में उन्होंने समाज, परिवार और आसपास के जीवन को गहराई से देखा, जिसका प्रभाव आगे चलकर उनकी साहित्यिक रचनाओं में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
शिक्षा एवं साहित्यिक रुचि
सरिता शर्मा को किशोरावस्था से ही साहित्य सृजन में गहरी रुचि थी। विद्यालयीन जीवन से ही वे कविता, कहानी और लेखन की ओर आकर्षित हो गई थीं। अध्ययन के साथ-साथ उन्होंने निरंतर लेखन अभ्यास किया और अपनी भाषा, संवेदना तथा अभिव्यक्ति को सशक्त बनाया।
साहित्यिक यात्रा
सरिता शर्मा की साहित्यिक यात्रा निरंतर साधना और प्रतिबद्धता की यात्रा रही है। उन्होंने कविता, कहानी और गद्य विधाओं में लेखन किया। उनकी रचनाओं में—
- सामाजिक यथार्थ
- स्त्री जीवन के अनुभव
- संवेदनशील मानवीय रिश्ते
- आत्मचिंतन और जीवन दर्शन
जैसे विषय प्रमुख रूप से देखने को मिलते हैं।
प्रकाशन एवं प्रसारण
सरिता शर्मा की रचनाएँ राष्ट्रीय स्तर की प्रमुख साहित्यिक पत्र-पत्रिकाओं में समय-समय पर प्रकाशित होती रही हैं। इसके अतिरिक्त उनकी साहित्यिक कृतियाँ—
- आकाशवाणी (रेडियो)
- दूरदर्शन के विभिन्न केंद्रों
से भी प्रसारित की गई हैं, जिससे उनकी रचनात्मक पहचान व्यापक पाठक और श्रोता वर्ग तक पहुँची।
रचनात्मक विशेषताएँ
सरिता शर्मा की लेखनी की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं—
- सहज, प्रवाहपूर्ण और संवेदनशील भाषा
- जीवन के यथार्थ का सजीव चित्रण
- स्त्री चेतना और सामाजिक सरोकार
- भावनात्मक गहराई के साथ संतुलित दृष्टिकोण
उनकी रचनाएँ पाठकों को केवल भावुक ही नहीं करतीं, बल्कि सोचने और आत्ममंथन के लिए भी प्रेरित करती हैं।
साहित्य में योगदान
सरिता शर्मा का हिंदी साहित्य में योगदान महत्वपूर्ण है। उन्होंने समकालीन साहित्य को संवेदनशील दृष्टि और मानवीय मूल्यों से समृद्ध किया है। उनकी रचनाएँ आज के सामाजिक संदर्भों को समझने में सहायक हैं और नई पीढ़ी के लेखकों के लिए प्रेरणास्रोत भी हैं।
वर्तमान स्थिति
सरिता शर्मा निरंतर साहित्य सृजन से जुड़ी हुई हैं और उनका लेखन आज भी प्रासंगिक, प्रभावशाली और पाठक-प्रिय बना हुआ है।
