भूमिका
रघुवीर सहाय (1929–1990) हिंदी साहित्य के प्रमुख कवि, पत्रकार, निबंधकार और विचारक थे। वे नई कविता आंदोलन के प्रतिनिधि कवि माने जाते हैं और हिंदी कविता में राजनीतिक चेतना, सामाजिक यथार्थ, व्यंग्य और मानवीय संवेदना को नई धार देने वाले रचनाकारों में अग्रणी हैं। उनकी कविता आज़ादी के बाद के भारत—विशेषकर 1960 के बाद—की लोकतांत्रिक विडंबनाओं, असमानताओं और सत्ता-संरचनाओं का सशक्त दस्तावेज़ है।
जन्म एवं पारिवारिक पृष्ठभूमि
रघुवीर सहाय का जन्म 9 दिसंबर 1929 को लखनऊ (उत्तर प्रदेश) में हुआ।
- पिता: श्री हरदेव सहाय — साहित्य के अध्यापक
साहित्यिक वातावरण में पले-बढ़े रघुवीर सहाय पर बचपन से ही पठन-पाठन, भाषा और सामाजिक चेतना का प्रभाव पड़ा।
शिक्षा
रघुवीर सहाय ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा लखनऊ में प्राप्त की।
- 1944 – मैट्रिक
- 1946 – इंटरमीडिएट
- 1948 – स्नातक (अंग्रेज़ी साहित्य, राजनीति विज्ञान, अर्थशास्त्र)
- 1951 – एम.ए. (अंग्रेज़ी साहित्य), लखनऊ विश्वविद्यालय
अंग्रेज़ी में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बावजूद उन्होंने अपना संपूर्ण रचना-संसार हिंदी में रचा, जिससे हिंदी भाषा को आधुनिक वैचारिक शक्ति मिली।
साहित्यिक आरंभ
रघुवीर सहाय ने 1946 में मात्र 17 वर्ष की आयु में कविता ‘अंत का प्रारंभ’ लिखकर साहित्य-सृजन की शुरुआत की।
1951 में अज्ञेय द्वारा संपादित ‘दूसरा सप्तक’ में उनकी कविताएँ प्रकाशित हुईं, जिससे वे हिंदी साहित्य में व्यापक रूप से चर्चित हुए।
‘दूसरा सप्तक’ और साहित्यिक पहचान
रघुवीर सहाय ‘दूसरा सप्तक’ के प्रमुख कवियों में से एक थे।
इस सप्तक में शामिल अन्य कवि—
भवानी प्रसाद मिश्र, शमशेर बहादुर सिंह, नरेश मेहता, धर्मवीर भारती आदि।
‘दूसरा सप्तक’ ने हिंदी कविता को—
- आत्मपरकता
- सामाजिक यथार्थ
- आधुनिक बौद्धिक दृष्टि
प्रदान की, जिसमें रघुवीर सहाय की भूमिका केंद्रीय रही।
पत्रकारिता और कार्यक्षेत्र
रघुवीर सहाय का साहित्य और पत्रकारिता परस्पर गहराई से जुड़े हुए हैं।
पत्रकारिता का क्रम
- 1949 – दैनिक नवजीवन (लखनऊ) से शुरुआत
- 1951 – प्रतीक पत्रिका (सहायक संपादक)
- 1953–1957 – आकाशवाणी, समाचार विभाग (उप-संपादक)
- कल्पना, नवभारत टाइम्स से संबद्ध
- 1969–1982 – दिनमान साप्ताहिक के प्रधान संपादक
दिनमान को हिंदी पत्रकारिता का वैचारिक मंच बनाने में उनका योगदान ऐतिहासिक माना जाता है।
साहित्यिक योगदान
रघुवीर सहाय ने कविता, कहानी, निबंध, आलोचना और अनुवाद—सभी विधाओं में सृजन किया।
प्रमुख काव्य संग्रह
- सीढ़ियों पर धूप में (1960)
- आत्महत्या के विरुद्ध (1967)
- हँसो हँसो जल्दी हँसो (1975)
- लोग भूल गए हैं (1982)
- कुछ पत्ते कुछ चिट्ठियाँ (1989)
कहानी संग्रह
- रास्ता इधर से है
- कैमरे में बंद अपाहिज
- जो आदमी हम बना रहे हैं
निबंध संग्रह
- दिल्ली मेरा परदेश
- लिखने का कारण
- ऊबे हुए सुखी
अनुवाद
- शेक्सपियर का मैकबेथ
- तीन हंगरी नाटक
- यूरोपीय साहित्य के प्रमुख उपन्यासों का हिंदी रूपांतरण
काव्यगत विशेषताएँ
(1) राजनीतिक चेतना
रघुवीर सहाय की कविता में राजनीति की क्रूरता, लोकतंत्र की विफलता और सत्ता का दमन खुलकर व्यक्त हुआ है।
डॉ. बच्चन सिंह ने उन्हें “Political Poet” कहा।
(2) सामाजिक यथार्थ
उनकी कविताएँ अख़बार, दफ़्तर, बाज़ार, सड़क और आम आदमी के जीवन से सीधे जुड़ी हैं। वे मध्यवर्गीय जीवन की विडंबनाओं और जन-पीड़ा को स्वर देते हैं।
(3) मानवीय संवेदना
स्त्री, गरीब, अपाहिज, शोषित—इनके जीवन-दुख उनकी कविता का केंद्र हैं।
‘बैंक में लड़कियाँ’, ‘चेहरा’, ‘कैमरे में बंद अपाहिज’ जैसी कविताएँ इसका उदाहरण हैं।
(4) व्यंग्य और आक्रोश
उनका व्यंग्य तीखा, चुभने वाला और लोकतंत्र की असलियत उजागर करने वाला है।
‘रामदास’ कविता लोकतांत्रिक सत्ता की क्रूरता का प्रतीक है।
भाषा और शैली
- भाषा: सहज, बोलचाल की खड़ीबोली
- संस्कृतनिष्ठ और उर्दू शब्दों का संतुलित प्रयोग
- शैली: व्यंग्यात्मक, वर्णनात्मक, संवादात्मक
- प्रारंभ में छंद, बाद में मुक्त छंद का प्रयोग
उनकी भाषा में कृत्रिम विद्वत्ता नहीं, बल्कि अख़बारी जीवन की जीवंत सादगी है।
पुरस्कार एवं सम्मान
- साहित्य अकादमी पुरस्कार (1984) — ‘लोग भूल गए हैं’ के लिए
निधन
रघुवीर सहाय का निधन 30 दिसंबर 1990 को हुआ। उनके निधन से हिंदी साहित्य ने एक ऐसा कवि खो दिया जिसने लोकतंत्र, जनता और भाषा—तीनों के पक्ष में आजीवन संघर्ष किया।
