प्रस्तावना
पंडित नरेंद्र शर्मा (1913–1989) हिंदी साहित्य के ऐसे बहुआयामी रचनाकार थे जिन्होंने कविता, गीत, प्रबंध काव्य, पत्रकारिता, फ़िल्मी गीत-लेखन और रेडियो—सभी क्षेत्रों में समान अधिकार से योगदान दिया। वे एक ओर जहाँ संवेदनशील गीतकार थे, वहीं दूसरी ओर राष्ट्रचेतना से ओत-प्रोत कवि और सांस्कृतिक चिंतक भी थे। हिंदी फ़िल्मों में उनके लिखे गीत आज भी शास्त्रीय गरिमा और भावनात्मक गहराई के लिए स्मरण किए जाते हैं।
जन्म एवं प्रारंभिक जीवन
पंडित नरेंद्र शर्मा का जन्म 28 फरवरी 1913 को जहांगीरपुर, खुर्जा (जिला बुलंदशहर), उत्तर प्रदेश में हुआ।
वे बचपन से ही अध्ययनशील, भावुक और सृजनशील प्रवृत्ति के थे। प्रारंभिक जीवन में ही उनमें साहित्य के प्रति गहरी रुचि विकसित हो गई थी।
शिक्षा
नरेंद्र शर्मा ने उच्च शिक्षा के लिए इलाहाबाद विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया और वहाँ से—
- शिक्षाशास्त्र (Education) में एम.ए.
- अंग्रेज़ी साहित्य में एम.ए.
की उपाधि प्राप्त की।
इलाहाबाद उस समय हिंदी साहित्य का प्रमुख केंद्र था। यहाँ उन्हें महान साहित्यकारों और स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े विचारकों का सान्निध्य मिला, जिसने उनके साहित्यिक दृष्टिकोण को व्यापक बनाया।
साहित्यिक जीवन की शुरुआत
पंडित नरेंद्र शर्मा की पहली कविता 1931 ई. में ‘चाँद’ पत्रिका में प्रकाशित हुई।
केवल 21 वर्ष की आयु में उन्होंने पंडित मदन मोहन मालवीय द्वारा स्थापित साप्ताहिक पत्रिका ‘अभ्युदय’ (1934) का संपादन संभाला—यह उनके साहित्यिक जीवन की एक बड़ी उपलब्धि थी।
बाद में वे सुमित्रानंदन पंत के साथ ‘रूपाभ’ पत्रिका के संपादन से भी जुड़े, जो प्रगतिशील विचारधारा की महत्त्वपूर्ण पत्रिका थी।
स्वतंत्रता आंदोलन और जेल जीवन
नरेंद्र शर्मा केवल साहित्यकार ही नहीं, बल्कि स्वतंत्रता आंदोलन के सक्रिय सहभागी भी थे।
- वे अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी में हिंदी अधिकारी रहे।
- 1940 में ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध गतिविधियों के कारण गिरफ़्तार किए गए।
- वाराणसी, आगरा और देवली की जेलों में शचींद्रनाथ सान्याल, जयप्रकाश नारायण, सम्पूर्णानंद जैसे नेताओं के साथ नजरबंद रहे।
- जेल में रहते हुए उन्होंने 19 दिन का अनशन भी किया।
यह अनुभव उनके साहित्य में राष्ट्रप्रेम, संघर्ष और मानवीय करुणा के रूप में स्पष्ट दिखाई देता है।
आकाशवाणी और रेडियो सेवा
1953 के बाद पंडित नरेंद्र शर्मा आकाशवाणी (विविध भारती) से जुड़े और इसके संस्थापक सहयोगियों में गिने गए।
रेडियो के माध्यम से उन्होंने हिंदी भाषा और गीत को जन-जन तक पहुँचाया। उनके गीतों में शुद्ध हिंदी, संस्कृतनिष्ठ शब्दावली और भावनात्मक सौंदर्य का सुंदर समन्वय मिलता है।
फ़िल्मी गीत-लेखन का योगदान
पंडित नरेंद्र शर्मा ने हिंदी सिनेमा को साहित्यिक गरिमा प्रदान की।
- लगभग 55 फ़िल्मों के लिए
- 650 से अधिक गीत लिखे
प्रमुख फ़िल्मी गीत
- ‘सत्यम शिवम सुंदरम’ (शीर्षक गीत – अत्यंत प्रसिद्ध)
- ‘ज्योति कलश छलके’
- हमारी बात
- ज्वार भाटा
- आंधियां
- रत्नघर
- भाभी की चूड़ियां
‘सत्यम शिवम सुंदरम’ के शीर्षक गीत के लिए उन्हें फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार नामांकन भी मिला।
प्रसिद्ध गायिका लता मंगेशकर उन्हें स्नेहपूर्वक ‘पापा’ कहा करती थीं और उन्हें अपना गुरु मानती थीं।
महाभारत धारावाहिक से जुड़ाव
पंडित नरेंद्र शर्मा का साहित्यिक जीवन का अंतिम और अत्यंत महत्त्वपूर्ण अध्याय था—
👉 बी. आर. चोपड़ा का ‘महाभारत’ धारावाहिक
वे इस धारावाहिक के—
- सलाहकार
- पटकथा लेखक
- गीतकार
थे।
उनकी अंतिम रचना भी ‘महाभारत’ से संबंधित एक दोहा था, जो उनके सांस्कृतिक संस्कारों को दर्शाता है।
प्रमुख साहित्यिक कृतियाँ
कविता संग्रह
- प्रवासी के गीत
- मिट्टी और फूल
- अग्निशस्य
- प्यासा निर्झर
- मुठ्ठी बंद रहस्य
- हंसमाला
- रक्तचंदन
- पलाशवन
प्रबंध काव्य
- मनोकामिनी
- द्रौपदी
- उत्तरजय
- सुवर्णा
अन्य रचनाएँ
- मोहनदास करमचंद गांधी: एक प्रेरक जीवनी
- ज्वाला-परचूनी (कहानी संग्रह)
- सांस्कृतिक संक्रांति और संभावना (भाषण)
उनकी संपूर्ण रचनाएँ ‘पंडित नरेंद्र शर्मा की संपूर्ण रचनावली’ (16 खंड) में संकलित हैं।
साहित्यिक विशेषताएँ
- भाषा: संस्कृतनिष्ठ, प्रवाहपूर्ण और भावात्मक
- विषय: राष्ट्रप्रेम, मानवता, प्रकृति, दर्शन, प्रेम और संस्कृति
- शैली: गीतात्मकता, सौंदर्यबोध और शास्त्रीय गरिमा
- विशेषता: साहित्य और सिनेमा के बीच सेतु निर्माण
निधन
पंडित नरेंद्र शर्मा का निधन 11/12 फरवरी 1989 को हुआ।
उनके निधन से हिंदी साहित्य और फ़िल्मी गीत-परंपरा को अपूरणीय क्षति पहुँची।
