नरेश मेहता का जीवन परिचय | Naresh Mehta Biography in Hindi

भूमिका

नरेश मेहता आधुनिक हिंदी साहित्य के प्रमुख कवि, चिंतक और लेखक थे। वे प्रयोगशील काव्यधारा के सशक्त हस्ताक्षर माने जाते हैं और ‘दूसरा सप्तक’ के प्रमुख कवि के रूप में विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं। उनके काव्य में भारतीय संस्कृति, दर्शन, परंपरा, इतिहास-बोध और आत्मानुभूति का गहन समन्वय दिखाई देता है। भाषा की संस्कृतनिष्ठता, भावों की गंभीरता और शिल्प की नवीनता उनकी रचनाओं की प्रमुख पहचान है।

नरेश मेहता का जन्म एवं पारिवारिक पृष्ठभूमि

नरेश मेहता का जन्म 15 फरवरी 1922 को मध्य प्रदेश के मालवा अंचल के शाजापुर नगर में हुआ। मालवा क्षेत्र की सांस्कृतिक परंपरा, ऐतिहासिक चेतना और ग्रामीण जीवन का प्रभाव उनके साहित्य में स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है।

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उनका संपूर्ण जीवन भारतीय जीवन-दृष्टि, सांस्कृतिक मूल्यों और आत्मचिंतन के इर्द-गिर्द विकसित हुआ।

शिक्षा

नरेश मेहता ने अपनी उच्च शिक्षा बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) से प्राप्त की।

  • शिक्षा – एम.ए. (हिंदी)

काशी का बौद्धिक, धार्मिक और सांस्कृतिक वातावरण उनके व्यक्तित्व और साहित्यिक दृष्टि के निर्माण में अत्यंत सहायक सिद्ध हुआ।

स्वतंत्रता आंदोलन एवं वैचारिक रुझान

नरेश मेहता 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय रूप से सम्मिलित रहे। इस समय देश की राजनीतिक चेतना, स्वतंत्रता संघर्ष और सामाजिक परिवर्तन की लहर ने उनके विचारों को गहराई प्रदान की।

वे कुछ समय तक वामपंथी राजनीति से भी जुड़े रहे, किंतु बाद में उनका रुझान किसी एक विचारधारा की सीमाओं में बँधने के बजाय भारतीय सांस्कृतिक चेतना और मानवीय मूल्यों की ओर अधिक हुआ।

कार्यक्षेत्र

नरेश मेहता ने साहित्य के साथ-साथ प्रशासनिक और संपादकीय क्षेत्र में भी कार्य किया—

  • आकाशवाणी (All India Radio), इलाहाबाद में कार्यक्रम अधिकारी
  • विभिन्न साहित्यिक पत्रिकाओं का संपादन
  • साहित्यिक संगोष्ठियों, व्याख्यानों और विमर्शों में सक्रिय भागीदारी

उनका सम्पूर्ण जीवन साहित्य-साधना को समर्पित रहा।

‘दूसरा सप्तक’ और साहित्यिक पहचान

नरेश मेहता को हिंदी साहित्य में ‘दूसरा सप्तक’ (1951) के प्रमुख कवि के रूप में जाना जाता है।
दूसरा सप्तक ने हिंदी कविता को—

  • नई संवेदना
  • नवीन शिल्प
  • आत्मपरक अनुभूति
  • बौद्धिक गंभीरता

प्रदान की। नरेश मेहता की कविता इस आंदोलन में भारतीय परंपरा और आधुनिक चेतना के संतुलन का उत्कृष्ट उदाहरण है।

काव्य-दृष्टि और विषय-वस्तु

नरेश मेहता का काव्य केवल भावनात्मक नहीं, बल्कि दार्शनिक और सांस्कृतिक भी है। उनकी कविताओं में—

  • भारतीय इतिहास और मिथक
  • मानव अस्तित्व की जिज्ञासा
  • संस्कृति बनाम आधुनिकता
  • व्यक्ति और समाज का द्वंद्व
  • प्रकृति और आत्मा का संवाद

प्रमुख रूप से दिखाई देता है।

भाषा और शैली

नरेश मेहता की भाषा और शैली उनकी साहित्यिक विशिष्टता का मूल आधार है—

  • भाषा – संस्कृतनिष्ठ खड़ीबोली
  • शैली – गंभीर, भावपूर्ण, प्रवाहमयी और प्रतीकात्मक
  • बिंब-विधान – सरल एवं सशक्त
  • अलंकार – रूपक, उपमा, उत्प्रेक्षा, मानवीकरण, अनुप्रास
  • छंद – परंपरागत एवं नवीन छंदों का संतुलित प्रयोग

उनकी भाषा विषयानुकूल ढलती है और उसमें शिल्प की ताजगी और अभिव्यक्ति का नयापन सदैव बना रहता है।

प्रमुख कृतियाँ

काव्य एवं काव्यात्मक रचनाएँ

  • अरण्या
  • उत्तर कथा
  • चैत्या
  • दो एकान्त
  • धूमकेतुः एक श्रुति
  • पुरुष
  • प्रति श्रुति
  • कितना अकेला आकाश
  • हम अनिकेतन

प्रबंध काव्य / विशिष्ट कृतियाँ

  • प्रवाद पर्व
  • बोलने दो चीड़ को
  • यह पथ बन्धु था

अन्य रचनाएँ

  • एक समर्पित महिला

इन रचनाओं में भारतीय संस्कृति की आत्मा, दार्शनिक चिंतन और आधुनिक मनुष्य की पीड़ा का सुंदर समन्वय दिखाई देता है।

पुरस्कार एवं सम्मान

नरेश मेहता को उनके विशिष्ट साहित्यिक योगदान के लिए अनेक प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त हुए—

  • साहित्य अकादमी पुरस्कार – 1988
  • ज्ञानपीठ पुरस्कार – 1992

ये सम्मान उनके साहित्यिक कद और राष्ट्रीय महत्व को प्रमाणित करते हैं।

निधन

नरेश मेहता का निधन 22 नवंबर 2000 को भोपाल में हुआ। उनके निधन से हिंदी साहित्य ने एक गंभीर, चिंतनशील और सांस्कृतिक चेतना से सम्पन्न कवि को खो दिया।

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