मनोज मुंतशिर हिंदी साहित्य और भारतीय सिनेमा का एक ऐसा नाम हैं जिन्होंने संघर्ष, साधना और शब्दों की शक्ति से अपनी पहचान बनाई। वे एक प्रसिद्ध गीतकार, कवि, लेखक और पटकथा संवाद लेखक हैं। उनकी रचनाएँ देशभक्ति, प्रेम, विरह, आत्मसम्मान और भारतीय संस्कृति की गहराई को दर्शाती हैं। “तेरी मिट्टी”, “गलियां” और “कौन तुझे” जैसे गीतों ने उन्हें घर-घर में लोकप्रिय बना दिया।
जन्म और पारिवारिक परिचय
- जन्म तिथि: 27 फ़रवरी 1976
- जन्म स्थान: गौरीगंज, ज़िला अमेठी, उत्तर प्रदेश
- असली नाम: मनोज शुक्ला
- प्रसिद्ध नाम: मनोज मुंतशिर
उन्होंने अपने साहित्यिक नाम के रूप में “मुंतशिर” चुना, जिसका अर्थ होता है—इंतज़ार करने वाला, धैर्यवान—जो उनके जीवन संघर्ष का प्रतीक बन गया।
बचपन और प्रारंभिक जीवन
मनोज मुंतशिर का बचपन एक साधारण ग्रामीण परिवेश में बीता। आर्थिक संसाधन सीमित थे, लेकिन सपने असीम। बचपन से ही उन्हें कविता, गीत और साहित्य से विशेष लगाव था। वे स्कूल के दिनों में कविताएँ लिखा करते थे और मंचों पर पाठ भी करते थे।
शिक्षा
- स्कूली शिक्षा:
- HAL स्कूल, गौरीगंज (अमेठी)
- उच्च शिक्षा:
- स्नातक — इलाहाबाद विश्वविद्यालय (वर्तमान प्रयागराज विश्वविद्यालय)
इलाहाबाद विश्वविद्यालय ने उनके भीतर साहित्यिक सोच और वैचारिक परिपक्वता को और मजबूत किया।
मुंबई आगमन और संघर्ष
साल 1999 में मनोज मुंतशिर मात्र 700 रुपये लेकर अपने सपनों के शहर मुंबई पहुँचे।
यह दौर उनके जीवन का सबसे कठिन चरण था—
- छोटे कमरों में रहना
- आर्थिक तंगी
- लगातार अस्वीकृतियाँ
लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। वे मानते हैं कि—
“संघर्ष आदमी को तोड़ता नहीं, गढ़ता है।”
करियर की शुरुआत: टेलीविजन से पहचान
कई असफल प्रयासों के बाद उन्हें ‘कौन बनेगा करोड़पति’ के लिए लिखने का अवसर मिला। यही उनके करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ।
इसके बाद उन्होंने कई बड़े टीवी शोज़ के लिए लेखन किया—
- कौन बनेगा करोड़पति
- इंडियाज़ गॉट टैलेंट
- इंडियन आइडल जूनियर
इन कार्यक्रमों से उन्हें लेखन की पहचान और आत्मविश्वास दोनों मिला।
फ़िल्मी करियर: गीत लेखन और संवाद
धीरे-धीरे मनोज मुंतशिर बॉलीवुड में एक संवेदनशील गीतकार और प्रभावशाली लेखक के रूप में उभरे।
लोकप्रिय गीत
- गलियां – एक विलेन
- तेरी मिट्टी – केसरी
- कौन तुझे यूँ प्यार करेगा – M.S. धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी
- कैसे हुआ – कबीर सिंह
- दिल मेरी ना सुने – जीनियस
इन गीतों की खासियत है—सरल शब्दों में गहरी भावना।
संवाद लेखन: बाहुबली की गूंज
मनोज मुंतशिर ने ‘बाहुबली: द कन्क्लूजन’ के हिंदी डबिंग संवाद लिखे।
उनके संवादों ने फिल्म को उत्तर भारत में ऐतिहासिक लोकप्रियता दिलाई।
जैसे संवाद—
“जो प्राण देता है, वो भगवान होता है…”
साहित्य और कविता
फिल्मों के साथ-साथ मनोज मुंतशिर मंचीय कविता, राष्ट्रवाद और सामाजिक विषयों पर भी खुलकर लिखते और बोलते हैं। वे आज के समय के सबसे लोकप्रिय कवि-वक्ताओं में से एक हैं।
पुरस्कार और सम्मान
- राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार
- फ़िल्म ‘साइना’ के लिए सर्वश्रेष्ठ गीतकार
- कई फ़िल्मफेयर नामांकन
- साहित्य और कविता मंचों पर अनेक सम्मान
विचार और व्यक्तित्व
मनोज मुंतशिर अपने विचारों में स्पष्ट, निर्भीक और राष्ट्रवादी दृष्टिकोण रखते हैं। वे मानते हैं कि—
“कविता मनोरंजन नहीं, ज़िम्मेदारी है।”
