मन्नू भंडारी का जीवन परिचय (Mannu Bhandari Biography in Hindi)

प्रस्तावना

मन्नू भंडारी आधुनिक हिंदी साहित्य की उन विशिष्ट लेखिकाओं में से हैं, जिन्होंने स्त्री-मन, पारिवारिक संघर्ष, सामाजिक यथार्थ और नैतिक द्वंद्व को अत्यंत संवेदनशीलता और सच्चाई के साथ प्रस्तुत किया। वे नई कहानी आंदोलन की प्रमुख स्त्री कथाकार थीं।
उनकी रचनाएँ जैसे ‘आपका बंटी’, ‘महाभोज’ और ‘यही सच है’ न केवल साहित्यिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि सामाजिक चेतना को भी गहराई से झकझोरती हैं। उनके निधन से हिंदी साहित्य को अपूरणीय क्षति हुई।

जन्म और पारिवारिक पृष्ठभूमि

मन्नू भंडारी का जन्म 3 अप्रैल 1931 को मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले के भानपुरा गाँव में हुआ।

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  • वास्तविक नाम: महेंद्र कुमारी
  • पिता का नाम: सुखसंपतराय भंडारी
  • माता का नाम: अनुप कुमारी
  • भाई-बहन: प्रसन्न कुमार, बसंत कुमार, स्नेहलता, सुशीला

उनके पिता साहित्य और कला-प्रेमी थे, जिसका गहरा प्रभाव मन्नू भंडारी के व्यक्तित्व और रचनात्मकता पर पड़ा। आगे चलकर उन्होंने ‘मन्नू’ नाम से साहित्य जगत में विशेष पहचान बनाई।

प्रारंभिक जीवन और शिक्षा

मन्नू भंडारी का बचपन अजमेर (राजस्थान) में बीता। प्रारंभ से ही वे अध्ययनशील और संवेदनशील स्वभाव की थीं।

  • प्रारंभिक शिक्षा: अजमेर
  • स्नातक: कोलकाता विश्वविद्यालय
  • स्नातकोत्तर: बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) से हिंदी में एम.ए.

BHU में अध्ययन के दौरान उनका संपर्क हिंदी साहित्य के अनेक प्रतिष्ठित लेखकों से हुआ, जिसने उनके साहित्यिक दृष्टिकोण को परिपक्व बनाया।

अध्यापन जीवन: मिरांडा हाउस, दिल्ली

एम.ए. करने के बाद मन्नू भंडारी ने अध्यापन को अपना पेशा बनाया।

  • कोलकाता के कॉलेजों में अध्यापन
  • बाद में दिल्ली विश्वविद्यालय के मिरांडा हाउस कॉलेज में हिंदी प्राध्यापिका नियुक्त हुईं
  • सेवानिवृत्ति तक मिरांडा हाउस में अध्यापन कार्य किया

अध्यापन के साथ-साथ वे निरंतर साहित्य-सृजन में भी सक्रिय रहीं।

व्यक्तिगत जीवन और विवाह

मन्नू भंडारी का विवाह 22 नवंबर 1959 को प्रसिद्ध हिंदी कथाकार राजेंद्र यादव से हुआ।

  • पति: राजेंद्र यादव
  • पुत्री: रचना (टिंकू)

दोनों साहित्यकारों का वैचारिक और रचनात्मक संबंध अत्यंत चर्चित रहा। हालांकि वैवाहिक जीवन में अनेक उतार-चढ़ाव आए, जिनकी झलक उनकी आत्मकथा ‘एक कहानी यह भी’ में स्पष्ट दिखाई देती है।

साहित्यिक यात्रा और लेखन की विशेषताएँ

मन्नू भंडारी का लेखन मुख्यतः—

  • स्त्री-जीवन की जटिलताओं
  • पारिवारिक टूटन
  • सामाजिक अन्याय
  • नैतिक द्वंद्व
  • मध्यवर्गीय संवेदना

पर केंद्रित रहा। उनकी भाषा सहज, सरल और भावनात्मक गहराई से भरी हुई है।

उपन्यास साहित्य

मन्नू भंडारी के उपन्यास हिंदी साहित्य में मील का पत्थर माने जाते हैं।

प्रमुख उपन्यास

  • एक इंच मुस्कान (1961) – राजेंद्र यादव के साथ
  • आपका बंटी (1971)
  • कलवा (1971)
  • महाभोज (1979)
  • स्वामी (1982)

‘आपका बंटी’ का महत्व

यह उपन्यास—

  • तलाकशुदा दंपति के बच्चे की मानसिक पीड़ा को उजागर करता है
  • बाल-मनोविज्ञान और पारिवारिक विघटन का सशक्त चित्रण है
  • हिंदी के सर्वाधिक चर्चित उपन्यासों में गिना जाता है

कहानी साहित्य

मन्नू भंडारी की कहानियाँ स्त्री-मन की सूक्ष्म परतों को खोलती हैं।

प्रमुख कहानी संग्रह

  • मैं हार गई (1957)
  • तीन निगाहों की एक तस्वीर (1959)
  • यही सच है
  • एक प्लेट सैलाब (1968)
  • त्रिशंकु (1978)

प्रसिद्ध कहानियाँ

  • यही सच है
  • एक प्लेट सैलाब
  • मैं हार गई
  • तीन निगाहों की एक तस्वीर

कहानी ‘यही सच है’ पर आधारित फ़िल्म ‘रजनीगंधा’ ने उन्हें व्यापक लोकप्रियता दिलाई।

नाटक साहित्य

मन्नू भंडारी ने नाटक लेखन में भी योगदान दिया।

प्रमुख नाटक

  • बिना दीवारों का घर (1969)
  • महाभोज (नाट्य रूपांतरण, 1983)

आत्मकथा

एक कहानी यह भी (2007)

यह आत्मकथा—

  • हिंदी साहित्य की सर्वाधिक चर्चित आत्मकथाओं में से एक है
  • स्त्री जीवन, विवाह, लेखन और आत्मसंघर्ष का ईमानदार दस्तावेज़ है
  • अनेक विश्वविद्यालयों की पाठ्यपुस्तकों में शामिल है

बाल साहित्य

मन्नू भंडारी ने बच्चों के लिए भी साहित्य रचा।

प्रमुख बाल साहित्य

  • कलवा (1971)
  • आसमाता (1971)
  • आँखों देखा झूठ (1976)

साहित्यिक योगदान और पद

  • विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन में प्रेमचंद सृजनपीठ की अध्यक्षा
  • हिंदी साहित्य में स्त्री-विमर्श को सशक्त स्वर प्रदान किया

पुरस्कार और सम्मान

  • व्यास सम्मान (के.के. बिड़ला फाउंडेशन) – एक कहानी यह भी
  • अनेक साहित्यिक संस्थाओं द्वारा सम्मानित
  • हिंदी की श्रेष्ठ कथाकारों में स्थान

निधन

  • निधन तिथि: 15 नवंबर 2021
  • स्थान: गुरुग्राम, हरियाणा
  • आयु: 90 वर्ष

उनके निधन से हिंदी साहित्य विशेषकर स्त्री लेखन को गहरी क्षति पहुँची।

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