माखनलाल चतुर्वेदी (4 अप्रैल 1889 – 30 जनवरी 1968) हिंदी साहित्य के एक महान कवि, पत्रकार, स्वतंत्रता सेनानी और ‘एक भारतीय आत्मा’ के रूप में विख्यात राष्ट्रीय चेतना के स्वर थे। वे अपनी ओजस्वी रचनाओं, राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत कविता-साहित्य और स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका के लिए प्रसिद्ध हैं। उन्होंने हिंदी पत्रकारिता को नई दिशा दी और कई राष्ट्रीय पत्रिकाओं का संपादन कर देश में जागृति फैलाने का कार्य किया।
1. प्रारंभिक जीवन एवं जन्म
- जन्म तिथि: 4 अप्रैल 1889
- जन्म स्थान: बाबई गाँव, जिला होशंगाबाद (अब नर्मदापुरम), मध्य प्रदेश
- पिता: पंडित नंदलाल चतुर्वेदी
- माता: सुंदरीबाई
माखनलाल जी का जन्म एक साधारण ब्राह्मण परिवार में हुआ था। बचपन से ही उनमें साहित्य, भाषा और संस्कृति के प्रति गहरा लगाव था। उनके घर में धार्मिक एवं सांस्कृतिक वातावरण होने के कारण उनके व्यक्तित्व में संवेदनशीलता और मानवीय मूल्यों का विकास बचपन से ही हो गया था।
2. शिक्षा और स्वाध्याय
उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा बाबई में ही प्राप्त की। विद्यालयीन शिक्षा के साथ-साथ उन्होंने कई भाषाओं और विधाओं का गहन अध्ययन स्वाध्याय से किया।
सीखी गई भाषाएँ:
- संस्कृत
- बंगाली
- गुजराती
- अंग्रेज़ी
वे औपचारिक शिक्षा से अधिक स्वाध्यायी विद्वान थे। साहित्य, इतिहास, संस्कृति और दर्शन का अध्ययन उन्होंने अपनी मेहनत से किया।
3. विवाह और प्रारंभिक पेशा
- विवाह: 1904 में, मात्र 15 वर्ष की आयु में, ग्यारसी बाई से
- पहला पेशा: 16 वर्ष की उम्र में स्कूल शिक्षक बने
शिक्षण कार्य करते हुए उनका मन सामाजिक जागरण और राष्ट्रप्रेम की ओर मुड़ने लगा। यही भाव उन्हें पत्रकारिता और साहित्य की ओर ले गया।
4. पत्रकारिता और राष्ट्रीय आंदोलन
माखनलाल चतुर्वेदी हिंदी पत्रकारिता और राष्ट्रीय चेतना के अग्रदूतों में गिने जाते हैं। उन्होंने सत्य, स्वतंत्रता, न्याय और राष्ट्रहित के लिए कलम को एक हथियार की तरह इस्तेमाल किया।
संपादित पत्रिकाएँ:
- प्रभा
- कर्मवीर
- प्रताप (गणेश शंकर विद्यार्थी के साथ)
पत्रकारिता के माध्यम से उन्होंने ब्रिटिश शासन की नीतियों के विरुद्ध आवाज उठाई और जनता में राष्ट्रप्रेम जागृत किया।
स्वतंत्रता आंदोलन में भूमिका
- कांग्रेस के आंदोलनों में सक्रिय भागीदारी
- कई बार अंग्रेज़ सरकार द्वारा गिरफ्तारी
- जेल में रहते हुए भी लेखन जारी
उनकी अमर कविता “पुष्प की अभिलाषा” इसी जेल जीवन में लिखी गई, जिसने उन्हें राष्ट्रकवि के रूप में अमर कर दिया।
5. साहित्यिक जीवन और योगदान
माखनलाल चतुर्वेदी का साहित्य उनकी संवेदनशीलता, राष्ट्रप्रेम, प्रकृति-चित्रण और ओजस्वी अभिव्यक्ति के लिए जाना जाता है।
उनकी कविता के प्रमुख गुण
- राष्ट्रभक्ति
- प्रकृति-प्रेम
- मानवीय मूल्य
- त्याग, समर्पण और संघर्ष
- भाषा की सादगी और प्रभावशीलता
- ऊर्जा, उत्साह और प्रेरणा से परिपूर्ण शैली
उन्हें उनके लेखन के कारण “एक भारतीय आत्मा” कहा गया। उनकी कृतियाँ न केवल साहित्यिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि राष्ट्रीय चेतना को जागृत करने का भी कार्य करती हैं।
6. प्रमुख रचनाएँ
काव्य संग्रह
- हिमकिरीटिनी
- हिमतरंगिनी
- युग चरण
- समर्पण
- साहित्य के देवता
- पुष्प की अभिलाषा (अत्यंत प्रसिद्ध)
- वक्तृत्व और अन्य रचनाएँ
विशेष कृतियाँ
- पुष्प की अभिलाषा – स्वतंत्रता सेनानियों की प्रेरणा बनी
- एक भारतीय आत्मा – उनके व्यक्तित्व का परिचायक
चतुर्वेदी जी की कविता में सादगी, ओज, दर्शन और देशभक्ति का अद्भुत मेल मिलता है।
7. सम्मान और पुरस्कार
- 1955 – साहित्य अकादमी पुरस्कार (हिंदी में पहला पुरस्कार)
रचना — “हिमकिरीटिनी” - 1963 – पद्मभूषण
भारत सरकार द्वारा सम्मानित - उनके सम्मान में डाक टिकट जारी किया गया
- भारतीय साहित्य और स्वतंत्रता आंदोलन में अतुलनीय योगदान के कारण वे सदैव स्मरणीय रहेंगे।
8. अंतिम समय और निधन
निधन: 30 जनवरी 1968
जीवन भर राष्ट्र, भाषा, साहित्य और संस्कृति के लिए समर्पित रहने वाले यह कवि दुनिया छोड़ गए, परंतु उनकी कृतियाँ आज भी प्रेरणा देती हैं।
