प्रस्तावना
कमलेश्वर हिंदी साहित्य के उन बहुआयामी रचनाकारों में गिने जाते हैं जिन्होंने कहानी, उपन्यास, पत्रकारिता, संपादन, स्तंभ लेखन, फिल्म और टेलीविजन पटकथा—सभी क्षेत्रों में समान अधिकार के साथ काम किया। वे ‘नई कहानी आंदोलन’ के प्रमुख स्तंभ रहे और उन्होंने साहित्य को केवल बौद्धिक विमर्श नहीं, बल्कि समाज, राजनीति और आम आदमी की पीड़ा की आवाज़ बनाया।
उनका उपन्यास ‘कितने पाकिस्तान’ हो या फिर भारतीय राजनीति का यथार्थ उजागर करने वाली फ़िल्म ‘आंधी’, कमलेश्वर का लेखन हमेशा अपने समय का आईना रहा।
जन्म और पारिवारिक पृष्ठभूमि
कमलेश्वर का जन्म 6 जनवरी 1932 को मैनपुरी, उत्तर प्रदेश में हुआ।
- पूरा नाम: कमलेश्वर प्रसाद सक्सेना
- सामाजिक परिवेश: मध्यमवर्गीय, शिक्षित और संवेदनशील
- बचपन से ही साहित्य और समाज के प्रति गहरी रुचि
उनका जीवनकाल भारत के सामाजिक-राजनीतिक परिवर्तनों का साक्षी रहा, जिसका गहरा प्रभाव उनके लेखन में दिखाई देता है।
शिक्षा
कमलेश्वर ने उच्च शिक्षा के माध्यम से अपनी साहित्यिक दृष्टि को परिपक्व किया।
- 1954 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से हिंदी साहित्य में एम.ए.
इलाहाबाद का बौद्धिक वातावरण, साहित्यिक बहसें और रचनात्मक ऊर्जा उनके व्यक्तित्व निर्माण में अत्यंत सहायक रही।
नई कहानी आंदोलन में भूमिका
कमलेश्वर को नई कहानी आंदोलन का अग्रणी रचनाकार माना जाता है।
नई कहानी आंदोलन की विशेषताएँ—
- व्यक्ति के आंतरिक संघर्ष का चित्रण
- बदलते शहरी-ग्रामीण समाज की सच्चाइयाँ
- मध्यवर्ग की कुंठा, अकेलापन और नैतिक द्वंद्व
कमलेश्वर की कहानियाँ केवल घटना नहीं कहतीं, बल्कि मानसिक और सामाजिक यथार्थ को उजागर करती हैं।
साहित्यिक योगदान और विधाएँ
कमलेश्वर का लेखन बहुविध और व्यापक है।
- कहानी
- उपन्यास
- संस्मरण
- आत्मकथा
- यात्रा-वृत्तांत
- पत्रकारिता
- फिल्म व टीवी पटकथा
उन्होंने गंभीर साहित्य और लोकप्रिय माध्यम—दोनों को समान संवेदनशीलता से साधा।
उपन्यास साहित्य
कमलेश्वर ने हिंदी उपन्यास को वैचारिक गहराई और राजनीतिक चेतना प्रदान की।
प्रमुख उपन्यास—
- एक सड़क सत्तावन गलियाँ (1957)
- डाक बंगला (1959)
- लौटे हुए मुसाफ़िर (1961)
- समुद्र में खोया हुआ आदमी (1967)
- काली आँधी (1974)
- तीसरा आदमी (1976)
- आगामी अतीत (1976)
- वही बात (1980)
- सुबह…दोपहर…शाम (1982)
- रेगिस्तान (1988)
- कितने पाकिस्तान (2000)
- अंतिम सफर (अधूरी, बाद में पूर्ण)
‘कितने पाकिस्तान’ का महत्व
यह उपन्यास—
- इतिहास, राजनीति और सभ्यता का पुनर्पाठ है
- केवल भारत-पाक विभाजन नहीं, बल्कि मानव सभ्यता में मौजूद विभाजनों पर प्रश्न उठाता है
- 2003 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित
कहानी साहित्य
कमलेश्वर ने 300 से अधिक कहानियाँ लिखीं, जो हिंदी कहानी साहित्य की अमूल्य धरोहर हैं।
प्रमुख कहानी संग्रह—
- राजा निरबंसिया
- कस्बे का आदमी
- खोई हुई दिशाएँ
- मांस का दरिया
- बयान
- जॉर्ज पंचम की नाक
- जिन्दा मुर्दे
- कोहरा
- स्मारक
- इतने अच्छे दिन
प्रमुख कहानियाँ—
- राजा निरबंसिया
- मांस का दरिया
- जॉर्ज पंचम की नाक
- नीली झील
- बयान
- नागमणि
- अपना एकांत
- ज़िंदा मुर्दे
इन कहानियों में सत्ता, हिंसा, विडंबना और आम आदमी की बेबसी का तीखा चित्रण मिलता है।
पत्रकारिता और संपादन
कमलेश्वर एक निर्भीक और प्रतिबद्ध पत्रकार भी थे।
संपादित पत्रिकाएँ—
- विहान (1954)
- नई कहानियाँ (1958–66)
- सारिका (1967–78)
- कथायात्रा
- गंगा
- इंगित
- श्रीवर्षा
अखबारों में स्तंभ लेखन—
- दैनिक जागरण (1990–92)
- दैनिक भास्कर (1997 से निरंतर)
उनकी पत्रकारिता सत्ता-विरोधी, जनपक्षधर और सवाल उठाने वाली थी।
फिल्म लेखन और पटकथा
कमलेश्वर हिंदी सिनेमा के सबसे सफल साहित्यकार-पटकथा लेखकों में गिने जाते हैं।
प्रमुख फ़िल्में—
- आंधी (1975)
- मौसम (1975)
- सारा आकाश
- रजनीगंधा
- छोटी सी बात
- राम बलराम
- मि. नटवरलाल
- सौतन
- लैला
- द बर्निंग ट्रेन
फ़िल्म ‘आंधी’ को भारतीय राजनीति की सशक्त व्याख्या माना जाता है।
टेलीविजन और मीडिया
टीवी पत्रकारिता और धारावाहिक लेखन में भी कमलेश्वर का योगदान ऐतिहासिक रहा।
प्रमुख धारावाहिक—
- चंद्रकांता
- दर्पण
- एक कहानी
- बेताल पच्चीसी
- युग
टीवी पत्रकारिता
- ‘कामगार विश्व’ कार्यक्रम के माध्यम से
- मज़दूर
- गरीब
- वंचित वर्ग
की आवाज़ बने।
नाटक और अन्य रचनाएँ
नाटक—
- अधूरी आवाज़
- रेत पर लिखे नाम
- हिंदोस्ता हमारा
आत्मकथा और संस्मरण—
- जो मैंने जिया
- यादों के चिराग
- जलती हुई नदी
पुरस्कार और सम्मान
- 2003 – साहित्य अकादमी पुरस्कार (कितने पाकिस्तान)
- 2005 – पद्म भूषण
- अनेक साहित्यिक व सांस्कृतिक सम्मान
अंतिम रचना और निधन
कमलेश्वर की अंतिम अधूरी कृति ‘अंतिम सफर’ थी, जिसे बाद में उनकी पत्नी गायत्री कमलेश्वर के अनुरोध पर पूर्ण किया गया।
- निधन : 27 जनवरी 2007
- स्थान : फरीदाबाद
- कारण: हृदयाघात
