हरीशचंद्र पांडे (जन्म: 28 दिसंबर 1952) हिंदी के समकालीन साहित्य के एक महत्वपूर्ण कवि, कथाकार और लेखक हैं। वे नवें दशक में उभरने वाले उन रचनाकारों में गिने जाते हैं, जिन्होंने अपनी सादगीपूर्ण भाषा, गहरी संवेदना और मानवीय दृष्टि से हिंदी कविता को एक नई दिशा दी। उनकी रचनाओं में पहाड़ का जीवन, प्रकृति, मनुष्य की असहमति, सामाजिक यथार्थ और नैतिक प्रश्न अत्यंत सूक्ष्मता से अभिव्यक्त हुए हैं।
1. हरीशचंद्र पांडे का संक्षिप्त परिचय
- नाम: हरीशचंद्र पांडे
- जन्म: 28 दिसंबर 1952
- जन्म स्थान: अल्मोड़ा, उत्तराखंड
- शिक्षा: स्नातकोत्तर (एम.ए.), कानपुर विश्वविद्यालय
- कर्मक्षेत्र: केंद्र सरकार का लेखा विभाग (प्रयागराज)
- पहचान: कवि, कथाकार, लेखक
- साहित्यिक काल: समकालीन हिंदी साहित्य (नवाँ दशक)
2. प्रारंभिक जीवन और पारिवारिक परिवेश
हरीशचंद्र पांडे का जन्म उत्तराखंड के अल्मोड़ा जनपद में हुआ। यह क्षेत्र अपनी प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विरासत और लोकजीवन के लिए जाना जाता है।
- उनका बचपन अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ में बीता
- पहाड़ी जीवन, प्रकृति, जंगल, बुरुंश के फूल, नदी-नाले और आम जनजीवन की स्मृतियाँ आगे चलकर उनकी कविताओं की आत्मिक भूमि बनीं
उनकी रचनाओं में पहाड़ केवल भूगोल नहीं, बल्कि संवेदना और जीवन-दृष्टि के रूप में उपस्थित है।
3. शिक्षा और बौद्धिक विकास
- प्रारंभिक शिक्षा: अल्मोड़ा व पिथौरागढ़
- उच्च शिक्षा: कानपुर विश्वविद्यालय से एम.ए.
कानपुर विश्वविद्यालय में अध्ययन के दौरान उनका संपर्क आधुनिक हिंदी साहित्य, नई कविता और समकालीन वैचारिक धाराओं से हुआ। यहीं से उनकी साहित्यिक रुचि अधिक गंभीर और परिपक्व होती गई।
4. नौकरी और साहित्यिक जीवन की शुरुआत
शिक्षा पूरी करने के बाद हरीशचंद्र पांडे
👉 केंद्र सरकार के लेखा विभाग में चयनित हुए।
उनकी नियुक्ति इलाहाबाद (वर्तमान प्रयागराज) में हुई, जो हिंदी साहित्य का एक प्रमुख केंद्र रहा है।
- यहाँ वे वृहत साहित्यिक बिरादरी के संपर्क में आए
- समकालीन कवियों, लेखकों और आलोचकों से संवाद हुआ
- इसी वातावरण में उनकी साहित्यिक रचनात्मकता को दिशा और गहराई मिली
5. कवि के रूप में प्रतिष्ठा
हरीशचंद्र पांडे को
👉 नवें दशक के महत्त्वपूर्ण कवि के रूप में पहचाना जाता है।
उनकी कविता की विशेषताएँ
- भाषा: सरल, सधी हुई और पारदर्शी
- शिल्प: धैर्यपूर्ण, संयत और गंभीर
- विषय:
- प्रकृति और पहाड़
- मनुष्य की असहमति
- सामाजिक यथार्थ
- नैतिक संघर्ष
- मानवीय संबंध
उनकी कविताएँ शोर नहीं मचातीं, बल्कि चुपचाप पाठक के मन में उतरती हैं।
6. हरीशचंद्र पांडे की प्रमुख कृतियाँ
(क) काव्य-संग्रह
- कुछ भी मिथ्या नहीं है
- एक बुरुंश कहीं खिलता है
- भूमिकाएँ ख़त्म नहीं होतीं
- असहमति
(ख) कविता-चयन
- मेरी चुनिंदा कविताएँ
- मेरी प्रिय कविताएँ
(ग) कहानी-संग्रह
- दस चक्र राजा
(घ) बाल-साहित्य
- संकट का साथी (बाल-कथा संग्रह)
7. अनुवाद, प्रकाशन और शोध
- उनकी कविताएँ देश की प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रही हैं
- उनकी रचनाओं का अनुवाद कई भारतीय भाषाओं में हुआ है, जैसे—
- अंग्रेज़ी
- बांग्ला
- उड़िया
- पंजाबी
- उर्दू
- गुजराती
- मैथिली
👉 उनकी कविताओं पर शोध-कार्य भी किए गए हैं, जो उनकी साहित्यिक महत्ता को प्रमाणित करते हैं।
8. पुरस्कार और सम्मान
हरीशचंद्र पांडे को उनके साहित्यिक योगदान के लिए अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित किया गया, जिनमें प्रमुख हैं—
- सोमदत्त सम्मान
- केदार सम्मान
- ऋतुराज सम्मान
- अन्य साहित्यिक सम्मान
9. साहित्य में स्थान और महत्व
हरीशचंद्र पांडे का महत्व इस बात में है कि—
- उन्होंने कविता को अति-बौद्धिकता से मुक्त रखा
- आम मनुष्य के अनुभवों को गरिमा और सादगी के साथ प्रस्तुत किया
- उनकी कविता में नैतिक साहस और असहमति की स्पष्ट आवाज़ है
