प्रस्तावना
चंद्रकांत देवताले हिंदी के महत्वपूर्ण समकालीन कवि थे, जिनकी पहचान एक संवेदनशील, मानवीय और प्रगतिशील चेतना वाले रचनाकार के रूप में बनी। उनकी कविता आम आदमी के जीवन, श्रम, प्रेम, स्त्री, प्रकृति और सामाजिक संघर्षों की सच्ची अभिव्यक्ति है। वे कविता को जन-जीवन से जोड़ने वाले कवियों में अग्रणी माने जाते हैं।
जन्म एवं प्रारंभिक जीवन
चंद्रकांत देवताले का जन्म 7 जुलाई 1936 को मध्य प्रदेश के एक साधारण परिवार में हुआ। उनका बचपन सामाजिक यथार्थ, श्रमजीवी जीवन और ग्रामीण-नगरीय परिवेश के बीच बीता। इसी जीवनानुभव ने आगे चलकर उनकी कविता को जनपक्षधर और मानवीय बनाया।
शिक्षा
चंद्रकांत देवताले ने उच्च शिक्षा प्राप्त की और साहित्य का गहन अध्ययन किया।
शिक्षा के दौरान ही उनमें कविता-लेखन की प्रवृत्ति विकसित हो गई थी।
अध्ययन और अनुभव—दोनों का संतुलन उनकी रचनाओं में स्पष्ट दिखाई देता है।
कार्यक्षेत्र
देवताले पेशे से अध्यापक रहे।
- अध्यापन के साथ-साथ निरंतर कविता-लेखन
- साहित्यिक गोष्ठियों और पत्र-पत्रिकाओं में सक्रिय सहभागिता
एक शिक्षक होने के कारण उनके काव्य में बौद्धिक अनुशासन और भावनात्मक गहराई दोनों मिलते हैं।
साहित्यिक व्यक्तित्व
चंद्रकांत देवताले मूलतः कवि थे।
उनकी कविता—
- जीवन के छोटे-छोटे सच को महत्व देती है
- श्रम और मनुष्य की गरिमा को केंद्र में रखती है
- प्रेम को सामाजिक संदर्भों में देखती है
वे किसी आंदोलनकारी नारेबाज़ी के कवि नहीं, बल्कि आंतरिक प्रतिरोध और मानवीय करुणा के कवि हैं।
काव्यगत विशेषताएँ
1. जन-जीवन की अभिव्यक्ति
उनकी कविताओं में मज़दूर, किसान, स्त्री, बच्चा और आम आदमी प्रमुखता से उपस्थित हैं।
2. श्रम और मानवीय गरिमा
देवताले की कविता श्रम को सम्मान देती है और शोषण के विरुद्ध खड़ी होती है।
3. प्रेम और संवेदना
उनका प्रेम-बोध बेहद कोमल, मानवीय और सामाजिक सरोकारों से जुड़ा हुआ है।
4. प्रकृति-बोध
पेड़, नदी, धरती और मौसम उनकी कविताओं में जीवंत प्रतीकों के रूप में आते हैं।
5. प्रगतिशील चेतना
उनकी कविता में वामपंथी और प्रगतिशील दृष्टि मिलती है, लेकिन वह आरोपित नहीं लगती।
भाषा-शैली
चंद्रकांत देवताले की भाषा-शैली की विशेषताएँ—
- सरल, सहज और बोलचाल के क़रीब
- अनावश्यक अलंकारों से मुक्त
- भावनात्मक, लेकिन कृत्रिम नहीं
- सीधी, स्पष्ट और प्रभावशाली
उनकी कविता आम पाठक को भी तुरंत समझ में आ जाती है और गहराई तक छूती है।
प्रमुख काव्य-संग्रह
चंद्रकांत देवताले के प्रमुख कविता-संग्रह इस प्रकार हैं—
- लकड़बग्घा हँस रहा है
- आदमी के लिए
- इतनी सी जगह
- पत्थर और पानी
- सपने का समय
(इन संग्रहों में सामाजिक यथार्थ, प्रेम और संघर्ष की सशक्त अभिव्यक्ति मिलती है।)
कविता का स्वरूप और महत्व
देवताले की कविता—
- न तो अत्यधिक दुरूह है
- न ही केवल भावुक
उनका काव्य संवेदनशील यथार्थवाद का उत्कृष्ट उदाहरण है, जहाँ कविता जीवन से सीधे संवाद करती है।
पुरस्कार एवं सम्मान
चंद्रकांत देवताले को उनके साहित्यिक योगदान के लिए कई सम्मान प्राप्त हुए—
- विभिन्न साहित्यिक संस्थाओं द्वारा सम्मान
- समकालीन हिंदी कविता में प्रतिष्ठित स्थान
(वे पुरस्कारों से अधिक अपनी कविता के कारण जाने जाते हैं।)
निधन
चंद्रकांत देवताले का निधन 14 दिसंबर 2017 को हुआ।
उनके निधन से हिंदी कविता ने एक ईमानदार, जनपक्षधर और संवेदनशील कवि खो दिया।
