1. प्रस्तावना
मोरारजी देसाई भारत के प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी, अनुभवी राजनेता और देश के चौथे प्रधानमंत्री थे। वे भारत के पहले गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री बने। उनका जीवन सादगी, अनुशासन, ईमानदारी और सिद्धांतों पर अडिग रहने का प्रतीक था। उन्होंने भारतीय राजनीति में नैतिक मूल्यों और लोकतांत्रिक परंपराओं को सुदृढ़ करने का प्रयास किया।
2. जन्म और प्रारंभिक जीवन
मोरारजी देसाई का जन्म 29 फरवरी 1896 को गुजरात के भदेली (जिला वलसाड) में हुआ। उनके पिता रणछोड़जी देसाई एक विद्यालय के प्रधानाचार्य थे और माता वजिराबेन धार्मिक एवं संस्कारी महिला थीं। बचपन से ही उनमें अनुशासन और सादगी के संस्कार विकसित हुए। वे पढ़ाई में मेधावी और गंभीर स्वभाव के थे।
3. शिक्षा और प्रारंभिक सेवा
उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गुजरात में प्राप्त की और बाद में मुंबई के विल्सन कॉलेज से स्नातक की डिग्री हासिल की। शिक्षा पूर्ण करने के बाद उन्होंने बॉम्बे प्रेसीडेंसी की प्रांतीय सिविल सेवा में नौकरी की। परंतु देश में बढ़ते स्वतंत्रता आंदोलन से प्रभावित होकर उन्होंने सरकारी नौकरी त्याग दी और स्वतंत्रता संग्राम में कूद पड़े।
4. स्वतंत्रता संग्राम में योगदान
मोरारजी देसाई महात्मा गांधी के सिद्धांतों से अत्यंत प्रभावित थे। उन्होंने असहयोग आंदोलन और भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय भाग लिया। इस दौरान उन्हें कई बार जेल जाना पड़ा। उन्होंने अंग्रेजी शासन के विरुद्ध अहिंसात्मक संघर्ष का समर्थन किया और देश की स्वतंत्रता के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया।
5. स्वतंत्र भारत में राजनीतिक जीवन
स्वतंत्रता के बाद मोरारजी देसाई ने बंबई राज्य (वर्तमान महाराष्ट्र और गुजरात) के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया। वे प्रशासनिक क्षमता और कठोर अनुशासन के लिए जाने जाते थे। बाद में वे केंद्र सरकार में वित्त मंत्री और उपप्रधानमंत्री बने। वित्त मंत्री के रूप में उन्होंने आर्थिक सुधारों और वित्तीय अनुशासन पर विशेष ध्यान दिया।
6. प्रधानमंत्री के रूप में कार्यकाल (1977–1979)
1975 में आपातकाल लागू होने के बाद देश में असंतोष फैल गया। 1977 के आम चुनाव में जनता पार्टी को विजय मिली और मोरारजी देसाई भारत के प्रधानमंत्री बने। वे भारत के पहले ऐसे प्रधानमंत्री थे जो कांग्रेस पार्टी से संबंधित नहीं थे। उनके नेतृत्व में लोकतांत्रिक संस्थाओं को पुनः सशक्त किया गया और आपातकाल के दौरान लगाए गए प्रतिबंधों को हटाया गया। उन्होंने प्रेस की स्वतंत्रता बहाल की और नागरिक अधिकारों की रक्षा पर जोर दिया। हालांकि जनता पार्टी के भीतर आंतरिक मतभेदों के कारण 1979 में उनकी सरकार गिर गई और उन्हें पद से इस्तीफा देना पड़ा।
7. व्यक्तित्व और जीवनशैली
मोरारजी देसाई अत्यंत सादगीपूर्ण जीवन जीते थे। वे योग और प्राकृतिक चिकित्सा में विश्वास रखते थे। उनका जीवन अनुशासन, सत्यनिष्ठा और ईमानदारी का उदाहरण था। वे सिद्धांतों से समझौता करने में विश्वास नहीं रखते थे।
8. सम्मान और निधन
मोरारजी देसाई को उनके योगदान के लिए भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान “भारत रत्न” प्रदान किया गया। साथ ही उन्हें पाकिस्तान का सर्वोच्च नागरिक सम्मान “निशान-ए-पाकिस्तान” भी मिला, जो भारत-पाक संबंधों में उनके प्रयासों को दर्शाता है।
उनका निधन 10 अप्रैल 1995 को मुंबई में हुआ। वे लगभग 99 वर्ष तक जीवित रहे और भारतीय राजनीति के एक युग के साक्षी बने।
