सरिता शर्मा का जीवन परिचय | Sarita Sharma Ka Jivan Parichay

प्रस्तावना

सरिता शर्मा समकालीन हिंदी साहित्य की सुप्रसिद्ध कवयित्री, गीतकार, मंचीय कवयित्री, लेखिका और प्रभावशाली वक्ता हैं। वे आधुनिक हिंदी मंचीय कविता की प्रमुख हस्ताक्षरों में गिनी जाती हैं। उन्होंने अपनी रचनाओं में राष्ट्रप्रेम, नारी-सम्मान, मानवीय संवेदनाओं, सामाजिक सरोकारों, प्रेम, पारिवारिक मूल्यों तथा भारतीय संस्कृति को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त किया है। उनकी ओजपूर्ण वाणी, मधुर काव्य-पाठ और सहज भाषा ने उन्हें देश-विदेश में लोकप्रिय बनाया है। उनकी कविताएँ भाव, विचार और संवेदना का सुंदर समन्वय प्रस्तुत करती हैं।

जन्म एवं प्रारंभिक जीवन

सरिता शर्मा का जन्म 20 जुलाई 1964 ई० को भिलाई नगर, जिला दुर्ग (वर्तमान छत्तीसगढ़) में हुआ। उनका बचपन एक शिक्षित एवं सांस्कृतिक वातावरण में बीता। परिवार में साहित्य, संगीत और भारतीय संस्कृति के प्रति विशेष सम्मान था, जिसका प्रभाव उनके व्यक्तित्व पर बचपन से ही पड़ा।

बाल्यकाल से ही उन्हें कविता लिखने, पुस्तकें पढ़ने और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेने का शौक था। विद्यालयी जीवन में वे कविता-पाठ, भाषण, वाद-विवाद तथा अन्य साहित्यिक प्रतियोगिताओं में सक्रिय रहती थीं। किशोरावस्था में ही उनकी कविताएँ स्थानीय पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होने लगीं। धीरे-धीरे उनकी साहित्यिक प्रतिभा विकसित हुई और उन्होंने मंचीय कविता की ओर कदम बढ़ाया। यही रुचि आगे चलकर उन्हें देश की प्रतिष्ठित कवयित्रियों में स्थापित करने का आधार बनी।

शिक्षा

सरिता शर्मा ने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा भिलाई में प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने हिंदी साहित्य में स्नातकोत्तर (एम.ए.) की उपाधि प्राप्त की। आगे उन्होंने शोध कार्य भी किया। साहित्य के साथ-साथ उन्होंने पुस्तकालय विज्ञान (B.Lib.) का भी अध्ययन किया। विद्यार्थी जीवन से ही वे हिंदी साहित्य, भारतीय संस्कृति, संगीत और मंच संचालन में विशेष रुचि रखती थीं।

कार्य जीवन

सरिता शर्मा ने अपने साहित्यिक जीवन की शुरुआत बहुत कम आयु में कविता लेखन से की। बाद में वे राष्ट्रीय स्तर के कवि सम्मेलनों में नियमित रूप से आमंत्रित की जाने लगीं। उन्होंने भारत के लगभग सभी प्रमुख साहित्यिक मंचों पर काव्य-पाठ किया है।

उनकी कविताओं का प्रसारण आकाशवाणी तथा दूरदर्शन के अनेक केंद्रों से हुआ है। इसके अतिरिक्त उन्होंने विभिन्न समाचार चैनलों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भी भाग लिया। उन्होंने अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, दुबई, मॉरीशस, सिंगापुर, नेपाल सहित अनेक देशों में हिंदी कविता का सफल पाठ कर हिंदी भाषा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित किया।

वे कन्या भ्रूण हत्या, महिला सशक्तिकरण, सामाजिक जागरूकता और भारतीय संस्कृति जैसे विषयों पर भी सक्रिय रूप से कार्य करती रही हैं। संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) तथा अन्य सामाजिक संस्थाओं के कार्यक्रमों में उन्हें वक्ता और कवयित्री के रूप में आमंत्रित किया गया।

साहित्यिक जीवन एवं योगदान

सरिता शर्मा समकालीन हिंदी गीत और मंचीय कविता की सशक्त कवयित्री हैं। उनकी रचनाओं में राष्ट्रप्रेम, मातृभूमि के प्रति समर्पण, नारी की गरिमा, प्रेम, प्रकृति, सामाजिक असमानता, मानवीय संबंध और पारिवारिक मूल्यों का अत्यंत मार्मिक चित्रण मिलता है।

उन्होंने गीत, ग़ज़ल, मुक्तक और कविता जैसी अनेक विधाओं में लेखन किया है। उनकी कविताएँ सरल भाषा, मधुर लय और गहरी संवेदनाओं के कारण श्रोताओं एवं पाठकों के बीच अत्यंत लोकप्रिय हैं। वे मंचीय कविता को केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं मानतीं, बल्कि उसे समाज में जागरूकता और सकारात्मक परिवर्तन का सशक्त साधन मानती हैं।

उनकी रचनाएँ देश की अनेक प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं और अनेक साहित्यिक संकलनों में भी सम्मिलित की गई हैं। मंचीय कविता को नई ऊँचाइयाँ देने में उनका योगदान उल्लेखनीय माना जाता है।

प्रमुख रचनाएँ

उनकी प्रमुख प्रकाशित कृतियाँ निम्नलिखित हैं—

  • पीर के सातों समन्दर (गीत-संग्रह)
  • नदी गुनगुनाती रही (गीत-संग्रह)
  • तेरी मीरा ज़रूर हो जाऊँ (मुक्तक-संग्रह)
  • चाँद, मुहब्बत और मैं (ग़ज़ल-संग्रह)
  • हुए आकाश तुम (गीत-संग्रह)
  • चाँद सोता रहा (ऑडियो एल्बम)
  • गीत बंजारन के (ऑडियो एल्बम)

भाषा-शैली

सरिता शर्मा की भाषा सरल, सहज, मधुर, प्रवाहपूर्ण तथा प्रभावशाली है। वे शुद्ध खड़ी बोली हिंदी का प्रयोग करती हैं, जिसमें आवश्यकता अनुसार उर्दू और लोकभाषा के शब्दों का भी सुंदर समावेश मिलता है। उनकी शैली मुख्यतः गीतात्मक, भावात्मक, ओजपूर्ण, प्रेरणात्मक, वर्णनात्मक तथा संवादात्मक है। उनकी कविताओं में लयात्मकता, संगीतात्मकता, प्रभावी बिंब, प्रतीक और अलंकारों का सुंदर प्रयोग मिलता है। सरल शब्दों में गहरी संवेदनाएँ व्यक्त करना उनकी सबसे बड़ी विशेषता है।

व्यक्तित्व और जीवन-दर्शन

सरिता शर्मा का व्यक्तित्व सरल, विनम्र, आत्मविश्वासी, संवेदनशील और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों से ओत-प्रोत है। वे नारी-सम्मान, शिक्षा, सामाजिक समरसता और राष्ट्रप्रेम की प्रबल समर्थक हैं।

उनका जीवन-दर्शन प्रेम, मानवता, सकारात्मक सोच, सामाजिक उत्तरदायित्व और नैतिक मूल्यों पर आधारित है। वे मानती हैं कि साहित्य का उद्देश्य केवल मनोरंजन करना नहीं, बल्कि समाज को सही दिशा देना, मानवीय संवेदनाओं को जागृत करना और जीवन-मूल्यों को स्थापित करना भी है।

हिंदी साहित्य में स्थान

समकालीन हिंदी साहित्य में सरिता शर्मा का स्थान एक प्रतिष्ठित मंचीय कवयित्री, गीतकार और साहित्यकार के रूप में अत्यंत सम्माननीय है। उन्होंने अपनी सशक्त अभिव्यक्ति, प्रभावशाली मंच संचालन और उत्कृष्ट काव्य-पाठ के माध्यम से हिंदी कविता को नई पहचान दी है। देश-विदेश में हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार तथा मंचीय काव्य परंपरा को समृद्ध बनाने में उनका योगदान उल्लेखनीय है। आज उनका नाम हिंदी की अग्रणी मंचीय कवयित्रियों में आदरपूर्वक लिया जाता है।

सम्मान एवं पुरस्कार

सरिता शर्मा को हिंदी साहित्य, मंचीय कविता तथा हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार में उल्लेखनीय योगदान के लिए अनेक साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया गया है। उन्हें राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय कवि सम्मेलनों में उत्कृष्ट काव्य-पाठ के लिए भी सम्मान प्राप्त हुआ है। साथ ही, महिला जागरूकता और सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों पर सक्रिय योगदान के लिए विभिन्न संस्थाओं ने उन्हें सम्मानित किया है।