जीवन परिचय
सर्वेश्वर दयाल सक्सेना आधुनिक हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध कवि, नाटककार, कथाकार, पत्रकार, व्यंग्यकार तथा बाल साहित्यकार थे। उनका जन्म 15 सितंबर 1927 ई० को उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में हुआ था। उनका परिवार शिक्षित, संस्कारित और साहित्यिक रुचि वाला था। बचपन से ही उन्हें अध्ययन, भाषा और संस्कृति का अच्छा वातावरण मिला। उनका प्रारम्भिक जीवन ग्रामीण तथा कस्बाई परिवेश में बीता। उन्होंने गाँव और छोटे नगरों के सामान्य जीवन, किसानों की कठिनाइयों, समाज की विषमताओं और साधारण जनता के संघर्ष को निकट से देखा। यही अनुभव आगे चलकर उनकी रचनाओं का आधार बने। वे बचपन से ही गंभीर, जिज्ञासु और संवेदनशील स्वभाव के थे। उनमें साहित्य, समाज और देश के प्रति विशेष रुचि थी।
शिक्षा
सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की प्रारम्भिक शिक्षा बस्ती में हुई। वे प्रारम्भ से ही मेधावी छात्र थे। आगे की शिक्षा के लिए वे उच्च शिक्षण संस्थानों में गए। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा प्राप्त की। विद्यार्थी जीवन में उनकी रुचि हिंदी साहित्य, इतिहास, राजनीति, दर्शन और समाजशास्त्र के अध्ययन में थी। उन्होंने भारतीय तथा विश्व साहित्य का गंभीर अध्ययन किया। उच्च शिक्षा के दौरान ही उन्होंने कविता, कहानी और लेखन की शुरुआत की। साहित्यिक गोष्ठियों और बौद्धिक वातावरण ने उनके व्यक्तित्व को और समृद्ध किया।
कार्य-जीवन
शिक्षा पूर्ण करने के बाद सर्वेश्वर दयाल सक्सेना ने अध्यापन, पत्रकारिता और साहित्य-सृजन के क्षेत्र में कार्य किया। वे कुछ समय तक अध्यापन कार्य से जुड़े रहे, बाद में पत्रकारिता को अपनाया। उन्होंने आकाशवाणी में भी कार्य किया तथा बाद में प्रसिद्ध साप्ताहिक पत्रिका दिनमान से जुड़े। पत्रकार के रूप में उन्होंने समाज, राजनीति और संस्कृति पर गंभीर लेखन किया। वे स्वतंत्र लेखन, संपादन और साहित्यिक गतिविधियों में सक्रिय रहे। उनका जीवन साहित्य और समाज के प्रति पूर्णतः समर्पित रहा।
साहित्यिक व्यक्तित्व
सर्वेश्वर दयाल सक्सेना समकालीन हिंदी साहित्य के अत्यंत महत्वपूर्ण रचनाकार थे। वे नई कविता आंदोलन के प्रमुख कवियों में गिने जाते हैं। उनकी कविताओं में आम आदमी का जीवन, सामाजिक अन्याय, राजनीतिक विसंगतियाँ, मानवीय पीड़ा, संघर्ष और आशा का सुंदर चित्रण मिलता है। वे केवल कवि ही नहीं, बल्कि सफल नाटककार, व्यंग्यकार, कथाकार और बाल साहित्यकार भी थे। उनकी रचनाओं में गहरी संवेदना के साथ तीखा व्यंग्य भी मिलता है। उनकी कविता में जनजीवन की सच्चाई, व्यवस्था के प्रति असंतोष और मनुष्य के प्रति गहरा विश्वास दिखाई देता है। वे सरल भाषा में गंभीर बात कहने वाले रचनाकार थे।
प्रमुख रचनाएँ
सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की प्रमुख रचनाएँ निम्नलिखित हैं—
काव्य-संग्रह
- खूँटियों पर टंगे लोग
- गर्म हवाएँ
- जंगल का दर्द
- कुआनो नदी
- एक सूनी नाव
- बांस का पुल
नाटक
- बकरी
- लड़ाई
- अब गरीबी हटाओ
बाल साहित्य
- बतूता का जूता
- लाख की नाक
- अनेक बाल कविताएँ और कहानियाँ
अन्य रचनाएँ
- व्यंग्य लेख
- कहानी संग्रह
- पत्रकारिता संबंधी लेख
काव्य की विशेषताएँ
सर्वेश्वर दयाल सक्सेना के काव्य में समकालीन जीवन का यथार्थ चित्रण मिलता है। उनकी कविताओं में सामाजिक विषमता, राजनीतिक भ्रष्टाचार, आम आदमी की पीड़ा, संघर्ष और अन्याय के विरुद्ध स्वर दिखाई देता है। वे मानवीय संवेदना, करुणा और आशा के कवि हैं। उनके काव्य में व्यंग्य, प्रतीकात्मकता, सामाजिक चेतना और जीवन के प्रति गहरा विश्वास मिलता है। उनकी कविता सरल होते हुए भी अत्यंत प्रभावशाली है।
भाषा-शैली
सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की भाषा सरल, सहज, प्रवाहपूर्ण और जनभाषा के निकट है। उन्होंने बोलचाल के शब्दों का सुंदर प्रयोग किया है। उनकी शैली व्यंग्यात्मक, प्रतीकात्मक, चित्रात्मक, भावपूर्ण और विचारप्रधान है। वे कम शब्दों में गहरी बात कहने की क्षमता रखते हैं। उनकी भाषा में मार्मिकता और प्रभावशीलता का विशेष गुण मिलता है।
साहित्य में स्थान
सर्वेश्वर दयाल सक्सेना आधुनिक हिंदी साहित्य के बहुमुखी प्रतिभा संपन्न रचनाकारों में गिने जाते हैं। उन्होंने कविता, नाटक, पत्रकारिता, व्यंग्य और बाल साहित्य सभी क्षेत्रों में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया। नई कविता आंदोलन में उनका स्थान अत्यंत विशिष्ट और सम्माननीय है। वे उन साहित्यकारों में हैं जिन्होंने साहित्य को जनता के जीवन और संघर्ष से जोड़ा। हिंदी साहित्य में उनका योगदान अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।
पुरस्कार और सम्मान
सर्वेश्वर दयाल सक्सेना को साहित्य सेवा के लिए अनेक सम्मान प्राप्त हुए। उनकी रचनाओं को पाठकों और आलोचकों ने अत्यधिक सराहा। निधन के बाद भी उन्हें हिंदी साहित्य में आदरपूर्वक स्मरण किया जाता है।
निधन
सर्वेश्वर दयाल सक्सेना का निधन 24 सितंबर 1983 ई० को नई दिल्ली में हुआ। उनके निधन से हिंदी साहित्य जगत को बड़ी क्षति पहुँची।
