जीवन परिचय
नरेश मेहता आधुनिक हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध कवि, नाटककार, उपन्यासकार, निबंधकार तथा चिंतनशील रचनाकार थे। उनका जन्म 15 फरवरी 1922 ई० को मध्य प्रदेश के शाजापुर में हुआ था। उनका परिवार संस्कारित, शिक्षित और भारतीय परंपराओं से जुड़ा हुआ था। बचपन से ही उन्हें अध्ययन, साहित्य और संस्कृति का अच्छा वातावरण मिला। उनका प्रारम्भिक जीवन सामान्य परिवेश में बीता। बाल्यकाल से ही वे गंभीर, संवेदनशील और चिंतनशील स्वभाव के थे। भारतीय संस्कृति, धर्म, दर्शन, इतिहास और साहित्य के प्रति उनकी विशेष रुचि थी। यही रुचि आगे चलकर उनके साहित्यिक व्यक्तित्व का आधार बनी।
शिक्षा
नरेश मेहता की प्रारम्भिक शिक्षा स्थानीय विद्यालयों में हुई। वे प्रारम्भ से ही मेधावी छात्र थे। आगे की शिक्षा के लिए उन्होंने उच्च शिक्षण संस्थानों में अध्ययन किया। उन्होंने हिंदी साहित्य तथा अन्य विषयों का गंभीर अध्ययन किया। उनकी रुचि साहित्य, दर्शन, इतिहास और भारतीय संस्कृति में विशेष थी। उन्होंने संस्कृत तथा भारतीय शास्त्रीय परंपरा का भी अध्ययन किया। इसी काल में उन्होंने कविता लेखन आरम्भ किया और साहित्यिक गतिविधियों में सक्रिय भाग लेने लगे।
कार्य-जीवन
शिक्षा पूर्ण करने के बाद नरेश मेहता ने साहित्य-सृजन, पत्रकारिता, संपादन तथा सांस्कृतिक कार्यों को अपनाया। वे विभिन्न साहित्यिक संस्थाओं और पत्र-पत्रिकाओं से जुड़े रहे। उन्होंने कुछ समय तक आकाशवाणी तथा अन्य संस्थानों में भी कार्य किया। बाद में स्वतंत्र लेखन को ही अपना मुख्य कार्य बना लिया। वे देश की अनेक साहित्यिक गोष्ठियों, संगोष्ठियों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेते रहे। उनका जीवन साहित्य और संस्कृति के प्रति पूर्णतः समर्पित रहा।
साहित्यिक व्यक्तित्व
नरेश मेहता आधुनिक हिंदी साहित्य के अत्यंत महत्वपूर्ण कवि थे। वे नई कविता आंदोलन के प्रमुख हस्ताक्षरों में गिने जाते हैं। उनकी कविताओं में भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना, मानवीय संवेदना, प्रकृति-प्रेम और आधुनिक जीवन की समस्याओं का सुंदर समन्वय मिलता है। वे ऐसे कवि थे जिन्होंने परंपरा और आधुनिकता के बीच संतुलन स्थापित किया। उनकी रचनाओं में वेद, उपनिषद, पुराण, इतिहास और समकालीन जीवन का अद्भुत मेल दिखाई देता है।
वे केवल कवि ही नहीं, बल्कि सफल नाटककार, उपन्यासकार और चिंतक भी थे।
प्रमुख रचनाएँ
नरेश मेहता की प्रमुख रचनाएँ निम्नलिखित हैं—
काव्य-संग्रह
- संशय की एक रात
- अरण्या
- बोलने दो चीड़ को
- मेरा समर्पित एकांत
- उत्सवा
- तुम मेरा मौन हो
खंडकाव्य
- महाप्रस्थान
- प्रवाद पर्व
- शबरी
नाटक
- सुबह के घंटे
- सनोवर के फूल
उपन्यास
- यह पथ बंधु था
- धूमकेतु एक श्रुति
निबंध एवं अन्य रचनाएँ
- संस्कृति, समाज और साहित्य पर अनेक लेख
काव्य की विशेषताएँ
नरेश मेहता के काव्य में भारतीय संस्कृति, अध्यात्म, प्रकृति और मानवीय संवेदना का सुंदर चित्रण मिलता है। उनकी कविताओं में जीवन के गहरे प्रश्न, आत्मचिंतन, प्रेम, सौंदर्य और आधुनिक मनुष्य की बेचैनी व्यक्त हुई है। वे परंपरा और आधुनिक चेतना का समन्वय करने वाले कवि हैं। उनके काव्य में प्रतीकात्मकता, दार्शनिकता और सौंदर्यबोध का विशेष गुण मिलता है। उनकी कविता गंभीर होते हुए भी अत्यंत प्रभावशाली है।
भाषा-शैली
नरेश मेहता की भाषा परिष्कृत, साहित्यिक, संस्कृतनिष्ठ और प्रभावशाली है। उन्होंने हिंदी भाषा का अत्यंत कलात्मक प्रयोग किया है। उनकी शैली प्रतीकात्मक, दार्शनिक, चित्रात्मक, व्यंजना प्रधान और भावपूर्ण है। वे कम शब्दों में गहरे अर्थ व्यक्त करते हैं। उनकी भाषा में गरिमा, माधुर्य और चिंतन की गहराई दिखाई देती है।
साहित्य में स्थान
नरेश मेहता आधुनिक हिंदी साहित्य के श्रेष्ठ कवियों में गिने जाते हैं। उन्होंने हिंदी कविता को सांस्कृतिक चेतना, आध्यात्मिक दृष्टि और नई संवेदना प्रदान की। नई कविता आंदोलन में उनका स्थान अत्यंत विशिष्ट और सम्माननीय है। वे उन रचनाकारों में हैं जिन्होंने साहित्य को भारतीय परंपरा और आधुनिक जीवन दोनों से जोड़ा। हिंदी साहित्य में उनका योगदान अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।
पुरस्कार और सम्मान
नरेश मेहता को साहित्य सेवा के लिए अनेक प्रतिष्ठित पुरस्कार एवं सम्मान प्राप्त हुए। उनके प्रमुख सम्मान निम्नलिखित हैं—
- ज्ञानपीठ पुरस्कार
- साहित्य अकादमी पुरस्कार
- भारत भारती सम्मान
निधन
नरेश मेहता का निधन 22 नवंबर 2000 ई० को हुआ। उनके निधन से हिंदी साहित्य जगत को बड़ी क्षति पहुँची।
