प्रसून जोशी का जीवन परिचय (Prasoon Joshi Biography in Hindi)

प्रसून जोशी भारतीय सिनेमा, साहित्य और विज्ञापन जगत का एक ऐसा नाम हैं, जिन्होंने शब्दों को केवल सजाया नहीं, बल्कि उन्हें संवेदना, विचार और आत्मा दी। वे कवि, गीतकार, लेखक, पटकथा लेखक और विज्ञापन विशेषज्ञ होने के साथ-साथ एक संवेदनशील चिंतक भी हैं। उनकी रचनाएँ प्रेम, माँ, देश, समाज और इंसान की भीतरी भावनाओं को बेहद सरल लेकिन गहराई से व्यक्त करती हैं।

जन्म और पारिवारिक पृष्ठभूमि

प्रसून जोशी का जन्म 16 सितंबर 1971 को अल्मोड़ा, उत्तराखंड (तत्कालीन उत्तर प्रदेश) में हुआ।
(कुछ स्रोतों में जन्म वर्ष 1968 भी मिलता है, पर व्यापक रूप से 1971 स्वीकार किया जाता है।)

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  • पिता: देवेंद्र कुमार जोशी — शिक्षा विभाग में उच्च पद पर कार्यरत
  • माता: सुषमा जोशी
  • पैतृक गाँव: दन्या, ज़िला अल्मोड़ा

उनका परिवार शिक्षा और संस्कृति से गहराई से जुड़ा रहा, जिसका प्रभाव उनके व्यक्तित्व और लेखन पर स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।

बचपन और प्रारंभिक जीवन

प्रसून जोशी का बचपन उत्तराखंड के विभिन्न पहाड़ी शहरों—

  • टिहरी
  • गोपेश्वर
  • चमोली
  • रुद्रप्रयाग
  • नरेंद्रनगर

में बीता। उनके पिता के स्थानांतरण के कारण उन्हें अलग-अलग सांस्कृतिक और प्राकृतिक परिवेश देखने को मिले। पहाड़ों की शांति, प्रकृति की सुंदरता और जीवन की सादगी ने उनके मन में संवेदनशीलता और रचनात्मकता को जन्म दिया।

बचपन से ही वे लेखन में रुचि रखते थे। उन्होंने खुद की हस्तलिखित पत्रिका तक निकाली, जिससे साफ हो गया था कि शब्द ही उनका भविष्य बनने वाले हैं।

शिक्षा और बौद्धिक विकास

प्रसून जोशी की प्रारंभिक शिक्षा गोपेश्वर और नरेंद्रनगर में हुई।

  • शैक्षणिक योग्यता:
    • एम.एससी. (M.Sc.)
    • एम.बी.ए. (MBA)

उच्च शिक्षा के साथ-साथ उन्होंने साहित्य, दर्शन और संगीत का भी गहन अध्ययन किया।

शास्त्रीय संगीत की दीक्षा

बहुत कम लोग जानते हैं कि प्रसून जोशी ने उस्ताद हफीज़ अहमद खान से शास्त्रीय संगीत की दीक्षा ली है।
उनके गुरु उन्हें ठुमरी गायक बनाना चाहते थे।

प्रसून बताते हैं कि जब रियाज़ का समय नहीं मिलता था, तो वे बाइक पर घर लौटते हुए गुनगुनाते थे और उनका हेलमेट उनके लिए “अकॉस्टिक चैंबर” का काम करता था। यही संगीत-बोध आगे चलकर उनके गीतों की आत्मा बना।

करियर की शुरुआत: विज्ञापन की दुनिया

एमबीए करने के बाद प्रसून जोशी ने रचनात्मकता को व्यावसायिक रूप देने के लिए विज्ञापन जगत को चुना।

विज्ञापन करियर:

  • ओगिल्वी एंड माथर
  • मैककैन एरिक्सन (McCann Erickson)

उन्होंने ऐसे विज्ञापन लिखे जो आज भी भारतीय संस्कृति का हिस्सा हैं—

  • “ठंडा मतलब कोका-कोला”
  • “बार्बर शॉप – ए जा बाल कटा ला”

इन अभियानों ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई और वे “एड गुरु” कहलाने लगे।

कॉर्पोरेट भूमिका

  • मैककैन वर्ल्ड ग्रुप इंडिया के CEO
  • एशिया-प्रशांत क्षेत्र के चेयरमैन

उन्होंने यह साबित किया कि रचनात्मकता और कॉर्पोरेट नेतृत्व एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हो सकते हैं।

फ़िल्मी करियर और गीत लेखन

प्रसून जोशी ने हिन्दी सिनेमा को ऐसे गीत दिए जो केवल सुनाई नहीं देते, महसूस किए जाते हैं

प्रमुख फ़िल्में:

  • तारे ज़मीन पर
  • रंग दे बसंती
  • फना
  • हम तुम
  • दिल्ली-6
  • भाग मिल्खा भाग
  • गजनी

यादगार गीत:

  • “मां…” (तारे ज़मीन पर)
  • “चांद सिफ़ारिश” (फना)
  • “लुक्का छुप्पी”
  • “अरे रे अरे”

गीत “मां” को उन्होंने अपनी बेटी को समर्पित किया था और यह गीत लाखों लोगों की आँखों में आँसू ले आया।

साहित्य और कविता

कविता प्रसून जोशी का पहला प्रेम है। मात्र 17 वर्ष की उम्र में उनका पहला काव्य संग्रह प्रकाशित हुआ।

उन्होंने कविता को कभी छोड़ा नहीं—चाहे वे विज्ञापन में हों या सिनेमा में।

सीबीएफसी (CBFC) अध्यक्ष

साल 2017 में प्रसून जोशी को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) का अध्यक्ष नियुक्त किया गया। इस भूमिका में उन्होंने सिनेमा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाए रखने का प्रयास किया।

पुरस्कार और सम्मान

प्रमुख सम्मान:

  • पद्म श्री (2015) — कला, साहित्य और विज्ञापन में योगदान
  • राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार
    • “मां…” (तारे ज़मीन पर)
  • फ़िल्मफेयर पुरस्कार
    • “चांद सिफ़ारिश”
    • “मां…”
  • शैलेंद्र सम्मान
  • अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विज्ञापन पुरस्कार

व्यक्तित्व और विचार

प्रसून जोशी मानते हैं कि—

“शब्दों का सबसे बड़ा उद्देश्य दिल तक पहुँचना है।”

उनकी रचनाओं में बाज़ार नहीं, मानव भावना प्राथमिकता में रहती है। यही कारण है कि वे गुलज़ार, कैफ़ी आज़मी और शैलेंद्र की परंपरा के आधुनिक प्रतिनिधि माने जाते हैं।

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