राहत इंदौरी का जन्म 1 जनवरी 1950 को मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध शहर इंदौर में हुआ। उनके पिता का नाम रफ़तुल्लाह कुरैशी था, जो एक कपड़ा मिल में मजदूर के रूप में काम करते थे, जबकि माता का नाम मकबूल उन निसा बेगम था। राहत अपने माता-पिता की चौथी संतान थे।
परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। बचपन से ही उन्होंने संघर्ष, तंगी और मेहनत को बहुत नज़दीक से देखा। यही कारण था कि उनकी शायरी में दिखावटी रूमानीपन नहीं, बल्कि ज़िंदगी की सच्ची तपिश दिखाई देती है।
संघर्ष और मेहनत से भरा बचपन
घर की आर्थिक मजबूरी ने राहत इंदौरी को बहुत छोटी उम्र में काम करने पर मजबूर कर दिया।
करीब 10 साल की उम्र में उन्होंने साइन बोर्ड पेंटर के रूप में काम शुरू किया।
वे दुकानों, ट्रकों, स्कूटरों और नंबर प्लेटों पर पेंटिंग करके परिवार की मदद करते थे।
इंदौर में उनकी दुकान “राहत पेंटर” के नाम से जानी जाती थी।
यह संघर्ष बाद में उनकी शायरी की ताक़त बना।
शिक्षा और बौद्धिक विकास
राहत इंदौरी की प्रारंभिक शिक्षा नूतन स्कूल, इंदौर में हुई।
इसके बाद उन्होंने:
- इस्लामिया करीमिया कॉलेज, इंदौर से 1973 में स्नातक (Graduation)
- बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय, भोपाल से 1975 में उर्दू साहित्य में एम.ए.
- मध्य प्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय से 1985 में उर्दू साहित्य में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की
उनकी पीएचडी थीसिस का विषय था –
“उर्दू में मुशायरा परंपरा”, जिसे विद्वानों द्वारा बहुत सराहा गया।
शायरी की शुरुआत और पहचान
राहत इंदौरी को शायरी से लगाव बचपन से ही था। कॉलेज के दिनों में उन्होंने पहली बार मंच पर शेर पढ़े और तभी से लोग उनके अंदाज़ के दीवाने होने लगे।
वे मुशायरों में ग़ज़ल को तरन्नुम नहीं, बल्कि ज़ोरदार आवाज़ और आत्मविश्वास के साथ पढ़ते थे।
उनकी शायरी सुनना सिर्फ़ कविता सुनना नहीं, बल्कि एक अनुभव होता था।
अध्यापन और प्रोफेसर के रूप में योगदान
राहत इंदौरी ने कुछ समय तक इंद्रकुमार कॉलेज, इंदौर में अध्यापन किया।
इसके बाद वे देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (DAVV), इंदौर में उर्दू साहित्य के प्रोफेसर बने।
हालाँकि बाद में उन्होंने पूरी तरह से शायरी और साहित्य को ही अपना जीवन बना लिया।
शायरी की शैली और विषय
राहत इंदौरी की शायरी की सबसे बड़ी विशेषताएँ थीं:
- बेबाक़ और निडर भाषा
- सामाजिक और राजनीतिक सवाल
- इंसानियत, बराबरी और हक़ की बात
- सत्ता से टकराने का साहस
- आम आदमी की ज़ुबान
उनका मशहूर शेर —
“सभी का खून है शामिल यहाँ की मिट्टी में,
किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़ी है।”
आज भी उतना ही असरदार है।
फ़िल्मी गीतकार के रूप में योगदान
बहुत कम लोग जानते हैं कि राहत इंदौरी एक सफल फ़िल्मी गीतकार भी थे।
उन्होंने कई लोकप्रिय फिल्मों के लिए गीत लिखे, जिनमें प्रमुख हैं:
- मुन्ना भाई MBBS
- मिशन कश्मीर
- मर्डर
- करीब
- इश्क़
- खुद्दार
लोकप्रिय गीतों में शामिल हैं:
- नींद चुराई मेरी किसने ओ सनम
- तुमसा कोई प्यारा कोई मासूम नहीं है
- एम बोले तो मास्टर
हालाँकि बॉलीवुड में काम करने के बावजूद उनका मन हमेशा शायरी में ही रमा रहा।
प्रमुख काव्य संग्रह
राहत इंदौरी की प्रमुख किताबें:
- धूप बहुत है
- चाँद पागल है
- रुत
- नाराज़
- मेरे बाद
इन रचनाओं में समाज, राजनीति, प्रेम और आत्मसंघर्ष की गहरी छाप मिलती है।
व्यक्तिगत जीवन
राहत इंदौरी ने दो शादियाँ की थीं।
उनके बच्चों में बेटा फैज़ल राहत सहित अन्य संतानें हैं।
वे खेलों में भी रुचि रखते थे और स्कूल-कॉलेज में फुटबॉल और हॉकी टीम के कप्तान रह चुके थे।
निधन और विरासत
10 अगस्त 2020 को राहत इंदौरी कोरोना संक्रमित पाए गए।
11 अगस्त 2020 को इंदौर में हृदय गति रुकने से उनका निधन हो गया।
उनकी उम्र 70 वर्ष थी।
