अशोक चक्रधर का जीवन परिचय (Ashok Chakradhar Biography in Hindi)

प्रस्तावना

अशोक चक्रधर हिंदी साहित्य के उन बहुमुखी रचनाकारों में से हैं जिन्होंने हास्य, व्यंग्य, बाल साहित्य और मंचीय कविताओं के माध्यम से पाठकों और श्रोताओं को मनोरंजन के साथ सामाजिक और सांस्कृतिक चेतना से भी जोड़ने का काम किया। वे न केवल कवि थे, बल्कि लेखक, हास्य कलाकार, नाटककार, दूरदर्शन लेखक, निर्देशक और शिक्षक भी रहे। उनके लेखन और मंचीय प्रस्तुतियों ने हिंदी कविता और हास्य की वाचिक परंपरा को नई ऊँचाइयों पर पहुँचाया।

जन्म और पारिवारिक पृष्ठभूमि

अशोक चक्रधर का जन्म 8 फरवरी 1951 को उत्तर प्रदेश के खुर्जा शहर के अहीरपाड़ा मोहल्ला में हुआ। उनके पिता डॉ. राधेश्याम “प्रगल्भ”, स्वयं कवि और बाल साहित्यकार थे, जिन्होंने उन्हें साहित्य और कविता की शुरुआती शिक्षा दी। माता कुसुम प्रगल्भ गृहिणी थीं। बचपन से ही अशोक चक्रधर ने साहित्यिक वातावरण में पला बढ़ा और अपने पिता के कवि-मित्रों से प्रेरणा लेकर कविता और हास्य लेखन की दिशा में रुचि विकसित की।

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शिक्षा और बौद्धिक विकास

अशोक चक्रधर ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा अपने पैतृक गाँव से पूरी की। उन्होंने बी.ए. प्रथम श्रेणी 1970 में उत्तीर्ण की। इसके बाद उन्होंने आगरा विश्वविद्यालय से हिंदी में स्नातकोत्तर (M.A.) की उपाधि प्राप्त की और दिल्ली विश्वविद्यालय में एम.लिट. किया। उन्होंने अपने शोधकार्य में साहित्य और कविता की गहन समझ विकसित की, और बाद में पी.एच.डी. भी पूरी की।

प्रारंभिक साहित्यिक और मंचीय जीवन

अशोक चक्रधर ने 11 साल की उम्र में कविताओं का मंचीय पाठ करना शुरू किया। 1962 में अपने पिता द्वारा आयोजित एक कवि सम्मेलन में उन्होंने पहली बार कविता पढ़ी और पं. सोहनलाल द्विवेदी का आशीर्वाद प्राप्त किया। इसी समय से उन्होंने हास्य और व्यंग्य के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाना शुरू किया।

शैक्षणिक और प्रशासनिक जीवन

अशोक चक्रधर ने 1972 में जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में प्राध्यापक पद ग्रहण किया और 2008 तक सेवा दी। इसके अलावा वे दिल्ली विश्वविद्यालय के सत्यवती कॉलेज में भी पढ़ा चुके थे। उन्होंने हिंदी साहित्य, बाल साहित्य, व्यंग्य, और मंचीय कविताओं के क्षेत्र में शिक्षा देने के साथ-साथ कंप्यूटर में हिंदी के प्रयोग और मीडिया में हिंदी की भूमिका पर भी कार्य किया।

साहित्यिक और रचनात्मक यात्रा

अशोक चक्रधर ने कविताओं, हास्य-व्यंग्य, बाल साहित्य, धारावाहिक, वृत्तचित्र और नाटकों में व्यापक योगदान दिया। वे जननाट्य मंच के संस्थापक सदस्य भी रहे। उनके नाटकों में “बंदरिया चली ससुराल”, “आदर्श हिन्दू होटल”, और “शॉर्टकट” प्रमुख हैं। उन्होंने कई दूरदर्शन धारावाहिकों के लिए लेखन और निर्देशन किया, जैसे “छोटी सी आशा”, “वाह वाह!”, “कहकहे, पर्दा उठता है”, और “फुलझड़ी एक्सप्रेस”

प्रमुख कृतियाँ

कविता संग्रह

  • बूढ़े बच्चे
  • सो तो है
  • भोले भाले
  • तमाशा
  • चुटपुटकुले
  • हंसो और मर जाओ
  • देश धन्या पंच कन्या
  • ए जी सुनिए
  • इसलिए बौड़म जी इसलिए
  • खिड़कियाँ
  • बोल-गप्पे
  • जाने क्या टपके
  • चुनी चुनाई
  • सोची समझी
  • जो करे सो जोकर
  • मसलाराम

हास्य-व्यंग्य

  • चुटपुटकुले
  • इसलिए बौड़म जी इसलिए

बाल साहित्य

  • भोले भाले

दूरदर्शन / फिल्म

  • धारावाहिक: छोटी सी आशा, वाह वाह, फुलझड़ी एक्सप्रेस, कहकहे, पर्दा उठता है
  • वृत्तचित्र: बहू भी बेटी होती है, जंगल की लय ताल, साड़ियों में लिपटी सदियाँ
  • फिल्म: जीत गई छन्नो, मास्टर दीपचंद, झूमे बाला झूमे बाली

अंतर्राष्ट्रीय समारोह और यात्राएँ

अशोक चक्रधर ने अमेरिका, इंग्लैंड, सोवियत संघ, ऑस्ट्रेलिया, मॉरीशस, थाईलैंड, इंडोनेशिया, सिंगापुर, हांगकांग, नेपाल, ओमान, कनाडा, रूस, जापान आदि देशों में साहित्यिक और सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दी। उन्होंने हिंदी और भारतीय संस्कृति का प्रचार-प्रसार किया।

पुरस्कार और सम्मान (मुख्य)

  • 1975: ‘मुक्तिबोध की काव्यप्रक्रिया’ – वर्ष की सर्वश्रेष्ठ पुस्तक (जोधपुर विश्वविद्यालय)
  • 1983: काका हाथरसी हास्य पुरस्कार
  • 2014: पद्म श्री
  • अनेक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सम्मान जैसे हास्य-रत्न, टी.ओ.वाई.पी. अवार्ड, दिल्ली रतन, साहित्य शिरोमणि, माइक्रोसॉफ्ट एमवीपी अवार्ड आदि।

साहित्यिक विशेषताएँ

  • हास्य और व्यंग्य: सामाजिक और राजनीतिक विसंगतियों पर करारी चोट
  • मंचीय कविता: वाचिक परंपरा का विकास
  • बाल साहित्य: सरल और सुसंगत बालकेंद्रित भाषा
  • छंद और भाषा प्रयोग: आधुनिक हिंदी में छंद का कुशल प्रयोग

निधन

अशोक चक्रधर का निधन 10 मई 2023 को हुआ। वे अपनी बहुमुखी प्रतिभा, हास्य और व्यंग्य कौशल और साहित्यिक योगदान के लिए हमेशा याद किए जाएंगे।

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