उषा प्रियंवदा का जीवन परिचय (Usha priyamvada ka jeevan parichay)

जीवन परिचय

उषा प्रियंवदा हिंदी साहित्य की प्रमुख प्रवासी लेखिका, उपन्यासकार और कथाकार हैं, जिन्होंने आधुनिक शहरी जीवन की जटिलताओं, अकेलेपन, भावनात्मक रिक्तता और बदलते मानवीय संबंधों को अत्यंत संवेदनशीलता और यथार्थबोध के साथ प्रस्तुत किया है। उनका जन्म 24 दिसंबर 1930 को कानपुर, उत्तर प्रदेश में हुआ। उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय को चुना, जहाँ से उन्होंने अंग्रेज़ी साहित्य में एम.ए. और पी.एच.डी. की उपाधि प्राप्त की।

भारत में अध्यापन कार्य करने के बाद वे उच्च अध्ययन और अध्यापन हेतु अमेरिका गईं और वहाँ विस्कांसिन विश्वविद्यालय, मैडिसन में दक्षिण एशियाई अध्ययन विभाग में प्रोफेसर रहीं। प्रवासी जीवन के अनुभवों ने उनके लेखन को और अधिक गहराई प्रदान की। उनके कथा साहित्य में विशेष रूप से छठे और सातवें दशक के शहरी मध्यमवर्गीय जीवन की उदासी, ऊब, अकेलापन और संबंधों की टूटन का मार्मिक चित्रण मिलता है।

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now
Instagram Group Join Now

जन्म और प्रारंभिक जीवन

  • जन्म: 24 दिसंबर 1930
  • जन्म स्थान: कानपुर, उत्तर प्रदेश

उषा प्रियंवदा का बचपन एक शिक्षित और संस्कारयुक्त वातावरण में बीता। प्रारंभ से ही उन्हें पुस्तकों और अध्ययन में गहरी रुचि थी। यही रुचि आगे चलकर उनके साहित्यिक जीवन की आधारशिला बनी।

शिक्षा

  • इलाहाबाद विश्वविद्यालय से
    • अंग्रेज़ी साहित्य में एम.ए.
    • अंग्रेज़ी साहित्य में पी.एच.डी.

इलाहाबाद विश्वविद्यालय में अध्ययन के दौरान उनका संपर्क आधुनिक साहित्य, मनोविज्ञान और पश्चिमी कथा परंपरा से हुआ, जिसका प्रभाव उनके लेखन में स्पष्ट दिखाई देता है।

अध्यापन और प्रवासी जीवन

उषा प्रियंवदा ने अपने करियर की शुरुआत भारत में अध्यापन से की।

  • दिल्ली के लेडी श्रीराम कॉलेज में अध्यापन
  • इलाहाबाद विश्वविद्यालय में अध्यापन
  • फुलब्राइट स्कॉलरशिप प्राप्त कर अमेरिका गईं
  • अमेरिका के ब्लूमिंगटन (इंडियाना विश्वविद्यालय) में पोस्ट-डॉक्टोरल शोध
  • विस्कांसिन विश्वविद्यालय, मैडिसन में
    • दक्षिण एशियाई अध्ययन विभाग की प्रोफेसर

अमेरिका में रहते हुए उन्होंने भारतीय प्रवासी जीवन, सांस्कृतिक द्वंद्व और मानसिक अकेलेपन को बहुत निकट से अनुभव किया, जो उनके उपन्यासों और कहानियों में गहराई से अभिव्यक्त हुआ।

साहित्यिक विशेषताएँ और प्रमुख विषय

उषा प्रियंवदा का लेखन आडंबरहीन, गहन और मनोवैज्ञानिक है। वे घटनाओं से अधिक मनःस्थितियों को महत्व देती हैं।

मुख्य विषय:

  • शहरी मध्यमवर्गीय जीवन
  • अकेलापन और भावनात्मक रिक्तता
  • स्त्री-पुरुष संबंधों की जटिलता
  • पारिवारिक विघटन
  • आधुनिक जीवन की ऊब और तनाव
  • प्रवासी जीवन की संवेदनाएँ

उनकी भाषा सरल, संयत और अत्यंत प्रभावशाली है, जिसमें भावनात्मक गहराई स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।

प्रमुख उपन्यास

  • पचपन खंभे लाल दीवारें (1961)
  • रुकोगी नहीं राधिका (1967)
  • शेष यात्रा (1984)
  • अंतर्वंशी (2000)
  • भया कबीर उदास (2007)
  • नदी (2013)

प्रमुख कहानी संग्रह

  • ज़िंदगी और गुलाब के फूल (1961)
  • एक कोई दूसरा (1966)
  • फिर वसंत आया
  • कितना बड़ा झूठ
  • वनवास
  • शून्य
  • मेरी प्रिय कहानियाँ
  • पिघलती हुई बर्फ

साहित्यिक महत्व

उषा प्रियंवदा हिंदी साहित्य में शहरी संवेदनशीलता की सबसे सशक्त कथाकारों में मानी जाती हैं। उन्होंने बिना किसी वैचारिक नारेबाज़ी के, सामान्य जीवन की पीड़ा और चुप्पे दुःखों को स्वर दिया। उनके उपन्यास और कहानियाँ आज भी पाठकों को मानसिक रूप से झकझोरती हैं।

पुरस्कार और सम्मान

  • प्रेमचंद पुरस्कार (1976)
  • डॉ. मोटूरी सत्यनारायण पद्मभूषण पुरस्कार (2009)
Scroll to Top