इलाचन्द्र जोशी का जीवन परिचय (Ilachandra Joshi Biography in Hindi)

प्रस्तावना

इलाचन्द्र जोशी हिंदी साहित्य के उन विशिष्ट रचनाकारों में हैं जिन्होंने हिंदी उपन्यास को मनोवैज्ञानिक आधार प्रदान किया। उन्हें हिंदी में मनोवैज्ञानिक उपन्यासों का प्रवर्तक माना जाता है। उन्होंने केवल मनोवैज्ञानिक यथार्थ का चित्रण ही नहीं किया, बल्कि उसे आदर्शवाद और मानवीय मूल्यों से भी जोड़ा। प्रेमचंद जहाँ सामाजिक यथार्थवाद के प्रतिनिधि हैं, वहीं इलाचन्द्र जोशी आदर्शवादी मनोवैज्ञानिक उपन्यासकार के रूप में प्रतिष्ठित हैं।

जन्म एवं प्रारंभिक जीवन

इलाचन्द्र जोशी का जन्म 13 दिसंबर 1903 को उत्तराखंड (तत्कालीन उत्तरांचल) के अल्मोड़ा क्षेत्र में हुआ। पर्वतीय परिवेश, हिमालय की प्राकृतिक सुंदरता, झरने, घाटियाँ, नदियाँ और वनस्पतियों से आच्छादित वातावरण ने उनके मन और साहित्यिक संवेदना को गहराई से प्रभावित किया।

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now
Instagram Group Join Now

बाल्यकाल से ही वे असाधारण प्रतिभा के धनी थे और अध्ययन में उनकी विशेष रुचि थी।

शिक्षा एवं स्वाध्याय

इलाचन्द्र जोशी को औपचारिक शिक्षा में विशेष रुचि नहीं थी।

  • उनकी स्कूली शिक्षा मैट्रिक तक ही हो सकी
  • किंतु स्वाध्याय के माध्यम से उन्होंने अनेक भारतीय और विदेशी ग्रंथों का अध्ययन किया
  • भारतीय महाकाव्यों के साथ-साथ पाश्चात्य साहित्य का गहन अध्ययन

इसी स्वाध्याय के बल पर उन्होंने कई भाषाओं का ज्ञान अर्जित किया।

साहित्यिक जीवन की शुरुआत

इलाचन्द्र जोशी ने अपनी साहित्यिक यात्रा काव्य-रचना से आरंभ की, जैसा कि अधिकांश साहित्यकारों के साथ हुआ।
बाद में उनका झुकाव उपन्यास, कहानी और आलोचना की ओर हुआ।

घर का वातावरण छोड़कर वे कोलकाता पहुँचे, जहाँ उनका संपर्क प्रसिद्ध बंगला साहित्यकार शरतचन्द्र चट्टोपाध्याय से हुआ। इस संपर्क ने उनके साहित्यिक दृष्टिकोण को और अधिक परिपक्व किया।

उपन्यासकार के रूप में पहचान

इलाचन्द्र जोशी मुख्यतः उपन्यासकार के रूप में ही प्रसिद्ध हुए।
उनके उपन्यासों का आधार मनोवैज्ञानिक यथार्थवाद है।

हालाँकि मनोवैज्ञानिक उपन्यासों पर सामान्यतः फ्रायड के सिद्धांतों का प्रभाव माना जाता है, परंतु

  • इलाचन्द्र जोशी पर फ्रायड से अधिक
  • रूसी उपन्यासकार टॉल्स्टॉय और दॉस्तोयेव्स्की का प्रभाव दिखाई देता है

उनके पात्रों में

  • मानसिक कुंठाएँ
  • दमित इच्छाएँ
  • नैतिक द्वंद्व
  • पश्चाताप और आत्मबोध
    स्पष्ट रूप से देखने को मिलते हैं।

उनके उपन्यासों के नायक

इलाचन्द्र जोशी के नायक

  • पूर्णतः आदर्श या धीर-उदात्त नहीं होते
  • मानवीय दुर्बलताओं से युक्त होते हैं
  • कभी-कभी असामाजिक कर्म भी करते हैं

लेकिन

  • अंततः वे आत्मबोध प्राप्त करते हैं
  • पश्चाताप से गुजरते हैं
  • और आदर्श की ओर अग्रसर होते हैं

यही कारण है कि उनके उपन्यास आदर्शवादी मनोवैज्ञानिकता के श्रेष्ठ उदाहरण माने जाते हैं।

प्रमुख उपन्यास

इलाचन्द्र जोशी के प्रमुख उपन्यास निम्नलिखित हैं –

  • घृणामयी (1929) – बाद में लज्जा नाम से प्रकाशित
  • लज्जा (1950)
  • संन्यासी
  • परदे की रानी
  • प्रेत और छाया
  • मुक्तिपथ
  • जिप्सी
  • जहाज़ का पंछी
  • भूत का भविष्य
  • सुबह
  • निर्वासित
  • ऋतुचक्र

कहानीकार के रूप में योगदान

उपन्यास के साथ-साथ इलाचन्द्र जोशी ने कहानियाँ भी लिखीं।
उनकी कहानियों में भी मनोवैज्ञानिक विश्लेषण और मानवीय संवेदना प्रमुख है।

प्रमुख कहानी-संग्रह

  • धूपरेखा
  • आहुति
  • खंडहर की आत्माएँ

आलोचक और निबंधकार

इलाचन्द्र जोशी हिंदी के आरंभिक गंभीर कथालोचकों में से एक थे।
उन्होंने विश्व साहित्य के संदर्भ में हिंदी साहित्य की समीक्षा की।

प्रमुख आलोचनात्मक एवं निबंधात्मक कृतियाँ

  • साहित्य सर्जना
  • साहित्य चिंतन
  • विवेचना
  • रवीन्द्रनाथ
  • शरद: व्यक्ति और साहित्यकार
  • उपनिषद की कथाएँ

संपादन, अनुवाद और अन्य कार्य

इलाचन्द्र जोशी कई प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं से जुड़े रहे –

  • कोलकाता समाचार
  • चाँद
  • विश्ववाणी
  • सुधा
  • सम्मेलन पत्रिका
  • साहित्यकार

उन्होंने

  • बाल-साहित्य
  • अनुवाद
  • आकाशवाणी में भी कार्य किया
    और रवीन्द्रनाथ टैगोर की रचनाओं का हिंदी में अनुवाद किया।

लेखन के विषय और दृष्टि

इलाचन्द्र जोशी के साहित्य के प्रमुख विषय –

  • मनोवैज्ञानिक ग्रंथियाँ और कुंठाएँ
  • काम-वासना और दमित इच्छाएँ
  • नारी-समस्याएँ
  • पतित और उपेक्षित नारी का पुनर्वास
  • नैतिकता और आत्मपरिष्कार

उन्होंने वेश्याओं और तथाकथित पतित नारियों को भी अपनी रचनाओं की नायिका बनाया और उनमें सुधार और आत्मविकास की संभावनाएँ दिखाई।

मनोवैज्ञानिक उपन्यासों में योगदान

हिंदी में मनोवैज्ञानिक उपन्यासों का प्रारंभ इलाचन्द्र जोशी से ही माना जाता है
लेकिन उनकी विशेषता यह रही कि

  • उन्होंने मनोविज्ञान को लक्ष्य नहीं
  • बल्कि साधन बनाया

उनके पात्र

  • मनोग्रंथियों से ग्रस्त होते हैं
  • जब तक ग्रंथि का कारण नहीं समझते, तब तक भटकते रहते हैं
  • ग्रंथि का रहस्य खुलते ही सामान्य जीवन की ओर लौट आते हैं

आलोचनात्मक मूल्यांकन

आलोचकों के अनुसार –

  • इलाचन्द्र जोशी, जैनेन्द्र और अज्ञेय ने हिंदी साहित्य को नया मोड़ दिया
  • उन्होंने बाह्य घटनाओं से हटकर अंतर्मन की यात्रा कराई
  • वे मनोवैज्ञानिक उपन्यास के आदर्शवादी प्रवर्तक हैं

हालाँकि कुछ आलोचक उनकी आलोचना-दृष्टि को व्यक्तिवादी और दोषदर्शी भी मानते हैं।

निधन

इलाचन्द्र जोशी का निधन 1982 में हुआ।
उनके निधन के साथ हिंदी साहित्य का एक महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक अध्याय समाप्त हो गया।

Scroll to Top