अमृतलाल नागर का जीवन परिचय (Amritlal Nagar Biography in Hindi)

भूमिका

अमृतलाल नागर (1916–1990) बीसवीं शताब्दी के उन महान हिंदी साहित्यकारों में हैं, जिन्होंने उपन्यास, कहानी, नाटक, व्यंग्य, बाल साहित्य, शोध, पत्रकारिता और फिल्म लेखन—सभी क्षेत्रों में समान अधिकार से लेखन किया।
उन्हें ‘प्रेमचंद का सच्चा साहित्यिक उत्तराधिकारी’ कहा जाता है, क्योंकि उनकी रचनाओं में भारतीय समाज, संस्कृति, इतिहास और जनजीवन का यथार्थपरक तथा मानवीय चित्रण मिलता है।
उन्होंने प्राचीन भारतीय परंपरा से लेकर आधुनिक भारत की सामाजिक-राजनीतिक विसंगतियों तक को अपनी लेखनी का विषय बनाया।

जन्म एवं पारिवारिक पृष्ठभूमि

  • जन्म: 17 अगस्त 1916
  • जन्म स्थान: गोकुलपुरा, आगरा, उत्तर प्रदेश
  • परिवार: गुजराती नागर ब्राह्मण परिवार
  • पिता: राजाराम नागर
  • माता: विद्यावती नागर

अमृतलाल नागर को साहित्यिक संस्कार पारिवारिक वातावरण से ही प्राप्त हुए। बचपन से ही उनमें पढ़ने-लिखने और सामाजिक चेतना की गहरी रुचि थी।

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now
Instagram Group Join Now

प्रारंभिक जीवन और स्वतंत्रता आंदोलन

बाल्यावस्था में ही अमृतलाल नागर कांग्रेस की ‘वानर सेना’ के सक्रिय सदस्य बन गए थे।
उन्होंने ब्रिटिश शासन के विरुद्ध गतिविधियों में भाग लिया, जिससे उनके भीतर

  • राष्ट्रीय चेतना
  • सामाजिक उत्तरदायित्व
  • जनपक्षधर दृष्टि
    का विकास हुआ।

शिक्षा और बौद्धिक निर्माण

  • औपचारिक शिक्षा: हाईस्कूल तक
  • किंतु उन्होंने स्वाध्याय द्वारा—
    • साहित्य
    • इतिहास
    • पुराण
    • पुरातत्व
    • समाजशास्त्र
      का गहन अध्ययन किया।

भाषा ज्ञान

अमृतलाल नागर बहुभाषी लेखक थे—

  • हिंदी
  • गुजराती
  • मराठी
  • बांग्ला
  • अंग्रेज़ी

इस बहुभाषिकता ने उनके साहित्य को व्यापक दृष्टि और समृद्ध वैचारिक आधार प्रदान किया।

साहित्यिक जीवन की शुरुआत

  • लेखन की शुरुआत कविता से की
  • मेघराज इंद्र’ नाम से कविताएँ लिखीं
  • तस्लीम लखनवी’ नाम से व्यंग्य लेखन किया

उनका पहला कहानी-संग्रह ‘वाटिका’ (1935) प्रकाशित हुआ, जिसने उन्हें कम उम्र में ही साहित्यिक पहचान दिला दी।

पत्रकारिता और संपादन

अमृतलाल नागर ने स्वतंत्र लेखक और पत्रकार के रूप में कार्य जीवन आरंभ किया—

  • कोल्हापुर से प्रकाशित पत्रिका ‘चकल्लस’ के संपादक रहे
  • बाद में सुनीति, सिनेमा समाचार, नया साहित्य, सनीचर, प्रसाद आदि का संपादन किया

पत्रकारिता ने उनकी भाषा को सहज, संवादात्मक और जनसुलभ बनाया।

आकाशवाणी और फिल्म लेखन

  • ऑल इंडिया रेडियो, लखनऊ में ड्रामा प्रोड्यूसर रहे
  • उस समय सलाहकार मंडल में
    • भगवतीचरण वर्मा
    • सुमित्रानंदन पंत
    • नरेंद्र शर्मा
      जैसे दिग्गज साहित्यकार शामिल थे

बाद में उन्होंने रेडियो से अवकाश लेकर स्वतंत्र साहित्य-सृजन को पूर्णतः अपना लिया।
हिंदी सिनेमा में उन्होंने पटकथा और संवाद लेखन भी किया।

साहित्यिक योगदान और विशेषताएँ

अमृतलाल नागर का साहित्य—

  • भारतीय समाज का जीवंत दस्तावेज़ है
  • ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक यथार्थ का समन्वय करता है
  • मनुष्य और मनुष्यता के संघर्ष को केंद्र में रखता है

शैलीगत विशेषताएँ

  • सरल, सहज और प्रवाहमयी भाषा
  • लोकोक्तियों और मुहावरों का प्रभावी प्रयोग
  • भावात्मक, वर्णनात्मक और चित्रात्मक शैली
  • यथार्थ और संवेदना का संतुलन

प्रमुख रचनाएँ

उपन्यास

महाकाल, बूँद और समुद्र, शतरंज के मोहरे, सुहाग के नूपुर, अमृत और विष,
सात घूँघट वाला मुखड़ा, एकदा नैमिषारण्ये, मानस का हंस,
नाच्यौ बहुत गोपाल, खंजन नयन, बिखरे तिनके, अग्निगर्भा, करवट, पीढ़ियाँ

कहानी-संग्रह

वाटिका, अवशेष, तुलाराम शास्त्री, आदमी नहीं! नहीं!, पाँचवाँ दस्ता,
एक दिल हज़ार दास्ताँ, एटम बम, पीपल की परी, कालदंड की चोरी

व्यंग्य

नवाबी मसनद, सेठ बाँकेमल, कृपया दाएँ चलिए, हम फिदाए लखनऊ, चकल्लस

नाटक

युगावतार, बात की बात, चंदन वन, चक्करदार सीढ़ियाँ और अँधेरा,
उतार-चढ़ाव, नुक्कड़ पार, चढ़त न दूजो रंग

बाल साहित्य

नटखट चाची, बजरंगी नौरंगी, बाल महाभारत, इतिहास झरोखे,
अक्ल बड़ी या भैंस, सात भाई चंपा, सोमू का जन्मदिन

अनुवाद

बिसाती, प्रेम की प्यास, काला पुरोहित, आँखों देखा गदर, दो फक्कड़, सारस्वत

सम्मान और पुरस्कार

  • साहित्य अकादमी पुरस्कार (1967)अमृत और विष
  • पद्म भूषण (1981)
  • सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार
  • प्रेमचंद पुरस्कार
  • भारत भारती सम्मान

निधन

  • निधन: 23 फरवरी 1990
  • स्थान: लखनऊ

उनका निधन हिंदी साहित्य के लिए एक युगांतकारी क्षति था।

Scroll to Top