प्रस्तावना
यतींद्र मिश्र समकालीन हिंदी साहित्य के महत्त्वपूर्ण कवि, संपादक, संगीत-अध्येता और सांस्कृतिक आलोचक हैं। उनकी पहचान एक ऐसे रचनाकार के रूप में है जो कविता, शास्त्रीय संगीत, सिनेमा, नृत्य और दृश्य कलाओं को एक साझा रचनात्मक दृष्टि से देखता है। उनकी रचनाओं में भारतीय सांस्कृतिक परंपरा, सौंदर्यबोध और आधुनिक संवेदना का गहरा समन्वय दिखाई देता है।
जन्म एवं प्रारंभिक जीवन
यतींद्र मिश्र का जन्म 12 मई 1977 को अयोध्या, उत्तर प्रदेश में हुआ। अयोध्या की सांस्कृतिक, धार्मिक और ऐतिहासिक चेतना का प्रभाव उनके व्यक्तित्व और रचनात्मक संवेदना पर प्रारंभ से ही पड़ा। कला और साहित्य में उनकी रुचि बचपन से स्पष्ट दिखाई देती है।
शिक्षा
यतींद्र मिश्र ने लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ से हिंदी भाषा और साहित्य में एम.ए. की उपाधि प्राप्त की।
शैक्षणिक जीवन के दौरान ही उन्होंने साहित्य के साथ-साथ—
- शास्त्रीय संगीत
- सिनेमा
- नृत्य
- चित्रकला
- प्रदर्शनकारी कलाओं
का गंभीर अध्ययन आरंभ कर दिया, जो आगे चलकर उनके रचनात्मक व्यक्तित्व की पहचान बना।
साहित्यिक परिचय
यतींद्र मिश्र मूलतः कवि हैं, लेकिन उनका रचनात्मक दायरा अत्यंत व्यापक है। वे—
- कवि
- संपादक
- संगीत-अध्येता
- सांस्कृतिक निबंधकार
के रूप में समान रूप से सक्रिय रहे हैं। उनकी रचनाएँ शब्द और सुर, अनुभूति और विचार, परंपरा और आधुनिकता के बीच एक सशक्त संवाद स्थापित करती हैं।
काव्य-रचनाएँ (Poetry Collections)
यतींद्र मिश्र के अब तक तीन प्रमुख कविता-संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं—
- अयोध्या तथा अन्य कविताएँ
- यदा-कदा
- ड्योढ़ी पर आलाप
इन कविताओं में—
- स्मृति और इतिहास
- संगीतात्मक लय
- सांस्कृतिक बोध
- निजी और सामाजिक अनुभव
एक साथ उपस्थित रहते हैं।
गद्य, संगीत और आलोचना
यतींद्र मिश्र ने कविता के अतिरिक्त शास्त्रीय संगीत और कलाओं पर महत्त्वपूर्ण गद्य लेखन किया है—
प्रमुख गद्य एवं आलोचनात्मक कृतियाँ
- गिरिजा – शास्त्रीय गायिका गिरिजा देवी के जीवन और संगीत साधना पर आधारित पुस्तक
- लता सुर गाथा – लता मंगेशकर के संगीत-जीवन पर केंद्रित चर्चित पुस्तक
- विस्मय का बखान – प्रदर्शनकारी कलाओं (संगीत, नृत्य, रंगमंच) पर निबंध संग्रह
- भैरवी – कन्नड़ शैव कवयित्री अक्क महादेवी के वचनों का हिंदी में पुनर्लेखन
संपादन कार्य
यतींद्र मिश्र का संपादन-कार्य हिंदी साहित्य में अत्यंत महत्त्वपूर्ण माना जाता है—
- रीतिकाल के अंतिम प्रतिनिधि कवि द्विजदेव की ग्रंथावली का (सन् 2000) सह-संपादन
- कुँवर नारायण पर आधारित दो पुस्तकों का संपादन
- SPIC MACAY के लिए विरासत-2001 कार्यक्रम का संपादन
- फ़िल्म निर्देशक एवं गीतकार गुलज़ार की कविताओं का चयन – यार जुलाहे
- गुलज़ार के गीतों का चयन – मीलों से दिन
पुरस्कार एवं सम्मान
यतींद्र मिश्र को उनके साहित्यिक और सांस्कृतिक योगदान के लिए अनेक सम्मान प्राप्त हुए हैं—
- 64वाँ राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार – लता सुर गाथा के लिए
- अन्य साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्थाओं द्वारा सम्मान
भाषा-शैली और रचनात्मक विशेषताएँ
यतींद्र मिश्र की रचनात्मक शैली की प्रमुख विशेषताएँ—
1. संगीतात्मकता
उनकी भाषा में आलाप, लय और नाद-संवेदना स्पष्ट रूप से महसूस की जा सकती है।
2. संस्कृतनिष्ठ एवं शुद्ध भाषा
उनकी भाषा परिष्कृत, गरिमामयी और सांस्कृतिक गहराई लिए होती है।
3. कला-समन्वय
साहित्य, संगीत, सिनेमा और दृश्य-कलाओं का अद्भुत समन्वय उनकी रचनाओं को विशिष्ट बनाता है।
4. परंपरा और आधुनिकता का संतुलन
वे भारतीय परंपरा से जुड़े रहते हुए आधुनिक जीवन के प्रश्नों को भी अभिव्यक्त करते हैं।
