प्रस्तावना
विष्णु खरे हिंदी साहित्य के बहुआयामी और अत्यंत प्रभावशाली रचनाकार थे। वे कवि होने के साथ-साथ आलोचक, अनुवादक, पत्रकार और सांस्कृतिक टिप्पणीकार भी थे। उनकी पहचान एक ऐसे लेखक के रूप में है जिसने कविता को केवल भावुक अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि बौद्धिक, ऐतिहासिक और वैचारिक विमर्श का सशक्त माध्यम बनाया। समकालीन हिंदी कविता में विष्णु खरे का स्थान विशिष्ट और अपरिहार्य माना जाता है।
जन्म एवं प्रारंभिक जीवन
विष्णु खरे का जन्म 9 फ़रवरी 1940 को छिंदवाड़ा, मध्य प्रदेश में हुआ। उनका पालन-पोषण एक शिक्षित और बौद्धिक वातावरण में हुआ, जिसने उनके भीतर इतिहास, राजनीति, भाषा और संस्कृति के प्रति गहरी रुचि विकसित की। बचपन से ही वे अध्ययनशील और विचारशील प्रवृत्ति के थे।
शिक्षा
विष्णु खरे ने उच्च शिक्षा के रूप में—
- अंग्रेज़ी साहित्य का अध्ययन किया
उनकी शिक्षा का प्रभाव उनकी रचनाओं में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है—विशेषकर उनकी आलोचनात्मक दृष्टि, संदर्भों की व्यापकता और भाषा पर गहरी पकड़ में।
कार्यक्षेत्र एवं पेशेवर जीवन
विष्णु खरे का कार्यजीवन अत्यंत सक्रिय और बहुआयामी रहा—
- वे पत्रकारिता से लंबे समय तक जुड़े रहे
- उन्होंने नवभारत टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्र में कार्य किया
- वे साहित्यिक पत्र-पत्रिकाओं और सांस्कृतिक विमर्श में सक्रिय भूमिका निभाते रहे
पत्रकारिता ने उन्हें समकालीन राजनीति, समाज और वैश्विक घटनाओं को नजदीक से देखने-समझने का अवसर दिया, जिसका गहरा प्रभाव उनकी कविता और आलोचना में दिखता है।
साहित्यिक व्यक्तित्व
विष्णु खरे केवल कवि नहीं थे, बल्कि एक बौद्धिक कवि थे। उनकी रचनाएँ—
- इतिहास
- दर्शन
- राजनीति
- वैश्विक चेतना
- आधुनिक सभ्यता के संकट
जैसे विषयों से गहरे रूप में जुड़ी हुई हैं। वे कविता को विचार से अलग नहीं मानते थे।
काव्यगत विशेषताएँ
1. बौद्धिक और वैचारिक कविता
विष्णु खरे की कविताएँ विचारप्रधान होती हैं। वे पाठक से सक्रिय बौद्धिक सहभागिता की अपेक्षा करती हैं।
2. इतिहास और समय-बोध
उनकी कविता में इतिहास केवल पृष्ठभूमि नहीं, बल्कि एक सक्रिय तत्व है, जो वर्तमान से संवाद करता है।
3. आधुनिक सभ्यता पर आलोचनात्मक दृष्टि
उपभोक्तावाद, सत्ता, युद्ध, हिंसा और नैतिक पतन उनकी कविताओं के प्रमुख सरोकार हैं।
4. वैश्विक संदर्भ
उनकी कविताओं में भारतीय संदर्भों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय घटनाएँ, व्यक्तित्व और विचार भी शामिल हैं।
5. विडंबना और तीखापन
उनकी कविता में व्यंग्य, विडंबना और बौद्धिक कटाक्ष की गहरी उपस्थिति मिलती है।
भाषा-शैली
विष्णु खरे की भाषा-शैली की प्रमुख विशेषताएँ—
- तत्सम और आधुनिक शब्दावली का संतुलित प्रयोग
- गद्यात्मक कविता की सशक्त परंपरा
- तर्कपूर्ण और विश्लेषणात्मक भाषा
- भावुकता से अधिक विचारों पर ज़ोर
- गंभीर, सघन और चुनौतीपूर्ण शैली
उनकी कविता आसान नहीं, बल्कि सोचने को मजबूर करने वाली होती है।
प्रमुख काव्य-संग्रह
- एक गैर-रूमानी समय में
- सबकी आवाज़ के पर्दे में
- पिछला बाकी
- लालटेन जलाती हुई स्त्री
- कविता से लंबी कविता
आलोचनात्मक एवं वैचारिक कृतियाँ
विष्णु खरे हिंदी के महत्वपूर्ण आलोचक भी थे। उनकी आलोचना—
- साहित्य को सामाजिक और ऐतिहासिक संदर्भों में रखकर देखती है
- सरल प्रशंसा नहीं, बल्कि तार्किक मूल्यांकन करती है
अनुवाद कार्य
विष्णु खरे ने विश्व साहित्य से हिंदी को जोड़ने में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया।
उन्होंने अंग्रेज़ी और अन्य भाषाओं से कई महत्त्वपूर्ण रचनाओं का अनुवाद किया, जिससे हिंदी पाठकों को वैश्विक साहित्य से परिचित होने का अवसर मिला।
पुरस्कार एवं सम्मान
विष्णु खरे को उनके साहित्यिक योगदान के लिए अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित किया गया—
- साहित्य अकादमी पुरस्कार
- साहित्य अकादमी फ़ेलोशिप (हिंदी के सर्वोच्च सम्मानों में से एक)
- अन्य राष्ट्रीय साहित्यिक सम्मान
निधन
विष्णु खरे का निधन 19 सितंबर 2018 को हुआ। उनके निधन से हिंदी साहित्य ने एक निर्भीक, वैचारिक और प्रतिबद्ध लेखक को खो दिया।
