प्रस्तावना
अरुण कमल (जन्म: 15 फरवरी 1954) समकालीन हिंदी कविता के सबसे महत्वपूर्ण और प्रभावशाली कवियों में गिने जाते हैं। वे कवि के साथ-साथ आलोचक, निबंधकार और अनुवादक भी हैं। उनकी कविता का मूल स्वर सामाजिक सरोकारों, जनजीवन की समस्याओं, मानवीय संवेदनाओं और प्रतिरोध की चेतना से जुड़ा हुआ है। बोलचाल की भाषा, नए बिंब और खड़ी बोली के लय-छंदों के कारण उनकी कविताओं ने हिंदी कविता को एक नई दिशा दी।
जन्म एवं प्रारंभिक जीवन
अरुण कमल का जन्म 15 फरवरी 1954 को बिहार के रोहतास ज़िले के नासरीगंज में हुआ। उनका वास्तविक नाम अरुण कुमार है, किंतु साहित्यिक लेखन के लिए उन्होंने ‘अरुण कमल’ नाम अपनाया। उनका बचपन और किशोरावस्था बिहार के सामाजिक-राजनीतिक परिवेश में बीती, जहाँ असमानता, संघर्ष और जनजीवन के विविध रूपों को उन्होंने बहुत नज़दीक से देखा। यही अनुभव आगे चलकर उनकी कविता की वैचारिक ज़मीन बने।
शिक्षा
प्रारंभिक शिक्षा के बाद अरुण कमल उच्च शिक्षा के लिए पटना आए।
- शिक्षा: पटना विश्वविद्यालय
पटना का साहित्यिक और राजनीतिक वातावरण उनके व्यक्तित्व और रचनाशीलता के विकास में अत्यंत महत्त्वपूर्ण रहा। इसी दौरान वे समकालीन कवियों, लेखकों और वैचारिक आंदोलनों के संपर्क में आए, जिससे उनकी साहित्यिक दृष्टि और अधिक व्यापक हुई।
पेशेवर जीवन
अरुण कमल ने अपना अधिकांश जीवन पटना विश्वविद्यालय के अंग्रेज़ी विभाग में प्राध्यापक के रूप में कार्य करते हुए बिताया।
- पद: अंग्रेज़ी विभाग में प्रोफेसर
- स्थिति: सेवानिवृत्त
अध्यापन के साथ-साथ वे निरंतर कविता, आलोचना और अनुवाद में सक्रिय रहे।
साहित्यिक जीवन और काव्य यात्रा
अरुण कमल का साहित्यिक जीवन उनके पहले कविता-संग्रह ‘अपनी केवल धार’ (1980) से आरंभ होता है।
इस संग्रह की शीर्षक कविता ‘अपनी केवल धार’ आज भी उनकी पहचान का सबसे सशक्त प्रतीक मानी जाती है।
उनकी कविताएँ—
- आपबीती से जगबीती तक का सफर तय करती हैं
- आम आदमी के दुःख-सुख, संघर्ष और उम्मीद को स्वर देती हैं
- शोषित, दलित और वंचित वर्ग के प्रति स्पष्ट प्रतिबद्धता व्यक्त करती हैं
वे सामान्य जीवन प्रसंगों को अत्यंत सहजता और कलात्मकता के साथ कविता में रूपांतरित करने की विशिष्ट क्षमता रखते हैं।
काव्यगत विशेषताएँ
1. सामाजिक यथार्थ और प्रतिरोध
अरुण कमल की कविताओं में सामाजिक अन्याय, असमानता और सत्ता-संरचनाओं के विरुद्ध प्रतिरोध का स्वर प्रमुख है। वे कविता को केवल सौंदर्य का साधन नहीं, बल्कि संवेदनशील हस्तक्षेप मानते हैं।
2. भाषा और शिल्प
- भाषा: बोलचाल की सहज खड़ी बोली
- शैली: नए बिंब, ताज़े प्रतीक और लयात्मक प्रवाह
- विशेषता: भाषा विषय के अनुसार ढलती है, कृत्रिमता नहीं आती
3. विषयवस्तु
- जनजीवन की समस्याएँ
- मानवीय संवेदनाएँ
- श्रम, संघर्ष और उम्मीद
- व्यक्ति और समाज का द्वंद्व
प्रमुख रचनाएँ
कविता-संग्रह
- अपनी केवल धार (1980)
- सबूत (1989)
- नए इलाके में (1996)
- पुतली में संसार (2004)
- मैं वो शंख महाशंख (2013)
- योगफल (2019)
आलोचना और गद्य
- कविता और समय
- गोलमेज़
- कथोपकथन (साक्षात्कार)
इन रचनाओं में उन्होंने समकालीन कविता, समाज और समय के संबंधों पर गहन विचार प्रस्तुत किए हैं।
अनुवाद कार्य
अरुण कमल का अनुवाद-कार्य हिंदी साहित्य को वैश्विक साहित्य से जोड़ता है—
- अंग्रेज़ी में समकालीन भारतीय कविताओं का अनुवाद: Voices
- वियतनामी कवि तो हू की कविताओं और टिप्पणियों का अनुवाद
- मायकोव्स्की की आत्मकथा का हिंदी अनुवाद
उनकी कविताएँ अनेक भारतीय और विदेशी भाषाओं में अनूदित हो चुकी हैं।
पुरस्कार और सम्मान
- साहित्य अकादमी पुरस्कार (1998) – नए इलाके में
- भारत भूषण अग्रवाल पुरस्कार (1980)
- सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार (1989)
- श्रीकांत वर्मा स्मृति सम्मान (1990)
- रघुवीर सहाय स्मृति सम्मान (1996)
- शमशेर सम्मान (1997)
साहित्य में स्थान और महत्व
अरुण कमल की कविता समकालीन हिंदी कविता की जनपक्षधर धारा का सशक्त प्रतिनिधित्व करती है। वे उन कवियों में हैं जिन्होंने कविता को—
- आम आदमी के अनुभवों से जोड़ा
- भाषा को लोकतांत्रिक बनाया
- कविता को सामाजिक जिम्मेदारी का माध्यम बनाया
